कुंडली में द्वादश भाव : व्यय और हानि का भाव

ज्योतिष में कुंडली के द्वादश भाव को व्यय एवं हानि का भाव कहा जाता है। यह अलगाव एवं अध्यात्म का भी भाव होता है। यह भाव उन अंधेरे स्थानों का प्रतिनिधित्व करता है जो मुख्य रूप से समाज से पृथक रहते हैं। ऐसी जगह जाकर व्यक्ति समाज से ख़ुद को अलग महसूस करता है। कुंडली में बारहवें भाव का संबंध स्वप्न एवं निद्रा से भी होता है। इसके साथ ही बारहवें भाव का संबंध लोपस्थान (अदृश्यता का भाव), शयन, पाप, दरिद्रता, क्षय, दुख या संकट, बायीं आँख, पैर आदि से है।

द्वादश भाव के कारकत्व

कुंडली में द्वादश भाव से धन व्यय, बायीं आँख, शयन सुख, मानसिक क्लेश, दैवीय आपदा, दुर्घटना, मृत्यु के बाद की स्थिति, पत्नी के रोग, माता का भाग्य, राजकीय संकट, राजकीय दंड, आत्महत्या, एवं मोक्ष आदि विषयों का पता चलता है।

कुंडली में द्वादश भाव से क्या देखा जाता है?

    • व्यय – द्वादश भाव का संबंध जातकों के व्यय से है। यह भाव किसी जातक के जीवन में यह संकेत देता है कि वह अपने जीवन में कितना व्यय करेगा। इसके अलावा बारहवां भाव हानि का भी संकेत करता है। यदि इस भाव में शुभ ग्रह स्थित हैं तो व्यक्ति सत्कर्मों में (दान-पुण्य) अथवा अन्य सामाजिक कार्यों में धन ख़र्च करता है।  
    • मोक्ष – जन्म कुंडली में लग्न भाव व्यक्ति के जीवन के प्रारंभ को दर्शाता है जबकि 12वाँ भाव व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात प्राप्त होने वाले पुरुषार्थ, मोक्ष को दर्शाता है। यदि इस भाव पर शुभ ग्रह का प्रभाव हो तो व्यक्ति मृत्यु के पश्चात मोक्ष को प्राप्त करता है।
    • नेत्र कष्ट –  यदि जातक की जन्मपत्री में बारहवें भाव में सूर्य या चंद्रमा पापी ग्रहों से पीड़ित हों तो जातक को नेत्र संबंधी कष्ट होता है।
    • विदेश यात्रा – कुंडली में द्वादश भाव निवास स्थान से दूरस्थ स्थान (विदेश) को दर्शाता है। बारहवाँ भाव चतुर्थ स्थान (निवास स्थान) से नवम (लंबी यात्रा) को दर्शाता है। इस भाव से यह भी ज्ञात होता है कि जातक विदेश में निवास करेगा या नहीं।

ज्योतिष में द्वादश भाव का महत्व

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में द्वादश भाव मोक्ष का भाव होता है। यह भाव जातकों के जीवन में दुख, संकट, हानि, व्यय, फ़िज़ूलख़र्ची, सहानुभूति, दैवीय ज्ञान, पूजा एवं मृत्यु के पश्चात के अनुभव को दर्शाता है। काल पुरुष कुंडली में बारहवें भाव पर मीन राशि का स्वामित्व है और बृहस्पति ग्रह इस राशि के स्वामी होते हैं।

कुंडली में द्वादश भाव हानि, बाधाएँ, संयम और सीमाओं, फ़िज़ूलख़र्ची, आय से अधिक ख़र्च, कड़ी मेहनत और धोख़ेबाज़ी को दर्शाता है। हिन्दू ज्योतिष का ऐसा मानना है कि कुंडली में षष्टम, अष्टम और द्वादश भाव दुःस्थान हैं।

उत्तर-कालामृत के अनुसार, द्वादश भाव से उधार लिए गए पैसों को चुकाने की प्रक्रिया तथा पैतृक संबंधों का विचार किया जाता है। फलदीपिका में बारहवें भाव को लीनस्थान अर्थात छुपा हुआ भाव कहा गया है। मुख्य रूप से यह भाव रहस्यवाद को दर्शाता है। मंत्रेश्वर ने द्वादश भाव को लेकर कहा है कि यह भाव जातकों के शयन सुखों का बोध कराता है।

