कुंडली में षष्ठम भाव- शत्रु, रोग और कर्ज का घर

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में षष्ठम भाव को रोग, कर्ज और शत्रुओं के भाव के नाम से जाना जाता है। यह कुंडली का सबसे विरोधाभासी भाव होता है। यह भाव रोगों को जन्म देता है लेकिन वहीं स्वस्थ होने की शक्ति भी प्रदान करता है। इस भाव से लोन या कर्ज मिलता है वहीं यह भाव कर्ज को चुकाने की क्षमता भी देता है। षष्ठम भाव शत्रुओं को भी दर्शाता है लेकिन विरोधियों से लड़ने की ताकत और साहस भी प्रदान करता है। इस भाव को तपस्या का भाव भी कहा गया है। यह भाव त्याग और अलगाव को भी दर्शाता है। षष्ठम भाव की विभिन्न तरीकों से व्याख्या की जाती है:-

ऋण, अस्त्र, रोग, कष्ट, शत्रु, द्वेष,  पाप, दुष्कर्त्य, भय, तिरस्कार

कुंडली में षष्ठम भाव से क्या देखा जाता है?

षष्ठम भाव कर्ज, शत्रु, चोर, शरीर में घाव और निशान, निराशा, दुःख, ज्वर, पैतृक रिश्ते, पाप कर्म, युद्ध और रोग आदि को दर्शाता है। यह भाव कठिन परिश्रम, प्रतिस्पर्धा और कष्टों से जीवन में होने वाली वृद्धि को प्रकट करता है।

षष्ठम भाव का ज्योतिषीय महत्व

उत्तर कालामृत के अनुसार किसी भी तरह के समझौते और सहमति में कठिनाई, मामा, शरीर पर सूजन, पागलपन, मवाद से भरा फोड़ा, शत्रुता, ज्वर, कंजूसी, उधारी, मानसिक चिंता और पीड़ा, घाव, आंख में लगातार परेशानी, दान की प्राप्ति, असंयमित भोजन, कष्ट और परेशानी का भय बना रहना, सेवा, पेट और वात रोग से संबंधित गंभीर समस्या, चोरी, आपदा, कैदखाना और मुश्किल कार्यों का अध्ययन इस भाव से किया जाता है।

षष्ठम भाव से रोग या बीमारी की वास्तविक स्थिति, जातक कब तक इस रोग से पीड़ित रहेगा और रोग से ठीक होने के बारे में पता चलता है। यह भाव उन व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो रोगियों की सेवा में विश्वास रखते हैं। यह भाव संतुलित भोजन, संयमित खान-पान और शरीर की देखभाल नहीं करने से उत्पन्न होने वाले रोगों को दर्शाता है। काल पुरुष कुंडली में षष्ठम भाव की राशि कन्या है और इसका स्वामी बुध है।

‘जातक परिजात’ में वैद्यानाथ दीक्षित ने कहा कि रोग, शत्रु, बुरी आदतें और पीड़ा का बोध षष्ठम भाव से होता है।

ऋषि पराशर के अनुसार छठा भाव स्त्रियों की कुंडली में सौतेली मां, ज्ञानेंद्री और चरित्रहीन व्यवहार, गर्भपात और अचानक प्रसव होने को सूचित करता है।

षष्ठम भाव कर्म और सेवा, कर्मचारी, अधीनस्थ या सेवक को भी दर्शाता है। ज्योतिष में इस भाव की मदद से व्यक्ति की आंतरिक स्थिति, भक्ति और विश्वास का आकलन किया जाता है। यह भाव पालतू जानवर, छोटे मवेशी, घरेलू जीव, किरायेदार (खेती या घर के किरायेदार), शत्रुता, वस्त्र और शुद्धता, स्वच्छता, आहार विज्ञान, जड़ी-बूटी, भोजन, कपड़े और 6 प्रकार के स्वाद को भी प्रकट करता है।

षष्ठम भाव को उपचय स्थान भी कहा जाता है। यह प्रतिस्पर्धा की राह में आने वाली चुनौतियों का संकेत करता है। यदि कोई क्रूर ग्रह इस भाव में स्थित होता है तो वह इस भाव के नकारात्मक प्रभाव को कम कर देता है। इससे रोजमर्रा और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में लाभकारी परिणाम मिलते हैं।

ज्योतिष में षष्ठम भाव जादू और अंधविश्वास को भी दर्शाता है। यह चिंता और चिड़चिड़ाहट, शैतानी शक्ति, भय, अपमान, सूजन, मूत्र संबंधी समस्या, खसरा, निंदा, कैद खाना, सेवा, भाइयों के साथ ग़लतफ़हमी को प्रकट करता है।

