बुध मेष राशि में अस्त: ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से बुध ग्रह को विशेष स्थान दिया गया है क्योंकि यह मनुष्य जीवन और संसार दोनों को प्रभावित करने का असीम सामर्थ्य रखता है। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में बुध देव को बुद्धि, वाणी, तर्क और व्यापार का प्रमुख ग्रह माना गया है। यह सौरमंडल में सूर्य के सबसे निकट स्थित है और ऐसे में, बुध ग्रह की राशि और स्थिति में होने वाले हर परिवर्तन का असर मानव जीवन और देश-दुनिया पर पड़ता है। इसी क्रम में, बुध महाराज अब जल्द ही मेष राशि में अस्त होने जा रहे हैं जिसका शुभ-अशुभ संसार समेत राशियों को प्रभावित करेगा।

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अगर हम बात करें बुध ग्रह की, तो बुध देव बेहद आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी हैं और यह अपनी मधुर वाणी से किसी को भी मोहित कर सकते हैं। हालांकि, बुध ग्रह का संबंध धन और भाग्य से भी होता है। एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष लेख में हम आपको “बुध मेष राशि में अस्त” के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही, बुध की अस्त अवस्था विश्व और राशियों को किस तरह से प्रभावित करेगी। किन उपायों की सहायता से आप बुध के नकारात्मक प्रभावों से बच सकते हैं? इससे भी हम आपको अवगत करवाएंगे। तो चलिए बिना देर किए हम शुरुआत करते हैं इस ब्लॉग की।
बुध मेष राशि में अस्त: तिथि एवं समय
बुध महाराज को युवा, बुद्धिमान और असाधारण क्षमताओं से पूर्ण ग्रह के रूप में वर्णित किया गया है। यह तेज़ गति से चलते हैं इसलिए इनका हर गोचर 23 से 27 दिनों में होता है। सरल शब्दों में कहें, तो बुध देव प्रत्येक राशि में तक़रीबन एक माह तक रहते हैं और उसके बाद, यह दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में बुध ग्रह अब 01 मई 2026 की रात 11 बजकर 08 मिनट पर मेष राशि में अस्त होने जा रहे हैं। बता दें कि ज्योतिष में किसी भी ग्रह की अस्त अवस्था को शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि ज्यादातर ग्रह अस्त होने पर सकारात्मक परिणाम देने में असफल होते हैं। बुध ग्रह, मंगल देव की राशि में अस्त होंगे और यह दोनों ग्रहों आपस में तटस्थ संबंध रखते हैं जिसका असर भी राशियों पर पड़ सकता है।
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आगे बढ़ने से पहले हम आपको अवगत करवाते हैं कि ग्रह की अस्त अवस्था के बारे में।
किसे कहते हैं ग्रह का अस्त होना?
बात करें अस्त अवस्था की, तो ज्योतिष में सूर्य देव के अलावा हर ग्रह समय-समय पर अपनी चाल, दशा और स्थिति में बदलाव करते रहते हैं। इन्हीं में से एक स्थिति को ग्रह का अस्त होना भी कहा जाता है। अगर आपके मन में भी सवाल उठ रहा है कि ग्रह का अस्त होना क्या होता है, तो बता दें कि जब कोई ग्रह अपनी परिक्रमा करते हुए सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तब वह सूर्य के तेज़ और तपन से प्रभावशील हो जाता है। साथ ही, वह अपनी सभी शक्तियां खोकर दुर्बल हो जाता है।
हालांकि, हर ग्रह सूर्य से एक निश्चित दूरी पर आकर अस्त हो जाते हैं। अगर इन ग्रहों के अस्त होने की डिग्री की बात करें, तो चंद्रमा 12 अंश पर, मंगल 7 अंश पर, बुध 13 अंश पर, गुरु 11 अंश पर, शनि 15 अंश पर और शुक्र 9 अंश पर अस्त हो जाते हैं। सामान्य शब्दों में कहें तो, जब कोई ग्रह सूर्य की परिधि में एक निर्धारित अंश तक पहुँच जाता है, तब वह कमज़ोर होकर अस्त हो जाता है। इसके विपरीत, जब कोई ग्रह सूर्य के साथ उपस्थित है, लेकिन उसे 15 डिग्री की दूरी पर मौजूद होता है, तब उसे उदित कहा जाता है। आइए जानते हैं बुध की अस्त अवस्था कैसे परिणाम प्रदान करती है।
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बुध अस्त होकर कैसे फल देते हैं
जैसे कि हमने आपको ऊपर बताया है कि 01 मई 2026 को बुध ग्रह मेष राशि में अस्त रहने वाले हैं क्योकि इस अवधि में वह सूर्य के बहुत करीब स्थित होंगे। ऐसे में, बुध ग्रह अपनी शक्तियों के खोने पर निर्बल हो जाते हैं और अपनी पूरी शक्ति से अच्छे परिणाम देने में असमर्थ होते हैं। बुध ग्रह के अस्त होने पर सामान्य तौर पर लोगों को किस तरह से प्रभावित करते हैं? आइए जानते हैं।
