कोरोना काल में गंगा दशहरा के दिन ज़रूर करें इन चीज़ों का दान!

1 जून, सोमवार को “गंगा दशहरा” या “गंगावतरण” का पर्व मनाया जायेगा। शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था।

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इस दिन गंगा स्नान, गंगा जल का प्रयोग, दान-पुण्य, हवन-जप-तप और उपासना करना विशेष लाभकारी होता है। हजारों श्रद्धालु गंगा दशहरा के मौके पर हरिद्वार और वाराणसी में गंगा जी में डुबकी लगाते हैं। हालाँकि इस साल आपको इन जगहों पर जानें से बचना चाहिए, क्योंकि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार और कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए आपको भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जानें से बचना चाहिए! 

हिन्दू धर्म में गंगा नदी को “माँ” का स्थान प्राप्त है। अत्यंत पवित्र माने जाने वाली गंगा उत्तराखंड के गंगोत्री से निकलती हैं और भारत के कई महत्वपूर्ण जगहों से होकर गुजरती हैं। गंगा का जल व्यक्ति को पुण्य देता है और अनेक पापों का नाश करता है। गंगा को शिव की जटाओं से निकलने की बात तो हममें से अधिकांश लोगों को पता है, लेकिन क्या आप जानते है कि आखिर गंगा क्यों धरती पर अवतरित हुई थीं और इस दिन उपवास रखने और पूजा-पाठ करने से दस तरह के पाप दूर होते हैं। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको माँ गंगा और गंगा दशहरा पर्व से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएँगे, जिनके विषय में अभी तक आपको जानकारी नहीं होगी। साथ ही इस साल कोरोना की वजह से आप कैसे घरों में रहते हुए माँ गंगा की पूजा करेंगे, इसकी भी पूरी जानकारी देंगे। 

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गंगा दशहरा स्‍नान का शुभ मुहूर्त

इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, दान और स्नान-

गंगा दशहरा मुहूर्त

31 मई 2020

17:38:26 से दशमी आरम्भ

01 जून 2020

14:59:05 पर दशमी समाप्त

गंगा दशहरा का महत्‍व

हिंदु धर्म में गंगा दशहरा का बहुत महत्व होता है। पूजा-पाठ, हवन और मुंडन जैसे शुभ कार्य इस दिन पर किए जाते हैं। इस दिन उपवास रखने और पूजा-पाठ करने से दस तरह के पाप दूर होते हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि गंगा दशहरा के दिन किसी चीज़ का दान कर रहे हैं, तो वो भी संख्या में कम से कम 10 ज़रूर होनी चाहिए। पुराणों के अनुसार इसी दिन गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन गंगा नदी में स्नान करना भी बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन इस साल यह संभव नहीं हो पायेगा। तो आपके पास यदि घर पर गंगाजल है, तो उसे ही अपने नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करें और यदि नहीं है तो माँ गंगा का ध्यान करते हुए सादे पानी से ही नहा लें। गंगा दशहरा के दिन गंगा की आराधना करने से व्यक्ति को उसके पापों से मुक्ति और मोक्ष का लाभ मिलता है। 

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क्यों मनाते है गंगा दशहरा का पर्व?

गंगा दशहरा की एक प्रचलित कथा के अनुसार मां गंगा विष्णु जी के चरणों में रहा करती थीं। एक बार ऋषि भागीरथ को अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने के लिए बहते हुए जल की ज़रूरत थी। इसके लिए ऋषि भागीरथ ने मां गंगा की कठोर तपस्या की।  उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हो गईं, लेकिन गंगा के तेज बहाव के चलते भागीरथ अस्थियां विसर्जित नहीं कर पाए। तब मां गंगा ने कहा कि यदि भगवान शिव चाहे तो ये संभव हो सकता है। शिव जी अपनी जटाओं में गंगा को समा कर पृथ्वी पर उनकी धारा प्रवाह कर दें, तो यह संभव है। 

