20 जून को FATHER’S DAY : इन ज्योतिषीय उपायों से करें पिता के साथ संबंध मजबूत

फादर्स डे की एक झलक

पिता, इस अकेले शब्द का अर्थ निकालने बैठेंगे तो हम सबकी ज़िंदगी खत्म हो जाएगी लेकिन इस शब्द की व्याख्या कर पाना फिर भी शायद ही मुमकिन हो। बाहर से सख्त और अन्दर से नरम, कुछ ऐसा ही होता है हर पिता का व्यक्तित्व। एक बच्चे के जीवन में माँ और पिता दोनों की ही ज़रूरत और अहमियत होती है लेकिन फिर भी हमने अक्सर देखा है कि बच्चे अपनी माँ के ही ज्यादा नज़दीक होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ माँ हर तरह से अपने भाव हमारे सामने व्यक्त कर देती हैं वहीं हमारे पिता अपनी ज़िंदगी का एक-एक पल केवल इस बात को सुनिश्चित करने में खर्च कर देते हैं कि हमें जीवन की हर ख़ुशियाँ मिल सके और इस कड़ी में वो अपने अंदर के भाव और जज्बातों को हमसे ऐसे छुपा लेते हैं, मानो उनके अंदर कुछ चल ही ना रहा हो। 

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बेशक ही, एक बच्चे को दुनिया में लाने की ज़िम्मेदारी माँ की होती है लेकिन उस बच्चे को दुनिया का सामना करना, दुनिया का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार करना और इस दौरान अगर बच्चे को ठोकर लगे और वो नीचे गिर जाये तो उसे दोबारा उठाकर खड़ा करने की पूरी ज़िम्मेदारी पिता के कन्धों पर ही होती है जिसको वो हँसते-हँसते ताउम्र निभाते रहते हैं। 

ज़िम्मेदारी के इसी बोझ तले हमारे पिता हमसे हर एक भावना साझा नहीं कर पाते हैं। वो हमें हर वक़्त यह भी नहीं बता पाते हैं कि वो हमसे कितना प्यार करते हैं लेकिन समझिये तो उनका अपनी पूरी ज़िंदगी हमारे जीवन को सुरक्षित और महफूज़ रखने में बिता देना ही उनके प्यार का सबसे बड़ा प्रमाण है। अपने पिता के इस निस्वार्थ प्रेम और उनके असंख्य बलिदानों का शुक्रिया करने के लिए यूँ तो पूरी ज़िंदगी भी कम है लेकिन उन्हें ख़ास महसूस कराने के लिए और उन्हें यह बताने के लिए कि, ‘पापा, हमें पता है कि आपने हमारे लिए क्या कुछ नहीं किया है और आगे भी करते रहेंगे’, साल का एक ख़ास दिन निर्धारित किया गया है जिसे हम ‘फादर्स डे’ या ‘पिता दिवस’ के रूप में मनाते हैं।

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कैसे शुरू हुई फादर्स डे को मनाने की परंपरा?

फादर्स डे मनाने की शुरुआत 19 जून, 1910 से हुई थी। इस दिन के पीछे सोनेरा डोड की एक बड़ी ही रोचक कहानी बताई जाती है।

बताया जाता है कि सोनेरा डोड जब छोटी थी, तभी उनकी माँ का साया उनके जीवन से दूर हो गया था। तब उनकी सारी ज़िम्मेदारी उनके पिता के कन्धों पर आ गयी। सोनेरा डोड के पिता विलियम स्मार्ट ने सोनेरा को अपने जीवन में माँ की कमी कभी भी महसूस नहीं होने दी और उन्हें एक पिता के साथ-साथ माँ का भी भरपूर प्यार दिया।

