नवरात्रि पर्व की ये वैज्ञानिक खूबियाँ शायद आपको अब तक किसी ने नहीं बताई हो

सनातन धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म माना जाता है। प्राचीन होने के बावजूद इसकी कुछ बातें आज भी कई वैज्ञानिकों को चौंकाती रहती हैं। यह चीज बतलाती है कि हमारे पूर्वजों ने कितना ज्ञान हासिल करने के बाद हमारे लिए ये नियम बनाए होंगे जो आज के भी समय में हमें फायदा पहुंचा रही हैं। ये बातें इसलिए क्योंकि चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है और ऐसे में आप में से कई लोग ऐसे होंगे जिन्होंने इस दौरान व्रत रखा होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि नवरात्रि के दौरान व्रत रखना आपके लिए कितना फायदेमंद है?  क्या आपको पता है कि नवरात्रि के दौरान कई जगहों नीम क्यों खाया जाता है? और क्या आपको पता है कि चैत्र नवरात्रि में माता को विशेष तौर पर आम का फल क्यों चढ़ाया जाता है। दरअसल इन सब का वैज्ञानिक महत्व है जिसके बारे में आज इस लेख में हम आप सभी को बताएँगे।

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पहले चैत्र नवरात्रि के बारे में थोड़ी सी जानकारी आपको दे देते हैं। देवी पुराण के अनुसार प्रत्येक साल चार नवरात्रि आती है। इन चार नवरात्रि में से दो नवरात्रि गुप्त होती हैं और दो प्रत्यक्ष। इनमें से पहली नवरात्रि हिन्दू वर्ष के पहले महीने यानी कि चैत्र में पड़ता है। दूसरी नवरात्रि हिन्दू वर्ष के चौथे महीने यानी कि आषाढ़ में होती है। तीसरी आश्विन में और चौथी नवरात्रि हिन्दू वर्ष के ग्यारहवें यानी कि माघ महीने में होती है। इन चार नवरात्रों में चैत्र और आश्विन नवरात्री को प्रमुख माना जाता है और इन्हें प्रत्यक्ष नवरात्रि भी कहते हैं जबकि आषाढ़ और माघ में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। 

व्रत का वैज्ञानिक फायदा

अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि प्रत्यक्ष नवरात्रि यानी कि चैत्र नवरात्रि और आश्विन मास में पड़ने वाली शारदीय नवरात्रि संधिकाल में पड़ती है। संधिकाल उस समय को कहते हैं जब मौसम में बदलाव हो रहा होता है। जैसे कि अभी चैत्र नवरात्रि में ठंड के मौसम के बाद गर्मी का प्रवेश शुरू हो चुका है। इस समय सुबह का समय ठंडा जबकि दोपहर और शाम में मौसम काफी गर्म रहता है। इस संधिकाल को बीमारियों के फैलने का समय कहा जाता है। इस दौरान हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस दौरान आपको लोगों के बीच सर्दी-जुकाम, ज्वार, कफ या फिर किसी प्रकार के फ्लू की शिकायत बेहद आसानी से देखने को मिल जाएगी। ऐसे में आयुर्वेद में इन बीमारियों से बचने के लिए इस दौरान उपवास को श्रेष्ठ बताया गया है। इससे हमारे शरीर में नयी ऊर्जा का संचार होता है और शरीर में पहले से मौजूद हमें बीमार करने वाले विषाणुओं का भी नाश होता है। साथ ही इस समय भोजन के रूप में अन्न को पचाने में हमारे शरीर को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जबकि वैसे लोग जो व्रत के बाद फलाहार करते हैं उन्हें फल को पचाने में ज्यादा आसानी होती है।

नीम का वैज्ञानिक फायदा

नवरात्रि के दौरान कई जगहों पर नीम खाने का चलन है। नीम का आयुर्वेदिक महत्व भला किसे नहीं पता। अब तो बड़ी-बड़ी विदेशी कामपानीय भी नीम को अपने उत्पाद में शामिल कर के उन भारत के लोगों को बेच रही है जो सदियों से इसका इस्तेमाल करते आए हैं। खैर, आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि नीम में प्रोटीन के साथ-साथ दिल के लिए फायदेमंद कार्बोहाइड्रेट और विटामिन ए और सी जैसे बेहद गुणकारी तत्व मौजूद हैं जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, जिसकी वजह से इसके सेवन से संधिकाल में इसका हमें फायदा मिलता है। नीम हमारे खून को साफ करता है जिसकी वजह से चमड़े से जुड़ी बीमारियाँ कम होती हैं। यह मधुमेह के मरीजों के लिए तो रामबाण है ही साथ ही साथ फ्लू का भी दुश्मन है। 

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चैत्र नवरात्रि में माता को आम का भोग

चैत्र नवरात्रि में वैसे तो काफी फलों का माता को भोग लगाया जाता है लेकिन आम का भोग खास कर के लगाया जाता है और बाद में घर के सभी लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। दरअसल इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक वजह है। आम कई मायने में एक बेहद ही गुणकारी फल माना गया ह। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स इत्यादि जैसे गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं। गर्मियों में हमारे शरीर से पानी पसीने के रूप में निकलता रहता है और शरीर को लगातार पानी की जरूरत होती है। ऐसे में आम हमारे शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित करता है। गर्मियों में कच्चे आम का पना बना कर भी लोग पीते हैं। आम का पना हमारे शरीर को लू से बचाने में काफी कारगर माना जाता है।

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