- जब बुध किसी राशि में अस्त होते हैं, तब इसका असर व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ सकता है। साथ ही, किसी भी काम को सोच-समझकर करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- यह अवधि विशेष रूप से उन छात्रों और व्यापार करने वाले लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है। व्यापार में रुकावटें और परेशानियां आ सकती हैं, जिसके कारण वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
- इसके अलावा, कुछ लोगों को अपने काम पर ध्यान लगाने में कठिनाई महसूस हो सकती है और वे अक्सर ज्यादा सोच में डूबे हुए नजर आ सकते हैं।
अब हम आपको रूबरू करवाते हैं मेष राशि में बुध अस्त के प्रभावों से।
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मेष राशि में बुध अस्त का प्रभाव
- राशि चक्र में मेष राशि पहले स्थान पर होती है जो पुरूष स्वभाव की राशि है। इस राशि के लोग आमतौर पर योजनाबद्ध तरीके से काम करना पसंद करते हैं। मंगल की राशि मेष में जब बुध ग्रह अस्त हो जाते हैं जो जातक अपने लक्ष्यों को पाने के लिए नई योजनाएं बनाने लगते हैं
- मेष राशि में बुध के अस्त होने से इस राशि के लोगों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पित रह सकते हैं। साथ ही, ये अपने करीबियों और प्रियजनों के प्रति वफादार और ईमानदार बने रहते हैं।
- ज्योतिष के अनुसार, बुध की अस्त अवस्था के दौरान कभी भी किसी शुभ या नए काम को शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि इस अवधि में आपके द्वारा शुरू किए गए किए गए कार्यों से आपको अपनी उम्मीद के अनुसार परिणाम न मिलने की प्रबल संभावना होती है। साथ ही, हानि होने की आशंका होती है।
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ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व
वैदिक ज्योतिषमें बुध ग्रह को युवराज का पद प्राप्त है जिनकी गिनती सबसे शुभ ग्रहों में होती है। अगर कुंडली में इनकी स्थिति अशुभ या पापी ग्रहों के साथ होने पर जातक को जीवन में अशुभ परिणामों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, बुध देव राशि चक्र में कन्या और मिथुन राशि के स्वामी माने गए हैं। कन्या राशि इनकी अपनी राशि है और इस राशि में बुध ग्रह उच्च अवस्था में होते हैं। वहीं, गुरु ग्रह की मीन राशि बुध ग्रह की नीच राशि होती है।
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बात करें मित्र और शत्रु ग्रहों की तो, बुध देव के मित्र ग्रह सूर्य और शुक्र हैं जबकि चंद्रमा और मंगल से यह शत्रुता के भाव रखते हैं। बता दें कि बुध को लाभकारी ग्रह कहा जाता है और इन्हें सभी 27 नक्षत्रों में से ज्येष्ठा, रेवती और अश्लेषा नक्षत्र पर अधिपत्य प्राप्त हैं। वहीं, सप्ताह का हर दिन किसी न किसी ग्रह या देवता को समर्पित होता है। इसी प्रकार, बुधवार का दिन बुध ग्रह के लिए होता है और इस दिन बुध की पूजा-अर्चना करना बहुत शुभ माना जाता है।
कुंडली में बुध ग्रह का शुभ प्रभाव होने से जातकों को तेज़ बुद्धि और मज़बूत संचार कौशल का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही, हमारे शरीर और संवाद की क्षमता पर भी बुध का प्रभाव होता है। यह बुद्धि, ज्ञान, व्यापार और मित्र के कारक ग्रह हैं और ऐसे में, बुध ग्रह के शुभ प्रभाव की वजह से जातक अच्छे वक्ता बनता है। साथ ही, इन लोगों को राजनीति और कूटनीति का ज्ञान बहुत अच्छा होता है। बुध की कृपा से बिज़नेस के क्षेत्र में अपार सफलता हासिल करते हैं और अच्छा लाभ प्राप्त करते हैं।
धार्मिक दृष्टि से बुध
बुध ग्रह को ज्योतिष के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में बुध ग्रह को देवता का दर्जा दिया गया है और बुधवार का दिन इन्हें समर्पित है। इस दिन बुध ग्रह की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ और कल्याणकारी होता है। इससे जुड़ी मान्यता है कि बुधवार को विधिपूर्वक बुध ग्रह की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को करियर और व्यापार में सफलता की प्राप्ति होती है। साथ ही, इनका संबंध भगवान गणेश से भी माना गया है।
