वैदिक ज्योतिष में ग्रहण को हमेशा से खास माना गया है। चाहे चंद्र ग्रहण हो या सूर्य ग्रहण, इनके दौरान न सिर्फ आकाश में हलचल होती है, बल्कि इसका असर धरती और मानव जीवन पर भी देखने को मिलता है। मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है और इसलिए इस अवधि को लेकर कई सावधानियां भी बताई जाती है। साल 2026 की बात करें तो यह वर्ष ग्रहणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि नए साल की शुरुआत में ही चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण दोनों लगने जा रहे हैं।

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ऐसे में लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता स्वाभाविक है कि चंद्र ग्रहण कब लगेगा, इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व क्या है और इसका असर आम जीवन पर किस तरह पड़ेगा। इसी कड़ी में एस्ट्रोसेज एआई अपने पाठकों के लिए लेकर आया है यह विशेष ब्लॉग, जिसमें हम आपको साल 2026 में लगने वाले पहले चंद्र ग्रहण से जुड़ी हर जरूरी जानकारी देंगे।
इस लेख में आप जानेंगे चंद्र ग्रहण का समय, सूतक काल, देश-दुनिया और सभी 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव, साथ ही किन राशियों को सावधान रहने की जरूरत होगी और किनके लिए यह ग्रहण शुभ साबित हो सकता है। इसके अलावा, हम बताएंगे ग्रहण के दौरान अपनाए जाने वाले खास उपाय भी। तो आइए, शुरू करते हैं और जानते हैं चंद्र ग्रहण 2026 से जुड़ी हर अहम बात।
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चंद्र ग्रहण 2026 : समय व तिथि
भारतीय संस्कृति में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थों से जुड़ा समय माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड में विशेष प्रकार की ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिसका प्रभाव प्रकृति और मानव जीवन दोनों पर पड़ता है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही ऐसी ही एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना लोगों का ध्यान खींचने वाली है।
मार्च 2026 में भारत में साल का पहला चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा, जो कई मायनों में खास रहेगा। 03 मार्च, 2026 मंगलवार के दिन यह चंद्र ग्रहण घटित होगा। इस दौरान चंद्रमा का रंग लालिमा लिए दिखाई देगा, जिसे आम भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है। यह चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को लगेगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा।
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पहला चन्द्र ग्रहण 2026 – खग्रास चंद्रग्रहण
| तिथि | दिन व दिनांक | चंद्र ग्रहण प्रारंभ समय | चंद्र ग्रहण समाप्त | दृश्यता का क्षेत्र |
| फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा | मंगलवार, 3 मार्च 2026 | दोपहर 15:20 बजे से | सायंकाल 18:47 बजे तक | पश्चिम एशिया के देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान, आदि के अतिरिक्त लगभग संपूर्ण एशिया में, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, दक्षिणी एवं उत्तरी अमेरिका और रूस में दृश्यमान होगा। भारत में यह खग्रास चंद्र ग्रहण ग्रस्तोदय के रूप में दिखेगा क्योंकि भारत के किसी भी क्षेत्र में जब चंद्रोदय होगा, उससे काफी पहले ही यह खग्रास चंद्र ग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा इसलिए भारत के किसी भी क्षेत्र में इस खग्रास चंद्र ग्रहण का प्रारंभ देखा नहीं जा सकेगा । भारत के केवल पूर्वी सुदूर राज्यों जैसे बंगाल के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, आदि में इस ग्रहण की खग्रास समाप्ति तथा ग्रहण समाप्ति देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त शेष भारत में जब चंद्रोदय होगा तब तक खग्रास समाप्त हो चुका होगा तथा केवल ग्रहण समाप्ति ही दृष्टिगोचर होगी। |
नोट: उपरोक्त तालिका में दिया गया ग्रहण 2026 (Grahan 2026) का समय भारतीय समय अनुसार है। यह चन्द्र ग्रहण भारत में दृश्य मान होगा इसलिए भारत में इस चन्द्र ग्रहण का धार्मिक प्रभाव भी होगा और इसका सूतक काल भी प्रभावी होगा। यह इस वर्ष का एकमात्र ऐसा ग्रहण है जो भारत में देखा जा सकेगा।
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सूतक काल, क्या भारत में लगेगा चंद्र ग्रहण 2026
मार्च 2026 में वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण पड़ रहा है, जो भारत में स्पष्ट रूप से देखा जाएगा। इसी कारण इस ग्रहण के साथ सूतक काल का प्रभाव भी माना जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग 09 घंटे पहले सूतक आरंभ हो जाता है। इस समय को धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान वातावरण में अशुभता बढ़ जाती है। इसलिए सूतक काल में किसी भी प्रकार के मांगलिक या शुभ कार्यों को करने से परहेज करना चाहिए।
