चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन, इन उपायों से मिलेगी मां स्‍कंदमाता की कृपा!

चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन, इन उपायों से मिलेगी मां स्‍कंदमाता की कृपा!

चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन: हिंदू पंचांग में चैत्र नवरात्रि नौ दिनों का एक महत्‍वपूर्ण त्‍योहार है जो कि मां दुर्गा और उनके नौ स्‍वरूपों को समर्पित है। चैत्र नवरात्रि 2025 के पांचवे दिन को पंचमी तिथि के नाम से जाना जाता है और इस दिन स्‍कंदमाता की पूजा का विधान है। मां दुर्गा के इस स्‍वरूप को स्‍नेह और शक्‍ति का प्रतीक माना जाता है।

एस्‍ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्‍लॉग में स्‍कंदमाता से जुड़ी पौराणिक कथाओं, उनके पूजन के महत्‍व, पंचम नवरात्रि की पूजन विधि आदि के बारे में बताया गया है। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं नवरात्रि के पांचवे दिन के बारे में।

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चैत्र नवरात्रि 2025 का पांचवां दिन: समय और तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्रि की पंचम तिथि 02 अप्रैल, 2025 को अर्धरात्रि 02 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 02 अप्रैल की ही रात को 11 बजकर 52 मिनट पर होगा।

मां स्‍कंदमाता का महत्‍व

मां नवदुर्गा के पांचवे स्‍वरूप को स्‍कंदमाता के नाम से जाना जाता है। उन्‍हें युद्ध के देवता कार्तिकेय की मां के रूप में यह नाम मिला है। भगवान कार्तिकेय को स्‍कंद के नाम से भी जाना जाता है इसलिए उनकी मां को स्‍कंदमाता भी कहते हैं। स्‍कंदमाता का अर्थ होता है स्‍कंद की मां। देवी दुर्गा के पांचवे स्‍वरूप में स्‍कंदमाता कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं जिससे उन्‍हें पद्मासन की उपाधि मिली है। मां स्‍कंदमाता की चार भुजाएं हैं जिनमें से दो हाथों में कमल का फूल है, एक हाथ अभय मुद्रा में है और उनके एक हाथ में भगवान स्‍कंद शिशु के रूप में विराजमान हैं। मां दुर्गा के पांचवे स्‍वरूप की सवारी सिंह है जो कि साहस और शक्‍ति का कारक है।

स्‍कंदमाता की उत्‍पत्ति देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध से जुड़ी हुई है। असुर तारकासुर को यह वरदान मिला था कि भगवान शिव का पुत्र ही उसका वध कर सकता है। उस समय भगवान शिव गहन तपस्‍या में लीन थे और संसार से संबंधित मामलों से विरक्‍त थे। संसार में संतुलन बनाए रखने के लिए देवताओं ने माता पार्वती से सहायता मांगी। देवी पार्वती ने अपनी कठोर तपस्‍या से भगवान शिव को प्रसन्‍न कर उनसे विवाह किया। भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से उत्‍पन्‍न पुत्र स्‍कंद यानी भगवान कार्तिकेय ने देवताओं की सेना का नेतृत्‍व करते हुए तारकासुर का वध कर दिया।

युद्ध के देवता की मां होने की वजह से स्‍कंदमाता को मातृत्‍व की रक्षा और पोषण करने वाली शक्‍ति का प्रतीक माना जाता है।

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मां स्‍कंदमाता का स्‍वरूप

स्‍कंदमाता को शांत और तेजस्‍वी देवी के रूप में दर्शाया गया है जो मातृत्‍व की कोमलता और दिव्‍य शक्‍ति दोनों का प्रतीक हैं। स्‍कंदमाता की चार भुजाएं हैं जो विभिन्‍न दैवीय गुणों को दर्शाते हैं। उनके दो हाथों में खिले हुए कमल के फूल हैं जो कि पवित्रता, आध्‍यात्मिक जागृति और दिव्‍य सौंदर्य का प्रतीक हैं। उनकी एक भुजा अभय मुद्रा में रहती है जिसे संरक्षण और आश्‍वासन का प्रतीक माना जाता है। यह दर्शाता है कि माता अपने भक्‍तों की हर संकट से रक्षा करती हैं। मां ने अपनी चौथी भुजा अपनी गोद में बैठे अपने पुत्र स्‍कंद को पकड़ रखा है।

स्‍कंदमाता का रंग स्‍वर्णिम और तेजस्‍वी है जो उनकी दिव्‍यता को दर्शाता है। देवी सुंदर आभूषणों और दिव्‍य मुकुट से सुस्‍सजित हैं जो सभी देवियों में उनकी श्रेष्‍ठता को दर्शाता है। उनके वस्‍त्र स्‍वर्ण या पीले रंग के हैं जिससे उनकी दिव्‍यता और भव्‍यता दोनों ही बढ़ जाती हैं। स्‍कंदमाता तेजस्‍वी सिंह पर सवार रहती हैं जो कि निडरता और शक्‍ति का प्रतीक है। कुछ तस्‍वीरों में उन्‍हें खिले हुए कमल के फूल पर भी विराजमान होते हुए देखा गया है। इस वजह से कभी-कभी उन्‍हें ‘पद्मासन’ के नाम से भी जाना जाता है। उनका संपूर्ण रूप ममतामयी मां के वात्‍सल्‍य और एक योत्रा की मां की अद्भुत शक्‍ति के अद्धितीय संगम की तरह प्रतीत होता है।

