“कलर थेरेपी” से करें रोगों का उपचार

परमात्मा ने कितनी सुंदर बनाई है यह दुनिया और इसे और भी सुन्दर बनाने के लिए इसमें सुंदर मोहक रंग भर दिए। क्या आपने कभी रंगों से विहीन दुनिया की कल्पना की है? कितना नीरस होगा वह दृश्य जिसमें रंग ही न हो। वर्षा उपरांत सूरज की किरण बारिश की बूंद से निकल कर आकाश में कितना सुंदर इंद्रधनुष बनाती है। सात रंगों का यह इंद्रधनुष मन को जैसे मोह लेता है। इन्हें देखने के बाद मन में खुशियों के बुलबुले जाग उठते हैं।

ये रंग न केवल हमारी आँखों को सुकून देते हैं, बल्कि हमारे शरीर के अंगों को भी प्रभावित करते हैं। आईये जानते हैं कुछ खास रंगों के महत्व के बारे में–

लाल रंग का महत्व

हर रंग की अपनी एक आभा शक्ति होती है। सर्वप्रथम बात करते हैं रंगों में रंग लाल रंग की। लाल रंग की आभा शक्ति सर्वाधिक होती है। तभी तो विवाह समारोह में वधू को लाल रंग का जोड़ा पहनाने का चलन है। हर रंग की अपनी एक उपचारक क्षमता भी होती है। लाल रंग प्रेम, उत्साह व शक्ति का प्रतीक है। लाल रंग “मंगल ग्रह” का भी प्रतिनिधित्व करता है। जिस जातक की कुंडली में मंगल ग्रह दूषित होता है, उससे लाल वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है। लाल रंग अनेकों बीमारियों के उपचार में भी प्रयोग किया जाता है। जैसे निम्न रक्त संचार, खून की कमी, अवसाद ,जोड़ों का दर्द, पैरालिसिस आदि। कलर थेरेपी में इस रंग को जातक को पहनने व भोज्य पदार्थ द्वारा ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। किंतु इस रंग का अत्यधिक प्रयोग क्रोध में हिंसा को जन्म देता है।

नारंगी रंग का महत्व

नारंगी रंग लाल व पीले रंग से मिश्रित होता है। इस रंग के प्रयोग से दोनों रंगों का मिश्रित प्रभाव मिलता है। यह रंग ज्ञान व शक्ति का संतुलित प्रभाव देता है। तभी तो साधु-संतो का चोला केसरिया रंग का होता है। यह रंग अध्यात्म व संसारिक गुणों का संतुलन स्थापित करता है। इस रंग में तंत्रिका तंत्र को मजबूती प्रदान करने की अद्भुत शक्ति होती है। महत्वकांक्षा को बढ़ाना, भूख बढ़ाना व श्वास के रोगों से आराम देना इस रंग के गुण हैं। यह रंग अवसाद से भी मुक्ति दिलाता है।

हरा रंग का महत्व

हरा रंग सहयोग व विस्तार की भावना विकसित करता है। इस रंग के प्रयोग से व्यक्ति नेत्र रोग, कमजोर ज्ञानतंतु, अल्सर, कैंसर व चर्म रोगों से निजात पाता है। यह रंग नेत्रों को शीतलता प्रदान करता है। यह रंग “बुध ग्रह” का प्रतिनिधित्व करता है। बौद्धिक विकास के लिए जातक को हरे रंग का पन्ना रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।

नीला रंग का महत्व

नीला रंग सत्य ,आशा, विस्तार, स्वच्छता व न्याय का प्रतीक है। यह रंग स्त्री रोग, पेट में जलन, गर्मी, महत्वपूर्ण बल की कमी आदि के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है। गहरा नीला रंग अकेलेपन को बढ़ाता है। अवसाद जैसी स्थिति में इस रंग का प्रयोग कदापि न करें। इसके विपरीत इस रंग की वस्तुओं का दान शुभ फल देता है।

पीला रंग का महत्व

पीला रंग ज्ञान और सात्विकता का प्रतिनिधित्व करता है। खांसी, जुखाम, लीवर संबंधित बीमारियां कब्ज़, पीलिया, सूजन व तंत्रिका तंत्र की कमज़ोरी के उपचार में प्रयुक्त होता है। पीला रंग “गुरु ग्रह” का प्रतिनिधित्व करता है। व्यक्ति में ज्ञान और वैराग्य भावना विकसित कर सम्मानित जीवन जीने के लिए पीले रंग का पुखराज रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।

बैंगनी रंग का महत्व

बैंगनी रंग लाल व नीले रंग के मिश्रण से बनता है। इस रंग का प्रयोग यश, प्रसिद्धि व उत्साह प्रदान करता है। यह रंग रक्त शोधन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। दर्द, सूजन, बुखार व कार्य क्षमता की वृद्धि के लिए इस रंग का प्रयोग किया जाता है। बैंगनी रंग सुस्त मस्तिष्क को उत्सव व आशा प्रदान करता है।

सब रंगों की अपनी उपचारक क्षमता होती है। कलर थेरेपी में अलग-अलग रंगों के बल्ब, पानी की बोतल, वस्त्र, खाद्य पदार्थ, क्रिस्टल, पिरामिड, चादर व पर्दे के रूप में उपचार दिया जाता है। यह उपचार आंतरिक रूप से हमारी हर बीमारियों के इलाज में  सहायक है। चाहे वह मानसिक हो या शारीरिक। विशेषज्ञ की निगरानी में किए हुए उपचार से उचित लाभ मिलता है।

दीप्ति जैन, वास्तु एस्ट्रो विशेषज्ञ
दीप्ति जैन एक जानी-मानी वास्तुविद हैं, जिन्होंने पिछले 3 सालों से वास्तु विज्ञान के क्षेत्र में अपने कौशल और प्रतिभा को बखूबी दर्शाया है। उनके इस योगदान के लिए उन्हें कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। दीप्ति जैन न केवल वास्तु बल्कि सामाजिक मुद्दों, हस्‍तरेखा विज्ञान, अध्यात्म, कलर थेरेपी, सामुद्रिक शास्त्र जैसे विषयों की भी विशेषज्ञ हैं।

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