यह सुनने के बाद ऋषि भागीरथ ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने आग्रह स्वीकार कर लिया। शिव जी ने अपनी जटाओं को “नलिनी, हृदिनी, पावनी, सीता, चक्षुष, सिंधु और भागीरथी” नाम की  सात धाराओं में विभाजित किया। इनमें भागीरथी ही गंगा के नाम से प्रसिद्ध हुई। गंगा को हिन्दू धर्म में मोक्षदायिनी माना गया है। कुछ जगहों पर इन्हें पार्वती की बहन भी कहा जाता है। ये शिव की अर्धांगिनी मानी जाती हैं और अभी भी शिव की जटाओं में ही इनका वास है। 

माँ गंगा के 11 प्रमुख नाम 

शास्त्रों में कहा गया है कि पृथ्वी पर आने से पहले, मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल में रहती थीं। भगवान विष्णु के चरणों से निकली और भगवान शिव की जटाओं में लिपटी गंगा के जल में यदि कोई व्यक्ति डुबकी लगा ले, तो उसे विष्णु और शिव जी का आशीर्वाद एक साथ मिलता है।  गंगा नदी की शुरुआत गंगोत्री की पर्वतमाला से कुछ किलोमीटर ऊपर गोमुख नाम की गुफा से होती है और ये बंगाल की खाड़ी में गंगासागर पर जा कर खत्म होती है।

गंगा नदी का सागर से मिलने के कारण ही इस जगह का नाम गंगासागर है। गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक गंगा नदी को लगभग 108 अलग- अलग नामों से जानते हैं। पुराणों में भी इन 108 नामों का जिक्र किया गया है, लेकिन इनमें से 11 नाम ऐसे हैं जिनसे गंगा को भारत के अलग-अलग इलाकों में जाना जाता है। ये 11 नाम हैं- जाह्नवी, त्रिपथगा, उत्तर वाहिनी, दुर्गा, मंदाकिनी, भागीरथी, देव नदी, हुगली, शिवाया, मुख्या, पंडिता

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ज़रूर करें इन चीजों का दान 

  • गंगा दशहरे के दिन किसी भी नदी में स्नान करने और दान-तर्पण करने से मनुष्य के द्वारा जाने-अनजाने में किए गए कम से कम दस पापों से मुक्ति मिलती है। दस पापों का हरण होने के चलते ही इस तिथि को गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। 
  • इस दिन दान के तौर पर सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दोगुना फल मिलता है। 
  • गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु जिस भी वस्तु का दान करें उसकी संख्या कम से कम दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजा करें, उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए। ऐसा करने से शुभ फल और अधिक बढ़ जाते हैं। 
  • घड़ा, केला, नारियल, अनार, सुपारी, खरबूजा, आम, जल भरी सुराही, हाथ का पंखा आदि का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। 

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ऐसे करें माँ गंगा की पूजा

  • गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने का महत्व बताया गया है। लेकिन अगर आप गंगा में स्नान ना कर पाएं, तो घर में ही नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। 
  • नहाते समय ‘ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः’ का जाप ज़रूर करें। 
  • इसके बाद  ‘ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै स्वाहा’ मंत्र का जाप करते हुए हवन करे। 
  • माता गंगा के साथ ही भगीरथ हिमालय की भी पूजा करें। 
  • फिर 10 फल, 10 दीपक और 10 सेर तिल ले और ‘गंगायै नमः’ कहकर इनका दान करें। 
  • साथ ही घी मिले हुए सत्तू और गुड़ के पिण्ड को जल में डाल दें। 
  • इसके अलावा 10 की संख्या में वस्तुवें 10 ब्राह्मण को दान में दें।

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इस विधि से पूजा करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और दुर्लभ-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है। इस साल कोरोना की वजह से हर व्यक्ति बेहद परेशान है और अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिंतित है, ऐसे में माँ गंगा की पूजा आपको शांति प्रदान करेगी। लेकिन आपको यही सलाह दी जाती है कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और गंगा दशहरा की पूजा अपने घरों में रहते हुए करें। 

आशा करते हैं गंगा दशहरा पर हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपको पसंद आयी होगी।

एस्ट्रोसेज से जुड़े रहने के लिए आप सभी का धन्यवाद ! 

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