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मां स्‍कंदमाता का प्रिय भोग

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्‍येक दिन पर विशेष भोग लगाया जाता है और चैत्र नवरात्रि 2025 की पंचम तिथि पर स्‍कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। उनके पूजन में केले रखने को अत्‍यंत शुभ माना जाता है। देवी को प्रसन्‍न करने के लिए भक्‍त केले के साथ गुड़ का भोग भी लगा सकते हैं। 

मां स्‍कंदमाता की पूजा का महत्‍व

नवरात्रि के पांचवे दिन स्‍कंदमाता के पूजन का अत्‍यधिक आध्‍यात्मिक महत्‍व है। उन्‍हें मातृ प्रेम, साहस और करुणा का प्रतीक माना जाता है। भक्‍तों का मानना है कि स्‍कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान, शक्‍ति और संपत्ति का आशीर्वाद मिलता है। स्‍कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से भी है जो संचार और विचारों को व्‍यक्‍त करने का कारक है। इस चक्र पर ध्‍यान करने से भक्‍तों के विचार शुद्ध होते हैं और उन्‍हें आध्‍यात्मिक उन्‍नति प्राप्‍त होती है।

ऐसा माना जाता है स्‍कंदमाता की पूजा करने से हृदय और आत्‍मा दोनों शुद्ध होते हैं जिससे श्रद्धालु सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। उनकी कृपा से शांति और संतुष्टि मिलती है एवं इच्‍छाओं की पूर्ति होती है।

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चैत्र नवरात्रि 2025 की पंचमी तिथि पर ध्‍यान रखने योग्‍य बातें

  • कई श्रद्धालु पचंमी तिथि पर व्रत रखते हैं और मन एवं शरीर को शुद्ध करने के लिए केवल फल एवं दूध का सेवन करते हैं।
  • इस दिन सफेद रंग के वस्‍त्र पहनना शुभ रहता है। यह पवित्रता और भक्‍ति का प्रतीक है।
  • भक्‍त अपने संचार कौशल को बेहतर करने और अपने मन एवं शरीर को शुद्ध करने के लिए इस दिन विशुद्ध चक्र पर ध्‍यान कर सकते हैं।
  • इस दिन दान-पुण्‍य करने का भी बहुत महत्‍व है जैसे कि ज़रूरतमंद या गरीब लोगों को खाना खिलाएं या वस्‍त्र दान करें। यह करुणा और स्‍कंदमाता की कृपा प्राप्‍त करने का श्रेष्‍ठ मार्ग है।

स्‍कंदमाता के लिए मंत्र जाप

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः।।

प्रार्थना मंत्र:

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी

स्‍तुति:

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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चैत्र नवरात्रि 2025 की पंचमी तिथि के लिए पूजन विधि

  • नवरात्रि की पंचमी तिथि पर सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से निवृत्त हो जाएं और धुले हुए वस्‍त्र पहनकर व्रत रखने का संकल्‍प लें।
  • इसके बाद पूरे घर को गंगा जल या गौमूत्र से शुद्ध करें।
  • अब पूजन स्‍थल में चौकी स्‍थापित करें और उस पर स्‍कंदमाता की तस्‍वीर या मूर्ति रखें।
  • फिर तांबे, चांदी या मिट्टी के बर्तन में पानी भरें और उसमें कुछ सिक्‍के डाल दें।
  • देवी मां को उनके पसंदीदा भोजन, फल, फूल और अन्‍य चीज़ें अर्पित करें। चूंकि, स्‍कंदमाता का प्रिय रंग सफेद है इसलिए पंचमी तिथि पर पूजन के दौरान दूध से बनी खीर और केले चढ़ाने चाहिए।
  • इसके अलावा पूजन के समय सफेद या पीले रंग के वस्‍त्र पहनें।
  • आखिर में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करके पूजन का समापन करें।

स्‍कंदमाता का ज्‍योतिषीय महत्‍व

स्‍कंदमाता बुध ग्रह पर शासन करती हैं इसलिए उनका पूजन करने से कुंडली में मौजूद बुध ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभाव नष्‍ट हो सकते हैं।

चैत्र नवरात्रि 2025 की पंचमी तिथि के लिए राशि अनुसार उपाय

मेष राशि: मां स्‍कंदमाता की पूजा करने के बाद गरीबों और बच्‍चों को दूध दान में दें।

वृषभ राशि: मां स्‍कंदमाता को लड्डू और मालपुआ चढ़ाएं और फिर इसे बच्‍चों में बांट दें और खुद भी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। आप गुलाबी रंग के वस्‍त्र पहनें।