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मनुष्य जीवन पर बुध ग्रह का प्रभाव
- ऐसे जातक जिनकी कुंडली में बुध देव की स्थिति शुभ होती हैं, उनको वाणी में मिठास, ज्ञान की प्राप्ति और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
- बुध ग्रह के मज़बूत अवस्था में होने से जातक का संचार कौशल बहुत शानदार होता है और इनकी मधुर वाणी से दूसरे लोग आसानी से प्रभावित हो जाते हैं।
- कुंडली में बुध ग्रह अनुकूल स्थिति में या उच्च राशि में होने पर व्यक्ति अपने विचारों को आसानी से दूसरों के सामने व्यक्त कर पाता है। साथ ही, उसकी वाणी भी प्रभावशाली होती है।
- बुध देव की कृपा से व्यक्ति बुद्धिमान, विश्लेषण करने वाला और सरल स्वभाव का बनता है।
- अगर बुध ग्रह का कमज़ोर या दुर्बल स्थिति में होने पर व्यक्ति बहुत चालाक और तेज दिमाग का हो सकता है।
- इसके अशुभ प्रभाव से इंसान झूठ बोलने वाला, दिखावा करने वाला और कभी-कभी धोखा देने वाला बन सकता है। ऐसे लोग अक्सर दूसरों से किए गए वादे जल्दी भूल जाते हैं।
बुध मेष राशि में अस्त: कमज़ोर बुध ग्रह का प्रभाव
अगर किसी जातक की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होते हैं, तो जीवन के कई क्षेत्रों में नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। हम आपको नीचे ऐसे संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप कमज़ोर लक्षणों को पहचान सकते हैं।
शिक्षा पर प्रभाव: कमज़ोर बुध के कारण पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और सीखने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
संचार कौशल में कमी: व्यक्ति को अपने आपको व्यक्त करने में कठिनाई होती है और वह अपने विचार दूसरों के सामने स्पष्ट रूप से नहीं रख पाता है।
शारीरिक और मानसिक समस्याएं: बुध की अशुभ स्थिति मानसिक कमजोरी, तनाव और कुछ शारीरिक परेशानियों का कारण बन सकती है।
व्यापार में हानि: अगर आपका बुध कमज़ोर होता है, तो आपको व्यापार से जुड़े निर्णय लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है जिसके चलते आपको हानि उठानी पड़ सकती है।
आर्थिक समस्याएं: कमजोर बुध के कारण व्यक्ति को धन से जुड़ी परेशानियों और आर्थिक तंगी से भी दो-चार होना पड़ सकता है।
हालांकि, ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को मज़बूत करने के लिए अनेक सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं जिनके बारे में हम आगे जानेंगे।
बुध मेष राशि में अस्त: सरल एवं प्रभावी उपाय
नाक छिदवाना: जिन जातकों की जन्म कुंडली में बुध ग्रह आठवें भाव में बैठे होते हैं या फिर दुर्बल अवस्था में होते हैं, उन्हें बुधवार के दिन नाक छिदवानी चाहिए। साथ ही, अगले 43 दिन तक नाक में चांदी पहनकर रखनी बहुत शुभ होता है।
माँ दुर्गा की पूजा: बुध ग्रह को मज़बूत करने के लिए बुधवार के दिन देवी दुर्गा के मंदिर जाकर उन्हें हरे रंग की चूड़ियां अर्पित करें। साथ ही, इस दिन “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का जाप करना भी बहुत फलदायी माना जाता है।
महिलाओं का सम्मान: जो लोग बुध ग्रह की कृपा पाना चाहते हैं, उन्हें बेटी, बहन, बुआ और साली जैसे महिला रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने चाहिए। साथ ही, उनका सम्मान करें और बुधवार के दिन उन्हें कुछ मीठा खिलाएं।
तुलसी का सेवन: बुध देव से सकारात्मक परिणाम पाने के लिए बुधवार के दिन तुलसी की पत्तियों को धोकर उनका सेवन करें।
हरे रंग का प्रयोग: बुध महाराज को प्रसन्न करने के लिए हरे संग के वस्त्र ज्यादा से ज्यादा धारण करें।
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बुध मेष राशि में अस्त: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुध ग्रह 01 मई 2026 को मेष राशि में अस्त हो जाएंगे।
राशि चक्र की पहली राशि मेष के स्वामी मंगल ग्रह है।
ज्योतिष में जब कोई ग्रह सूर्य के निकट चला जाता है, तब वह सूर्य के तीव्र प्रभाव से अपनी शक्तियां खो देता है और इसे ही ग्रह का अस्त होना कहते हैं।