1909 में, स्पोकाने के चर्च में मदर्स डे पर उपदेश दिया जा रहा था जिसके बाद सोनेरा डोड को ख्याल आया कि जब मदर्स डे मनाया जाता है तो फादर्स डे क्यों नहीं? इसके बाद सोनेरा डोड ओल्ड सेंटेनरी प्रेस्बिटेरियन चर्च के पादरी डॉक्टर कोनराड ब्लुह्म की मदद से इस विचार को स्पोकाने YMCA के पास ले गईं, जहां स्पोकाने YMCA और मिनिस्टीरियल अलायंस ने सोनेरा डोड के इस खूबसूरत विचार का समर्थन किया और इसी के बाद वर्ष 1910 में पहली बार फादर्स डे मनाया गया।

वैसे अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में पहली बार 5 जुलाई, 1908 को फादर्स डे मनाया गया था। यह विशेष दिन उन 361 पुरुषों की याद में मनाया गया था जिनकी मृत्यु एक कोयला खदान विस्फोट में दिसंबर 1907 में हुई थी।

इसके बाद वर्ष 1972 में, राष्ट्रपति निक्सन के शासन काल के दौरान फादर्स डे या पितृ दिवस को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मान्यता दे दी गई। इस दिन तय हुआ था कि जून महीने का तीसरा रविवार पिता दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जायेगा।

आइये जब हम पिता के बारे में इतनी बातें कर ही रहे हैं तो जानते हैं कि वैदिक ज्योतिष में आखिर ग्रहों की कौन सी स्थिति के चलते इंसान को पितृ-सुख प्राप्त होता है और आखिर किन ग्रह स्थितियों की वजह से कुछ लोगों को उनके जीवन में पिता का सुख या तो मिल नहीं पाता है, या मिलता भी है तो कुछ ही समय में ये उनसे छिन जाता है। पढ़िए इस मुद्दे पर ग्रहों की स्थिति के आधार पर किया गया एक ज्योतिषीय विश्लेषण।

आइए अब हम उन कारकों के बारे में विस्तार से बात करते हैं जो दर्शाते हैं कि एक पिता अपने बच्चों के जीवन में कैसे प्रेरणादायक और बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

सूर्य की मज़बूत स्थिति 

ग्रहों का राजा माने जाने वाला सूर्य, इंसान की कुंडली में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सूर्य न केवल इंसान के अंदर की आत्मा, आत्मविश्वास और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है बल्कि यह किसी भी जातक का पिता के साथ रिश्ते को भी दर्शाता है। ऐसे में कहा जाता है कि यदि किसी इंसान की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में होता है तो इसका अर्थ है कि उस इंसान के पिता अपने बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उस बच्चे ने अपने पिता से कई लक्षण ग्रहण किए होते हैं।

साथ ही ऐसा भी कहा जाता है कि जब कोई भी इंसान अपने पिता के साथ एक मज़बूत रिश्ता साझा करता है तो वह आत्मविश्वासी, खुद के लिए पर्याप्त, दूरदर्शी और वो कोई भी निर्णय लेने में बहुत मजबूत हो जाता है। ऐसे इंसान कभी भी दूसरों से मान्यता प्राप्त करने पर निर्भर नहीं होते हैं और हमेशा उनके अंदर आत्मविश्वास भरा रहता है। 

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कब बनती है सूर्य की मज़बूत स्थिति? 

  • यदि सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में है।
  • यदि सूर्य अपनी स्वराशि में हो।
  • अगर सूर्य आपकी कुंडली के केंद्र (1,4,7,10) और त्रिकोण घरों (5,9) में लाभकारी स्थिति में मौजूद है।
  • अगर सूर्य, बुध, शुक्र और बृहस्पति जैसे लाभकारी ग्रहों के साथ युति में है।
  • अगर यह अशुभ घरों (6, 8, 12) में नहीं है और न ही शनि, राहु और केतु जैसे पाप ग्रहों के साथ है।
  • यदि कुंडली में सूर्य दशम भाव यानी कि दिशात्मक बल में है।