मिथुन राशि: सच्‍चे मन और श्रद्धा से दुर्गा सप्‍तशती का पाठ एवं मंत्रों का जाप करें।

कर्क राशि: स्‍कंदमाता को गुलाबी या लाल रंग के फूल अर्पित करें और भोग में घर पर बनी खीर चढ़ाएं।

सिंह राशि: भोग के रूप में केले चढ़ाएं और 108 बार ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः’ का जाप करें।

कन्‍या राशि: नियमित रूप से नवरात्रि पूजन करने के साथ आप स्‍कंदमाता के साथ-साथ मां लक्ष्‍मी की उपासना करें एवं उनके मंत्रों का जाप करें।

तुला राशि: घर में समृद्धि लाने के लिए मां स्‍कंदमाता के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं और कपूर एवं लौंग से छोटा-सा हवन करें।

वृश्चिक राशि: बुध ग्रह को मज़बूत करने के लिए वृश्चिक राशि वाले गरीब लोगों को हरे रंग की चूड़ियां और मूंग दाल दान में दें।

धनु राशि: आप स्‍कंदमाता को दूध और घी से बनी मिठाई अर्पित करें। अपने सिर से सात बार नारियल उतारने के बाद इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस उपाय को करने से आपको लगी बुरी नज़र दूर हो जाएगी।

मकर राशि: किसी वृद्ध और बेघर स्‍त्री को कपड़े दान करें और एवं अन्‍य चीज़ें भी दान में दें। गरीब लोगों को खीर और सफेद रंग की अन्‍य मिठाईयां खिलाएं।

कुंभ राशि: स्‍कूल जाने वाले गरीब बच्‍चों को यूनिफॉर्म और अन्‍न का दान करें। इससे आपके व्‍यापार में वृद्धि होगी।

मीन राशि: ज़रूरतमंद छात्रों को किताबें और अन्‍य ज़रूरी चीज़ें दान करें। इस दिन दान करने का बहुत महत्‍व है।

स्‍कंदमाता को प्रसन्‍न करने के उपाय

नवरात्रि की पंचमी तिथि पर पूजन के दौरान कमल का फूल चढ़ाने से स्‍कंदमाता प्रसन्‍न होती है और जीवन में सपन्‍नता एवं शुद्धता का आगमन होता है।

स्‍कंदमाता बुध ग्रह पर शासन करती हैं इसलिए पंचमी तिथि पर हरे रंग की चीज़ें जैसे कि हरी मूंग दाल, हरे रंग के वस्‍त्र या हरे रंग के फल ज़रूरतमंद लोगों को देने से लाभ मिलता है।

छात्रों को किताबें, स्‍टेशनरी या पढ़ाई से संबंधित अन्‍य चीज़ें दान करने से भी स्‍कंदमाता का आशीर्वाद मिलता है।

खीर बनाकर देवी को अर्पित करने के बाद उसे प्रसाद के रूप में वितरित करना अत्‍यंत फलदायी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इससे सुख-शांति आती है और वित्तीय संकट दूर होता है।

यदि आप गर्भधारण करना चाहती हैं, तो नवरात्रि की पंचम तिथि पर एक नारियल लें और उसे लाल रंग के कपड़े में लपेट लें। इसे स्‍कंदमाता के चरणों से स्‍पर्श करें और इस मंत्र का जाप करें: “नंद गोप गृहे जाता यशोदा गर्भ सम्भवा। ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी।।” पूजन के बाद नारियल को बिस्‍तर पर रख दें। मान्‍यता है कि ऐसा करने से स्‍कंदमाता का आर्शीवाद मिलता है और संतान की प्राप्‍ति होती है।

सच्‍चे मन से पंचमी तिथि पर व्रत रखने से मन और आत्‍मा दोनों शुद्ध हो जाते हैं जिससे भक्‍तों को ईश्‍वर की कृपा प्राप्‍त होती है। इस दिन फल और दूध से बनी चीज़ें खाई जाती हैं।

स्‍कंदमाता और बुध ग्रह को प्रसन्‍न करने के लिए पंचमी तिथि पर गाय को हरा चारा खिलाने और पक्षियों को दाना देने का बहुत महत्‍व है।

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अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

प्रश्‍न 1. पंचमी तिथि पर मां दुर्गा के किस रूप की पूजा की जाती है?

उत्तर. चैत्र नवरात्रि 2025 की पंचमी तिथि पर स्‍कंदमाता की पूजा होती है।

प्रश्‍न 2. स्‍कंदमाता किस ग्रह पर शासन करती हैं?

उत्तर. स्‍कंदमाता का संबंध बुध ग्रह से है।

प्रश्‍न 3. चैत्र नवरात्रि 2025 में पंचमी तिथि कब पड़ रही है?

उत्तर. इस बार पंचमी तिथि 02 अप्रैल, 2025 को अर्धरात्रि 02 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 02 अप्रैल की ही रात को 11 बजकर 52 मिनट पर होगा।