वैद्यनाथ दीक्षित ने जातक परिजात में द्वादश भाव का संबंध विदेश यात्रा से बताया है। वहीं रामदयालु ने संकेत निधि में बारहवें भाव का संबंध व्यक्ति के पैर से जोड़ा है। यह भाव व्यय एवं धन हानि को भी दर्शाता है। कुंडली में द्वादश भाव कारागार, पागलखाना एवं अन्य स्थान जहाँ पर व्यक्ति समाज से पृथक हो जाए, को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त द्वादश भाव अस्पताल या नर्सिंग होम, विदेश, स्थान परिवर्तन आदि स्थानों को भी दर्शाता है।

मेदिनी ज्योतिष में जन्म कुंडली के द्वादश भाव का संबंध सभी प्रकार के परोपकार, धर्मार्थ या सुधारक संस्थान, जेल, शरण और अस्पताल आदि से होता है। यह भाव अपराधियों, जासूसों, गुप्त बलों और गुप्त दुश्मनों, भूमिगत आंदोलनों का भी प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ ही बारहवां भाव योजना मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रश्न ज्योतिष के मुताबिक द्वादश भाव से दु:ख, यातना, उत्पीड़न, मानसिक परिश्रम, दुर्भाग्य, हत्या, आत्महत्या आदि का विचार होता है। साथ ही कुंडली के बारहवें भाव से धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग आदि से संबंधित सभी मामले देखे जाते हैं।

द्वादश भाव भय, जटिलता, चिंता, संदेह आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव को एकांत, गुप्त, एवं मूक पीड़ा के भाव के रूप में भी जाना जाता है। यह भाव किसी जातक की स्वतंत्रता की सीमाओं की भी व्याख्या करता है। इसके अलावा इस भाव से गुप्त अनौपचारिक गतिविधि, गुप्त काम, निर्वासन और प्रत्यर्पण जैसे मामलों को देखा जाता है।

द्वादश भाव का अन्य भावों से अंतर्संबंध

जैसा कि हम जानते हैं कि कुंडली में 12 भाव होते हैं और इन भावों का संबंध एक-दूसरे होता है। इसी प्रकार द्वादश भाव का अन्य भावों से अंतर्संबंध है। बारहवां भाव बड़े भाई-बहनों की धन संपत्ति या व्यापक मात्रा में मैत्रीपूर्ण संबंधों को बताता है। इसके अलावा इस भाव से बॉस की कुशलता, कार्य की प्रकृति अथवा कार्य हेतु किए गए प्रयास, उच्च स्तर की बौद्धिक क्षमता आदि चीज़ें ज्ञात होती हैं। ज्योतिष में कुंडली के बारहवें भाव से किसी जातक की आध्यात्मिक ऊर्जा, वाहन एवं पिता या गुरु के सुखों को देखा जाता है।

कुंडली का बारहवां भाव आपके करियर से संबंधित यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही यह निवेश द्वारा प्राप्त लाभ अथवा हानि, सहनशक्ति, अष्टम भाव से संबंधित ज्ञान, जैसे गुप्त चीज़ें या गुप्त ज्ञान, ऋण, रोग और जीवनसाथी के शत्रु आदि को दर्शाता है। कुंडली का द्वादश भाव जनता की प्रतिक्रिया को भी दर्शाने का कार्य करता है।

12वां भाव नौकरों और किरायेदारों के साथ होने वाले विवादों, संतान की मृत्यु या उनके साथ होने वाली अनहोनी, संतान में होने वाले परिवर्तन, संतान की सर्जरी, संतान का एजेण्डा, विदेशी शिक्षा तथा निवास, भाई का करियर, भाई-बहनों को प्राप्त होने वाले लाभ, रिश्तेदार, पारिवारिक मित्र आदि का प्रतिनिधित्व करता है।

लाल किताब के अनुसार द्वादश भाव

लाल किताब के अनुसार, कुंडली में बारहवें भाव से ख़र्चे, बेडरूम से सटा हुआ पड़ोसी का घर और मित्रों का सुख-दुख आदि देखा जाता है। इस भाव में स्थित ग्रह षष्टम भाव में बैठे भाव से सक्रिय होते हैं। किसी जातक की कुंडली में द्वादश भाव उसके बेडरूम, छत, ख़ुशियाँ, पड़ोसी का घर, सफेद बिल्ली, बड़े भाई, बरसात का पानी, दहेज़ से प्राप्त बेड आदि को दर्शाता है।

इस प्रकार आप देख सकते हैं कि कुंडली में द्वादश भाव कितना अहम है। कुंडली में यह अंतिम भाव होता है जो वास्तव में यह बताता है कि व्यक्ति अपने जीवन में किस प्रकार के सुखों को भोगेगा।

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