जानें जन्मदिवस संस्कार की महत्ता और संपूर्ण विधि

हिन्दू धर्म में जन्मदिवस संस्कार को भी अहम माना गया है। जिस प्रकार से भगवान राम और श्री कृष्ण के जन्म दिवस को रामनवमी और जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है, उसी प्रकार हर व्यक्ति का जन्मदिवस भी उसके लिए विशेष अहमियत रखता है। किसी भी व्यक्ति का जन्मदिन यूँ तो एक सामान्य दिन ही होता है लेकिन यदि हम हिन्दू धर्मशास्त्र के आधार पर देखें तो जन्मदिवस एक बेहद महत्वपूर्ण संस्कार है। हर व्यक्ति के जन्मदिन को बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए और हर वर्ग एवं हर उम्र के व्यक्ति को इस दिन ईश्वर से अपने समुचित विकास की कामना करनी चाहिए। आजकल के आधुनिक युग में जन्मदिन मनाने का तरीका काफी बदल गया है। आज इस लेख के जरिये हम आपको सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार जन्मदिवस संस्कार का महत्व और उसे संपन्न करने की सही विधि के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं हिन्दू धर्म में जन्मदिवस संस्कार का क्या है विशेष महत्व और साथ ही किस विधि से इसे संपन्न करना होगा फलदायी।

जन्मदिवस संस्कार की सही आयु

जन्मदिवस संस्कार को संपन्न करने के लिए कोई विशेष आयु नहीं होती। चूँकि जन्म दिवस संस्कार हर वर्ष संपन्न किया जाता है, इसलिए इस संस्कार के लिए किसी विशेष उम्र सीमा को निर्धारित नहीं किया गया है। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जन्मदिवस संस्कार हर साल हर उम्र के व्यक्ति का संपन्न करवाया जाना चाहिए। बच्चे के पैदा होने के साल भर के बाद से लेकर हर वर्ष उसका जन्मदिवस संस्कार विशेष रूप से संपन्न करवाना चाहिए।

जन्मदिवस संस्कार का महत्व

हिन्दू धर्मशास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति का जन्मदिवस संस्कार विशेष रूप से यज्ञ के साथ ही संपन्न करवाना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि यज्ञ द्वारा इंसान के अंतर आत्मा  की शुद्धि का काम विशेष रूप से होता है। इसके अलावा जन्मदिवस संस्कार का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मनुष्य योनि में जन्म लेना किसी भी व्यक्ति विशेष के लिए बेहद अहम होता है। जन्मदिवस संस्कार को यज्ञ द्वारा संपन्न करने का यदि अनुकूल समय ना हो तो इसे दीपयज्ञ या दीपदान के द्वारा भी संपन्न किया जा सकता है। आज इस लेख में हम आपको जन्मदिवस संस्कार के दीपदान क्रिया के अनुसार संपन्न करने की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं। हर व्यक्ति का जन्मदिन परिवार के सभी सदस्यों की उपस्थिति में बेहद हर्ष और उमंग के साथ मनाया जाना चाहिए।

जन्मदिवस संस्कार के दिन इन बातों का रखें विशेष ख्याल :

  • सुबह देर तक ना सोएं।
  • किसी भी प्रकार के मांसाहार भोजन का सेवन ना करें।
  • शराब, सिगरेट, गांजा आदि किसी भी नशीली पदार्थ का सेवन ना करें।
  • किसी के लिए भी मन में कोई बुरी भावना ना रखें।
  • ईश्वर की भक्ति से खुद को दूर ना रखें।

इस प्रकार से करें जन्मदिवस संस्कार की तैयारी

व्रतधारण

जन्मदिवस संस्कार को संपन्न करने के क्रम में पहली क्रिया व्रत धारण है। ऐसी मान्यता है कि यदि जन्मदिन के दिन व्रत रखा जाये तो व्यक्ति अपने लक्ष्य को पाने में सफलता हासिल कर सकता है। इस दिन व्यक्ति को अपने अंदर की बुराइयों का त्याग कर नए तरीके से जिंदगी की शुरुआत करनी चाहिए। इससे व्यक्ति पर ईश्वर की विशेष कृपा दृष्टि भी बनी रहती है।

क्रिया :  जन्मदिन के दिन व्रत रखने के बाद प्रतिज्ञा करें कि आप अपने अंदर की सभी बुराइयों का त्याग करते हुए एक सकारात्मक जीवन का अनुसरण करेंगे। रोजाना सुबह जल्दी उठना, रात को जल्दी सोने, रोजाना व्यायाम करने और एक स्वस्थ्य जीवन जीने की प्रतिज्ञा लें। इस दौरान क्रम से चार बार नीचे दिए मंत्र का जाप करें।

मंत्र : “ॐ अग्ने व्रतपते व्रतं चरिष्यामि, तत्ते प्रब्रवीमि। तच्छकेयम।
तेनधर्यासमिदमहम, अनृतात्सत्यमुपैमि।” (-मं.ब्र.1.6.9.-13)

पंचतत्व पूजा

चूँकि मनुष्य का शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है इसलिए जन्मदिवस संस्कार को संपन्न करने के दौरान सबसे पहले इन पंच तत्वों की पूजा की जाती है।

