विजया एकादशी कब है, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

विजया एकादशी 2026: तुलसी को प्रसन्न करने के उपाय, करियर में उन्नति और विवाह योग होंगे प्रबल!

हर वर्ष विजया एकादशी का पावन व्रत फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ रखा जाता है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह दिन विजय, सफलता और बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस एकादशी के प्रभाव से व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में सफलता, जीवन की परेशानियों से राहत और शुभ फल प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में इस एकादशी के मुख्य रूप से विजया एकादशी कहा गया है, जबकि इसे फाल्गुन कृष्ण एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। 

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कुछ स्थानों पर इसे विजयिनी एकादशी भी कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी की विधिवत पूजा करने से जीवन में रुके हुए कार्य पूरे होते हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इसी क्रम में आएगा बढ़ते हैं और जानते हैं एस्ट्रोसेज एआई के इस ख़ास ब्लॉग में विजया एकादशी की तिथि, महत्व व और भी बहुत कुछ।

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विजया एकादशी 2026:  तिथि व समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की पहली एकादशी विजया एकादशी 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार के दिन पड़ेगी।

एकादशी तिथि प्रारम्भ : फरवरी 12, 2026 की दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से 

एकादशी तिथि समाप्त : फरवरी 13, 2026 की दोपहर 02 बजकर 29 मिनट तक

विजया एकादशी पारण मुहूर्त : 14 फरवरी की सुबह 06 बजकर 43 मिनट से 09 बजकर 02 मिनट तक

अवधि : 2 घंटे 18 मिनट

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विजया एकादशी 2026: महत्व

विजया एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है और भगवान विष्णु को समर्पित होती है। विजया का अर्थ विजय या सफलता है, इसलिए माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की कठिनाइयों, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त होती है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व विजया एकादशी का व्रत किया था, जिससे उन्हें विजय प्राप्त हुई। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख, शांति, समृद्धि और कार्यों में सफलता मिलती है।

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विजया एकादशी 2026 की पूजा विधि

  • इस दिन प्रात ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। हाथ में संकल्प लेकर व्रत का सकंल्प करें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल, धूप दीप और नैवेद्य अर्पित करें। 
  • इसके बाद विष्णु  सहस्रनाम, एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। 
  • दिन भर सात्त्विक आचरण रखें और अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या एक समय भोजन का व्रत करें। 
  • रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान और भजन करें। 
  • अगले दिन द्वादशी तिथि को स्नान कर भगवान की पूजा के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देकर व्रत का पारण करें।

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विजया एकादशी 2026 की कथा

विजया एकादशी का कथा का संबंध त्रेता युग से बताया जाता है। जब भगवान श्री राम अपनी पत्नी माता सीता को रावण से मुक्त कराने के लिए वनार सेना से साथ लंका की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उनके सामने समुद्र को पार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई। समुद्र अत्यंत विशाल और अथाह था, जिसे बिना किसी साधान के पार करना असंभव प्रतीत हो रहा था। भगवान श्री राम इस चिंता में थे कि सेना को सुरक्षित रूप से लंका तक कैसे पहुंचाया जाएष इसी दौरान वानर सेना और लक्ष्मण जी भी असमंजस में पड़ गए कि आगे क्या उपाय किया जाए। 

तबी वनार सेना के एक सदस्य ने सुझाव दिया कि पास के वन में ऋषि बकदाल्भ्य का आश्रम है, जो महान तपस्वी और ज्ञानी हैं। उनकी सलाह अवश्य लाभकारी होगी। भगवान श्रीराम तुरंत ऋषि बकदाल्भ्य के आश्रम पहुंचे और उन्हें अपनी समस्या बताई। ऋषि ने भगवान श्रीराम को विजया एकादशी व्रत का महत्व बताया और कहा कि यदि वे इस व्रत को विधि-विधान से करेंगे तो उन्हें अपने उद्देश्य में अवश्य सफलता प्राप्त होगी। ऋषि ने समझाया कि यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसका व्रत करने से बड़े से बड़ा कार्य भी सिद्ध हो जाता है।