नौवें और दसवें घर की मजबूत स्थिति

यहाँ हम कुंडली के दो घरों के बारे में ही बात करने जा रहे हैं। नौवां और दसवाँ, इसकी वजह यह है कि नौवां घर शिक्षक, आराध्य व्यक्ति, और गुरुओं का प्रतिनिधित्व करता है और यह बात तो हम सभी जानते हैं कि एक बच्चे के जीवन में उसके पहले शिक्षक उसके माता-पिता और सबसे अधिक संभवतः पिता ही होते हैं जो हमारे जीवन में उचित और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और हमारे व्यक्तित्व को आकार देने में हमारी मदद करते हैं।

वहीं दसवें घर की बात की जाये तो जैसा कि परंपरावादी ज्योतिष में इस बात का जिक्र है कि प्राचीन समय में लोग धन कमाने के लिए हमेशा अपने पिता के ही नक्शेकदम पर चलते थे। इसके अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं होता था। ऐसे में कहा जाने लगा कि आजीविका पिता से ही मिलती है। इसीलिए दसवें घर को पारंपरिक ज्योतिष के अनुसार पिता का घर माना जाता है। ऐसे में आज जब हम पिता के बारे में बात कर रहे हैं तो हम इन दोनों घरों के बारे में ही बात करेंगे।

नौवें और दसवें घर की मज़बूत स्थिति नीचे दी जा रही है :-

  • दसवें घर का स्वामी एक लाभकारी ग्रह है और इसे लाभकारी ग्रह के साथ युति में या पहलू में होना चाहिए।
  • दशम भाव का स्वामी बृहस्पति और शुक्र जैसे लाभकारी ग्रहों के साथ होना चाहिए।
  • नवम भाव का स्वामी उच्च राशि में हो।
  • दसवें घर में दसवें घर के स्वामी को “शुभ कर्तरी योग” में स्थित होना चाहिए। अर्थात दोनों तरफ लाभकारी ग्रह।

आइए अब उन कारकों पर विस्तार से चर्चा करते हैं जिनमें यह संकेत मिलता है कि बच्चे का पिता अधिक ताकतवर या हावी थे और साथ ही यह भी जानने की कोशिश करते हैं कि किन परिस्थितियों में एक बच्चा अपने पिता के मार्गदर्शन और सुरक्षा से वंचित रह जाता है।

सूर्य की कमज़ोर स्थिति 

जैसा कि हमने अभी इस बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की है कि कैसे सूर्य बच्चे की परवरिश, बच्चे में आत्मविश्वास, मनोबल लाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में अगर किसी की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में होता है तो यह इस बात को दर्शाता है कि बच्चा अपने पिता के साथ ठीक से संबंध स्थापित नहीं कर पाया है। 

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एक बच्चे का अपने पिता के साथ उचित संबंध स्थापित ना कर पाने के पीछे काफी सारी वजहें हो सकती हैं जैसे कि संभव है कि पिता अपने काम में अधिक व्यस्त रहते हों, पिता गुस्सैल स्वभाव के हों या शायद बच्चे के जीवन में उसके पिता का साया हो ही ना। अमूमन ऐसी स्थिति में देखा गया है कि बिना पिता के छत्रछाया में पलेबढ़े बच्चे दूसरों से मान्यता प्राप्त करने की भावना को अपने जीवन में ज्यादा बढ़ावा देने लगते हैं। ऐसे बच्चे दुनिया को सुरक्षात्मक के बजाय एक भयावह जगह के रूप में देखने लग जाते हैं जो उन्हें असुरक्षित, संदेहपूर्ण, डरपोक और अनिश्चित बनाने का काम करता है। 

कमज़ोर सूर्य की स्थिति तब होती है जब :-

  • किसी इंसान की कुंडली में सूर्य दुर्बल स्थिति में मौजूद हो।
  • यदि सूर्य 6/8/12 में या इन घरों के शासक के साथ युति में स्थित हो। 
  • यदि सूर्य एक “पाप कर्तरी” योग में है, अर्थात, सूर्य के दोनों ओर पाप ग्रह मौजूद हों।
  • यदि सूर्य शनि, राहु और केतु जैसे अशुभ ग्रहों के साथ या उनके पहलू में है।

