पैरों में बिछिया पहनने के ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व

हिन्दू धर्म में महिलाओं के लिए पैरों में बिछिया पहनने का रिवाज प्राचीन काल से ही चला आ रहा है। हमारे सनातन हिन्दू धर्म में विवाह के बाद महिलाओं के द्वारा पैरों में बिछिया पहनी जाती हैं। बिछिया भी अन्य आभूषणाें की तरह महिलाओं के लिए एक विशेष आभूषण है। आज कल आधुनिकता की आड़ में अविवाहित लड़कियां भी पैरों में बिछिया पहन लेती हैं, लेकिन हमारे शास्त्रों की मानें तो बिछिया केवल सुहागिन स्त्रियों को ही पहननी चाहिए। यूँ तो शादी के बाद बिछिया पहनना महिलाएं सुहाग का प्रतीक मानती हैं और मुख्य रूप से ये हमारे हिन्दू धर्म की मान्यता से जुड़ा है, लेकिन पैरों में बिछिया पहनने के कुछ वैज्ञानिक महत्व भी हैं। आज इस लेख के द्वारा हम मुख्य रूप से आपको पैरों में बिछिया पहनने के वैज्ञानिक महत्व और ज्योतिषीय महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी की सुहागिन महिलाओं के लिए पैरों में बिछिया पहनना केवल धार्मिक स्तर पर ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बिछिया आमतौर पर चांदी की होती है जिसे विवाह के बाद सुहागिन स्त्रियां सुहाग की निशानी के रूप में दोनों पैरों के बीच की अंगुली में पहनती हैं। बिछिया ना केवल हिन्दू धर्म को मानने वाली महिलाएं पहनती हैं बल्कि इसे मुस्लिम महिलाएं भी पहनती हैं। आपको बता दें कि पैरों में पहने जाने वाले चांदी के इस आभूषण का प्रयोग त्रेतायुग से ही होता आया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सीता माता ने भी विवाह के बाद पैरों में बिछिया पहनी थी,और जब रावण द्वारा उनका अपहरण किया गया था तो बतौर निशानी उन्होनें अपने एक पैर की बिछिया श्री राम के लिए रास्ते में छोड़ दी थी। लिहाजा इससे एक बात तो जरूर साबित होती है कि बिछिया आज से ही नहीं बल्कि प्राचीन काल से ही महिलाएं पहनती आयीं हैं। बिछिया पहनने के वैज्ञानिक महत्वों के बारे में जानने से पहले आईये जानते हैं इसके ज्योतिषीय महत्व के बारे में।

बिछिया पहनने का ज्योतिषीय महत्व

बात करें बिछिया पहनने के ज्योतिषीय महत्व की तो आपको बता दें कि बिछिया वास्तव में विवाहित स्त्रियों के श्रृंगार का आखिरी आभूषण माना जाता है। माथे के टीके से लेकर पैरों की बिछिया तक का, विवाह के समय पहने जाने वाले आभूषणों में ख़ासा महत्व है। जिस प्रकार से सोने के मांगटीके को जीवन पर सूर्य का प्रभाव बनाये रखने के लिए पहना जाता है। उसी प्रकार से ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पैरों में चांदी की बिछिया जीवन पर चन्द्रमा का प्रभाव बनाये रखने के लिए पहना जाता है। चन्द्रमा विशेष रूप से मन को शांत करके शीतलता प्रदान करता है इसलिए पैरों में चांदी की बिछिया पहनने का विशेष महत्व है।

बिछिया पहनने का वैज्ञानिक महत्व

विवाहित महिलाओं का पैरों में बिछिया पहनना हमारे धार्मिक मान्यताओं से तो जुड़ा है ही, लेकिन इसके विशेष वैज्ञानिक महत्व भी बताये गये हैं। पैरों में बिछिया पहनने के कुछ वैज्ञानिक महत्व निम्लिखित हैं :

    • आयुर्वेद के अनुसार दोनों पैरों की दूसरी ऊँगली में बिछिया पहनना महिलाओं के गर्भवती होने में काफी सहायक सिद्ध होता है।
    • पैरों में बिछिया पहनने से विवाहित महिलाओं का मासिक चक्र नियमित रहता है।
    • महिलाओं के लिए पैरों में बिछिया पहनना एक तरह से एक्यूप्रेशर का भी काम करता है, जिससे पैरों के तलवे से लेकर नाभि तक की नसें सामान्य रूप से काम करती हैं।
    • ऐसा माना जाता है कि दोनों पैरों की दूसरी ऊँगली का सम्बन्ध विशेष रूप से महिलाओं के गर्भाशय से होता है। इसलिए पैरों में बिछिया पहनना गर्भधारण में भी सहायक होता है।
    • चांदी को शीतलता का सुचालक माना जाता है, लिहाजा पैरों में बिछिया पहनने से स्त्री का मन शांत रहता है और वो तरोताजा महसूस करती है।
    • आयुर्वेद के अनुसार बिछिया महिलाओं के साईटिक नर्व पर दवाब बनाती है, जिससे नसों में ब्लड का सर्कुलेशन तेज होता है और गर्भाशय से लेकर आंत तक खून का प्रवाह सामान्य रहता है।
    • बिछिया पहनने से महिलाओं का ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।

आधुनिकता की दौड़ में बिछिया का महत्व

प्राचीन काल में बिछिया को विशेष रूप से सुहाग की निशानी माना जाता था, वहीं आज आधुनिक काल में टो रिंग के नाम से इसे जाना जाने लगा है। आजकल विवाहित महिलाओं के साथ ही फैशन की आड़ में अविवाहित लडकियां भी इसे पहनने लगी हैं। बाजार में आजकल चाँदी के अलावा अन्य प्रकार की बिछिया भी मिलने लगी हैं। खासतौर से अविवाहित लडकियां मेटल की बनी बिछिया पहनना पसंद करती हैं। फैशन की इस दौड़ में लड़कियां आजकल पैर की किसी भी अंगुली में बिछिया पहनने लगी हैं। लेकिन विज्ञान और ज्योतिशास्त्र की मानें तो बिछिया कुंवारी लड़कियों को नहीं पहनना चाहिए। इसे हमेशा शादी के बाद ही पहना जाना चाहिए। विवाह के वक़्त किये जाने वाले सोलह श्रृंगारों में पैरों में बिछिया पहनना भी ख़ास है। इसके बिना सुहागिन स्त्रियों का श्रृंगार पूरा नहीं माना जाता है।

बिछिया पहनने के बाद रखें इन बातों का विशेष ध्यान

  • भूलकर भी सोने की बिछिया ना पहनें, बिछिया हमेशा चांदी का ही पहनें।
  • विवाहित स्त्रियां इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पैर में पहने जाने वाली बिछिया किसी भी हाल में गुम ना हो या उतर ना जाये।
  • कभी भी अपने पैर में पहनी हुई बिछिया किसी और को उपहार स्वरुप ना दें। इसे सुहाग की निशानी माना जाता है, इसलिए इस पर उसी स्त्री का हक़ होता जिसके पास वो शुरुआत से होती है।
  • बिछिया ना पहनने से पति के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है और परिवार में धन की हानि हो सकती है।
  • इसे हमेशा दोनों पैरों की दूसरी और तीसरी अंगुली में पहना जाना चाहिए।

हम आशा करते हैं कि हमारे इस लेख के जरिये आप बिछिया पहनने के वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व के बारे में भली-भांति जान गए होंगें।

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