  • अग्नि- पृथ्वी पर बिना अग्नि के जीवन संभव नहीं है। सूर्य भी अग्नि का ही स्वरूप है। मानव शरीर में स्पर्श, स्पर्श और रूप को अग्नि का गुण माना जाता है।
  • पृथ्वी- पृथ्वी तत्व हमारे भौतिक भौतिक शरीर को दर्शाता है।
  • वायु- वायु इंसान के शरीर में श्वास की कारक है।
  • जल-  यह तत्व रस का कारक है। मानव शरीर में रक्त और बाकी तरल पदार्थों का कारक जल ही है।
  • आकाश- आकाश असीम है इसके अधिकार क्षेत्र में आशा और उत्साह आता है।

क्रिया 

  1. पूजा शुरू करने से पहले इन पांच तत्वों के लिए पांच छोटे हिस्सों में चावल रखे जाते हैं।
  2. अब इन चावलों को पांच अलग रंगों में रंग दिया जाता है।
  3. पृथ्वी के लिए हरा, जल के लिए नीला, अग्नि के लिए लाल, वायु के लिए पीला आकाश के लिए सफ़ेद रंग का प्रयोग किया जाता है।
  4. इन पांच तत्वों की पूजा के दौरान सबसे पहले क्रमशः अलग-अलग रंग के चावल और फूल को हाथों में लेते हुए सभी पांच तत्वों के मन्त्रों का जाप करें। पाँचों तत्वों के मंत्र नीचे दिए गए हैं।

मंत्र

पृथ्वी : “ॐ मही धौः पृथिवी च ना, इमं मिमिक्षताम। पिपृतां नो भरीमभिः।
ॐ पृथिव्यै नमः।
आहवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, ध्यायामि।” (-7.32)

वरुण : “ॐ तत्वा यामी ब्रह्मणा वन्दमानः, तदा शास्ते यजमानो हविर्भिः।
अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुश, स मा ना आयुः प्रमोषीः।
ॐ वरुणाय नमः।
आहवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, ध्यायामि।”(-17. 49)

अग्नि : “ॐ त्वं नो अग्नि वरुणस्य, विद्वान् देवस्य हेडो अवयासिसिष्ठाः यजिष्ठो वहितमः शोशुचानो, विश्वा द्वेषा सि प्रमुमुग्धयस्मत।
ॐ अग्नये नमः।
आहवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, ध्यायामि” (-29.3)

वायु : “ॐ आ नो नियूदभिः शतिनीभिरध्वर, सहस्त्रीणिभिरूप याहि यज्ञं।
वायो आस्मिनतिसवने मादयस्व, यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः।
ॐ वायुवे नमः।
आहवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, ध्यायामि” (27. 28)

आकाश : “ॐ या वां कशा मधुमत्यआश्विना सुनृतावती।
तया यज्ञं मिमिक्षतमं।
उपयामगृहीतो स्याश्रीभ्यां, त्वैष ते योनिर्माध्वीभ्यां त्वा।
ॐ आकाशयः नमः।
आहवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, ध्यायामि”(-7. 1. 1.)

दीपदान

जन्मदिवस संस्कार के दौरान दूसरी क्रिया दीपदान की होती है। इस विशेष क्रिया को व्यक्ति के मस्तिष्क से अंधकार को दूर कर उजाला फैलाने के उद्देश्य से संपन्न किया जाता है। दीपदान क्रिया का विशेष उद्देश्य होता है जीवन में आने वाली मुसीबतों का डटकर सामना करना। चाहे जिंदगी में कितनी भी परेशानी क्यों ना आयें लेकिन इंसान को दीपक की तरह ही हर परिस्थिति में जगमगाते रहना चाहिए।

क्रिया 

  1. किसी सुन्दर थाल में व्यक्ति के उम्र की गिनती के दीयें लें और उसे एक क्रम में रखें।
  2. सभी दीयों में एक दीया आकार में थोड़ा बड़ा रखें, इसे व्यक्ति के नए उम्र का प्रतीक माना जाता है।
  3. इन सभी दीयों को थाल में ॐ स्वस्तिक बनाकर सजाएं।
  4. थाली की सजावट के लिए विशेषरूप से फूल, फल धूपबत्ती और गुलदस्ते का इस्तेमाल करें।
  5. मंत्र जाप करते हुए दीयों को क्रम से जलाएं।

मंत्र : “ॐ अग्निज्योर्तिज्योर्तितिरग्नि स्वाहा। सूर्यो ज्योर्तिज्योर्ति सूर्यः स्वाहा।
अग्निवार्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा।
सूर्योवर्चो ज्योतिर्वचर्चः स्वाहा।
ज्योति सूर्यः सूर्योः ज्योतिः स्वाहा। “ (-36.24)

नोट : जन्मदिवस संस्कार के दौरान उपस्थित अन्य लोगों को निरंतर पांच बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए।

अगर जन्मदिन के दिन सादगी और सच्चाई के साथ रहा जाए तो आने वाले वक्त में भी ये गुण इंसान में बने रहते हैं।

हम आशा करते हैं की जन्मदिवस संस्कार पर आधारित हमारा ये लेख आपके लिए लाभकारी साबित होगा।

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