मनुष्य जब तक जिंदा रहता है वह अनेक दुखों और परेशानियों से घिरा रहता है। कुंडली में सिर्फ षष्ठम भाव ही यह तय करता है कि बाहरी दुनिया से लड़ने के लिए किसी व्यक्ति में कितनी आंतरिक शक्ति है। यदि कोई व्यक्ति चुनौतियों से लड़ने में नाकाम रहता है तो वह शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान हो जाता है। यदि व्यक्ति के पास चुनौतियों से लड़ने के लिए मजबूत आत्मबल है, तो वह संसार में एक विजेता के रूप में उभरेगा। यह सब कुछ कुंडली में छठे भाव की मजबूत और दुर्बल स्थिति पर निर्भर करता है।

मेदिनी ज्योतिष के अनुसार छठा भाव सार्वजनिक शांति, पड़ोसियों के साथ रिश्ते, लोगों का स्वास्थ्य, राजनीतिक स्थिरता, देश की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता,  मुकदमे, न्यायपालिक की कार्यवाही, देश में सांप्रदायिक सौहार्द और श्रमिकों के साथ रिश्ते आदि को दर्शाता है।

यह भाव रोजगार, बेरोजगारी और मजदूरी की स्थिति का बोध कराता है। यह भाव श्रमिक संगठन और संस्थाओं व राष्ट्र रक्षा एवं सेना की सभी शाखाओं को दर्शाता है। यह लोक स्वास्थ्य, मेडिकल सेवाएँ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता जैसे- नर्सिंग, दंत चिकित्सक और डॉक्टर्स का प्रतिनिधित्व करता है। यह भाव उन सभी व्यक्तियों को दर्शाता है जो रिकॉर्ड और दस्तावेज सहेज कर रखते हैं, इनमें लाइब्रेरियन, बही खाता लेखक और कंप्यूटर विशेषज्ञ आदि हैं। षष्ठम भाव महामारी, रक्त जनित रोग, ऋण और कर्ज, लोहा और इस्पात उद्योग से परेशानी और उच्च मृत्यु दर आदि का प्रतिनिधित्व करता है। षष्ठम भाव रक्षा मंत्रालय, कमजोरी, लोक स्वास्थ्य, सेना, नौसेना और जंगी जहाजों को दर्शाता है।

षष्ठम भाव का कुंडली के अन्य भावों से अंतर्संबंध

कुंडली में षष्ठम अन्य भावों के साथ भी अंतर्संबंध स्थापित करता है। यह भाव गुप्त शत्रु, सहयोगी को होने वाला नुकसान, विदेश में जीवनयापन या प्रियतम के साथ मतभेद और अलगाव, मित्र की मृत्यु और बड़े भाई या मित्र को होने वाले नुकसान व भय को दर्शाता है। यह आपके पिता का नाम, प्रसिद्धि और उनका करियर व व्यवसाय को बोध कराता है।

छठा भाव प्रतिनियुक्ति और आधिकारिक यात्राएँ, ट्रांसफर, मित्रों की विरासत, अफेयर और गायन से भाग्योदय, भाषा और पारिवारिक व्यापार, पड़ोसियों की संपत्ति, मामा-मामी और बच्चों का बोध कराता है।

ज्योतिष शास्त्रों की पुस्तकों के अनुसार, यह भाव आपके छोटे भाई-बहनों के द्वारा वाहनों और बिल्डिंग की खरीद और बिक्री को दर्शाता है। यह भाव आपकी माता की लघु यात्राओं को भी प्रकट करता है।

लाल किताब के अनुसार षष्ठम भाव

लाल किताब के अनुसार षष्ठम भाव शत्रु, मामा, दादा और पाताल से संबंधित होता है। यदि द्वितीय और द्वादश भाव में कोई ग्रह नहीं है और षष्ठम भाव में कोई ग्रह स्थित हो, तो भी यह भाव हमेशा निष्क्रिय रहता है। षष्ठम भाव में स्थित ग्रह द्वादश भाव में बैठे ग्रह को सक्रिय करता है। यह भाव कुआं, पीठ, भूमिगत, कमर, शत्रु, मामा, मौसी, पालतू पशु, भूरा रंग, काला कुत्ता, खरगोश, पक्षी, भतीजा, बहन और बहनोई आदि को दर्शाता है।

आज के दौर में विरोधियों को पराजित किये बगैर अपने अस्तित्व को बनाये रखना बड़ा मुश्किल है। इस संसार में तमाम सुखों को प्राप्त करने और विरोधियों को परास्त करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। इनके बारे में षष्ठम भाव से विचार किया जाता है, इसलिए यह कुंडली में एक महत्वपूर्ण भाव है। छठा भाव रोग, कर्ज और शत्रु से लड़ने की शक्ति को दर्शाता है।

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