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पूर्णिमा में लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण 2026
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही घटित होता है, जबकि सूर्य ग्रहण अमावस्या पर पड़ता है। इसी नियम के अंतर्गत मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि से जुड़ा हुआ है। खास बात यह है कि वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा सामान्य न होकर दो दिनों तक प्रभावी रहने वाली है।
हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूरी कला में होता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा पर किया गया जप, तप, दान और पूजा कई गुना फल देने वाला होता है। पूर्णिमा का विशेष संबंध मन और भावनाओं से होता है, क्योंकि चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है।
इस दिन मन शांत रहता है और ध्यान, साधना व आत्मचिंतन करना अधिक फलदायी माना जाता है। इसी कारण कई व्रत, धार्मिक अनुष्ठान और पर्व पूर्णिमा तिथि को ही मनाए जाते हैं। इसके अलावा पूर्णिमा पर गंगा स्नान, सत्यनारायण कथा, चंद्र देव की पूजा और जरूरतमंदों को दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
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चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान क्या सावधानियां बरतें
- ग्रहण और सूतक काल के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं। चंद्र ग्रहण के दौरान किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए।
- इस समय मंदिर में पूजा पाठ, हवन या किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचना उचित माना जाता है।
- भोजन पकाने और खाने से भी परहेज करने की परंपरा है, इसलिए पहले से बना हुआ सात्विक भोजन ही ग्रहण के बाद ग्रहण करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। उन्हें तेज धार वाली चीज़ों का प्रयोग नहीं करना चाहिए और अधिक देर तक बाहर निकलने से बचना चाहिए।
- आराम करना और मन को शांत रखना इस समय लाभकारी माना जाता है।
- इसके अलावा ग्रहण के समय नकारात्मक सोच से दूर रहना चाहिए।
- भजन, मंत्र जप या ईश्वर का स्मरण करना मन की स्थिरता के लिए अच्छा रहता है।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके घर की सफाई करना और पूजा स्थल को शुद्ध करना भी शुभ माना गया है।
चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान क्या करें क्या न करें
क्या करें
- ग्रहण के दौरान मन को शांत रखें और ईश्वर का स्मरण करें।
- मंत्र जप, भजन या ध्यान करना शुभ माना जाता है।
- घर के बने हुए भोजन में तुलसी या कुश घास डालकर रखें।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर की सफाई करें।
- पूजा स्थल को शुद्ध करें और दीप जलाएं।
- जरूरतमंदों को दान देना ग्रहण के बाद लाभकारी माना जाता है।
क्या न करें
- सूतक और ग्रहण काल में पूजा-पाठ या किसी नए कार्य की शुरुआत न करें।
- इस दौरान खाना पकाने और भोजन करने से बचें।
- किसी भी तरह के शुभ या मांगलिक कार्य न करें।
- गर्भवती महिलाएं बाहर निकलने या तेज़ औजारों का प्रयोग न करें।
- नकारात्मक सोच, बहस या क्रोध से दूर रहें।
- ग्रहण के समय सोना या आलस्य करना भी उचित नहीं माना जाता।
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चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान करें ये ख़ास उपाय
चंद्र ग्रहण के दिन कुछ विशेष उपाय करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस समय किए गए सरल उपाय कई गुना फल देते हैं।
मंत्र का जाप करें
ग्रहण काल में “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ चंद्राय नमः” या गायत्री मंत्र का जप करें। इससे मन शांत होता है और मानसिक तनाव दूर होता है।
दीपदान करें
ग्रहण समाप्त होने के बाद घी का दीपक जलाकर घर के मंदिर या तुलसी के पास रखें। इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक बनी रहती है।
दान करें
ग्रहण के बाद गरीबों, जरूरतमंदों या ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र, दूध, चावल या सफेद वस्तुएं दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
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स्नान व शुद्धिकरण करें
ग्रहण खत्म होते ही स्नान करें और गंगाजल मिलाकर पूरे घर में छिड़काव करें। इससे वातावरण शुद्ध होता है।
चंद्र दोष शांति उपाय
चंद्रमा की कृपा पाने के लिए सफेद फूल, दूध और चावल चंद्र देव को अर्पित करें और उनसे मानसिक शांति की प्रार्थना करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है।
चंद्र ग्रहण तभी संभव होता है जब चंद्रमा पूर्ण रूप से सूर्य के सामने होता है, इसलिए यह हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही पड़ता है।
हां, मार्च 2026 में लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य रहेगा।