साल 2021 के पहले चन्द्र ग्रहण से जुड़ी पांच बेहद जरूरी बातें जान लीजिये

सनातन धर्म में हमेशा से चंद्र ग्रहण का विशेष माना जाता है। अब साल 2021 के मई महीने में इस साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ऐसे में आज हम आपको इस लेख में साल 2021 के पहले चंद्र ग्रहण को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें बताने वाले हैं जिसका जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।

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01 – कब लगेगा साल 2021 का पहला चंद्र ग्रहण? 

हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2021 का पहला चंद्र ग्रहण विक्रम संवत 2078 के वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को बुधवार के दिन लगने जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2021 का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और शाम के 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 05 घंटे 02 मिनट रहेगी। साल का पहला चंद्र ग्रहण चूंकि वृश्चिक राशि में और अनुराधा नक्षत्र में लगने जा रहा है, ऐसे में इस चंद्र ग्रहण से सबसे ज्यादा प्रभावित भी वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र ही होंगे। इसके बाद साल 2021 का अगला चंद्र ग्रहण नवंबर महीने की 19 तारीख को लगेगा।

02 – भारत में चंद्र ग्रहण का असर कैसा रहेगा?

जाहीर है कि साल के पहले चंद्र ग्रहण को लेकर आपके मन में कई सवाल उभर रहे होंगे कि इस चंद्र ग्रहण का भारत में क्या प्रभाव रहने वाला है। ऐसे में आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2021 का पहला चंद्र ग्रहण भारत में उपच्छाया चंद्र ग्रहण के तौर पर नजर आने वाला है। ऐसे में आपको यह बताना जरूरी हो जाता है कि ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक उपच्छाया चंद्र ग्रहण के दौरान देश में ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होता है।

03 – क्या होता है उपच्छाया चंद्र ग्रहण?

चलिए अब आपको यह भी बता देते हैं कि उपच्छाया चंद्र ग्रहण क्या होता है। दरअसल उपच्छाया चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में सूर्य का प्रकाश की वजह से पृथ्वी के बाहरी हिस्से की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसी स्थिति को उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं। उपच्छाया चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा हमें पृथ्वी के छाया की वजह से धुंधला दिखाई देता है।

04 – अनुराधा नक्षत्र

चूंकि साल का पहला चंद्र ग्रहण अनुराधा नक्षत्र में लगने जा रहा है ऐसे में आपको अनुराधा नक्षत्र के बारे में भी बताना जरूरी हो गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अनुराधा नक्षत्र के स्वामी भगवान शनि माने जाते हैं। यह नक्षत्र किसी हल या फिर कमल के फूल जैसा दिखाई देता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सभी 27 नक्षत्रों में अनुराधा नक्षत्र 17वें स्थान पर आता है। इस नक्षत्र का संबंध राधा देवी से माना जाता है। इस नक्षत्र में पैदा होने वाले जातक लगनशील, आस्तिक व सकारात्मक सोच वाले माने जाते हैं।

05 – चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या ना करें 

चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ चीजों का विशेष रूप से ध्यान रखना होता है। कई कार्य इस दौरान वर्जित होते हैं और वहीं दूसरी तरफ कई कार्य ऐसे भी भी होते हैं जो कि इस दौरान चंद्र ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव को कम करते हैं। ऐसे में आइये अब आपको चंद्र रहन के दौरान उन कार्यों के बारे में बताते हैं जो इस अवधि में किए अथवा नहीं किए जाने चाहिए। 

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  • चंद्र ग्रहण की अवधि के दौरान जातकों को भोजन नहीं करना चाहिए। इससे जातक को अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। 
  • चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन तैयार करना भी वर्जित होता है। ऐसे में चंद्र ग्रहण की अवधि के दौरान आप भोजन न पकाएं। लेकिन यदि आपने पहले ही भोजन पका लिया है तो उसमें आप तुलसी पत्र रख दें। इससे चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभावों का आपके भोजन पर कोई असर नहीं होगा।
  • चंद्र ग्रहण के दौरान भूल से भी सोना नहीं चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने वाले जातक को बीमारियां घेर लेती हैं। ऐसे में आप इस दौरान आध्यात्मिक कामों में अपना मन लगाएं। मन ही मन भगवान को स्मरण करते रहें।
  • बालों में तेल लगाना, जल पीना या फिर कोई ताला खोलना जैसे कार्य भी चंद्र ग्रहण के दौरान वर्जित माने गए हैं। इसके अलावा चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर में पूजा पाठ करना, बाल कटवाना या फिर नाखून कटवाना भी निषेध माना गया है।
  • सूतक काल में किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। ग्रहण से पहले और बाद में जरूर स्नान करें। ग्रहण काल के बाद पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव जरूर करें। ग्रहण काल के दौरान दान-दक्षिणा करना भी बेहद शुभ माना जाता है।

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