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दसवें घर की कमज़ोर स्थिति 

जैसा कि हमने पहले इस बारे में चर्चा की है कि दसवें घर या दसवें घर के स्वामी की स्थिति बच्चे और उसके पिता के संबंध के लिहाज़ से बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए अगर कुंडली में दसवें घर या दसवें घर का स्वामी कमजोर है तो यह इस बात की तरफ इशारा करती है कि बच्चा पिता के साथ गहरा संबंध साझा नहीं करता है या फिर पिता के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण हैं। कमजोर दसवें घर की स्थिति इस प्रकार होती है-

  • यदि दसवें घर पर किसी ऐसे ग्रह का कब्जा है जो दसवें घर के स्वामी का दुश्मन है तो यह बात इस तरफ इशारा करती है कि बच्चे को पिता से प्यार और समर्थन नहीं मिलेगा।
  • यदि दसवें घर पर शनि, राहु और केतु जैसे अशुभ ग्रहों का प्रभाव है।
  • यदि दशम भाव कुंडली में दुर्बल स्थिति में है। यदि दशम भाव का स्वामी कुंडली के 6/8/12 भाव में मौजूद है।
  • यदि दशम भाव पर 6/8/12 घरों के शासक का आधिपत्य है।
  • यदि दशम भाव का स्वामी, शनि, राहु और केतु जैसे अशुभ ग्रहों के साथ युति में है।

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कमज़ोर सूर्य को मजबूत बनाने के उपाय 

पिता दिवस के इस ख़ास मौके पर हम आपको अपने पिता के साथ संबंध सुधारने के कुछ बेहद सरल उपाय बताने जा रहे हैं। जैसा कि हमने इस बारे में आपको बताया कि सूर्य को ग्रहों का राजा या यूं कहें कि पिता का दर्जा दिया जाता है। दसवें घर में यह अपने सबसे मजबूत स्थिति में होता है जिसे पिता का प्रतिनिधित्व करने के लिए जाना जाता है यानी कि कुल मिलाकर बात पिता से जुड़ी हो तो सूर्य बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसीलिए यहाँ दिए गए सभी उपाय सूर्य को मजबूत करने के लिए हैं-

  • सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें।
  • ब्रह्म मुहूर्त के दौरान सूर्य का ध्यान करने से भी जातकों को लाभ मिलेगा। ऐसा करना सूर्य को मजबूत करता है क्योंकि इस समय के दौरान सूर्य लग्न भाव में रहता है।
  • सूर्य का आभार जताने के लिए रोज़ाना सूर्य नमस्कार करें।
  • सूर्योदय के दौरान आदित्य हृदय स्तोत्र को सुनें या फिर उसका पाठ करें।
  • भगवान राम की कहानियों को सुनें या पढ़ें क्योंकि भगवान राम को सूर्य भगवान से जोड़कर देखा जाता है।
  • गायत्री मंत्र का जाप करें या सुनें।
  • प्राणायाम करें।
  • “राम रक्षा स्तोत्र” का जाप या पाठ करें।
  • रविवार के दिन लाल चींटियों को गेहूं/आटा खिलाएं।
  • ज़रूरतमंदों को या सरकार प्रायोजित चैरिटी संगठनों या एनजीओ में दान और ज़रूरत का सामान देने से भी आपको काफी लाभ मिलेगा।
  • तांबे का दान करें या तांबे के बर्तन में पानी पिएं।
  • अपने शिक्षक, गुरु, या पिता तुल्य किसी भी इंसान की अपनी यथाशक्ति के अनुसार कोई सेवा या मदद करें। ऐसा करने से आपको आपके पिता के साथ संबंध मज़बूत करने में मदद अवश्य मिलेगी।

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हम उम्मीद करते हैं कि पिता दिवस पर हमारा यह ख़ास लेख आपको अवश्य पसंद आया होगा और इस लेख में दिए गए उपायों को कर के आपको आपके पिता के साथ संबंध मज़बूत करने में भी मदद मिलेगी। हमारी तरफ से आपको पिता दिवस/फादर्स डे की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्यवाद!