ऋषि बकदाल्भ्य के निर्देशानुसार भगवान श्री राम, माता सीता (वनवास काल की स्मृति में) लक्ष्मण जी और पूरी वानर सेना ने श्रद्धा और नियमपूर्वक विजया एकादशी का व्रत रखा। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की गई, उपवास किया गया और रात्रि में जागरण भी किया गया। सभी ने एकाग्र मन से भगवान नारायण से विजय और सफलता की प्रार्थना की। व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीराम को अपार आत्मबल और दिव्य सहायता प्राप्त हुई। 

अगले ही दिन समुद्र देव प्रकट हुए और उन्होंने समुद्र पार करने का मार्ग बताया। उनकी प्रेरणा से नल और नील ने सेतु निर्माण का कार्य आरंभ किया और देखते ही देखते रामसेतु का निर्माण संभव हो गया। इस प्रकार भगवान श्रीराम ने समुद्र पार कर लंका पर विजय प्राप्त की और माता सीता को मुक्त कराया। 

इसी कारण इस एकादशी को “विजया एकादशी” कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करता है, उसे जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है, शत्रु बाधा नहीं बन पाते और हर कार्य में सफलता मिलती है। विजया एकादशी का व्रत न केवल सांसारिक विजय देता है, बल्कि साधक को आध्यात्मिक बल और भगवान विष्णु की विशेष कृपा भी प्रदान करता है।

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विजया एकादशी के दिन क्या करें क्या न करें

क्या करें

  • विजया एकादशी के दिन इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “श्रीराम रामाय नमः” मंत्र का जप करना विशेष फलदायी माना जाता है। 
  • यदि संभव हो तो पूरे दिन उपवास रखें अन्यथा फलाहार या सात्विक भोजन करें।
  • एकादशी की रात में जागरण करें,  विष्णु सहस्रनाम या रामायण पाठ करें।
  • इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है, इसलिए जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करें।

क्या न करें

  • विजया एकादशी के दिन तामसिक भोजन, जैसे मांस, मछली, अंडा शराब आदि का सेवन बिल्कुल न करें।
  • चावल और उससे बनी वस्तुएं भी इस दिन वर्जित मानी जाती है।
  • झूठ बोलना, क्रोध करना, किसी का अपमान करना या मन में नकारात्मक विचार लाना अशुब माना जाता है।
  • इस दिन बाल काटवाना, नाखून काटना और तेल मालिश से भी परहेज करना चाहिए।
  • एकादशी के दिन दिन में सोना तथा बिना कारण आलस्य करना भी व्रत के फल को कम करता है। साथ ही, किसी से विवाद या झगड़ा करने से बचना चाहिए।

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विजया एकादशी के दिन करें ये आसान उपाय

विजय प्राप्ति के लिए

इस दिन प्रात: स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं और 11 बार यह मंत्र बोलें  “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इसके बाद मन ही मन अपने कार्य में सफलता की प्रार्थना करें। मान्यता है कि रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और शत्रु पक्ष कमजोर पड़ता है।

शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए

एकादशी के दिन तुलसी के 11 पत्ते लें, उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें और भगवान विष्णु को अर्पित करें। फिर तुलसी के पौधे के पास बैठकर “विष्णु सहस्रनाम” या “राम रक्षा स्तोत्र” का पाठ करें। इससे शत्रुओं की चाल निष्फल होती है। 

नौकरी व्यापार में सफलता के लिए 

पीले चावल में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर भगवान विष्णु को अर्पित करें। पूजा के बाद वही चावल किसी साफ कपड़े में बांधकर तिजोरी या कार्यस्थल में रखें। यह टोटका धन वृद्धि और तरक्की के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

मानसिक तनाव और भय दूर करने के लिए

विजया एकादशी की रात को सोने से पहले कपूर जलाकर भगवान सा स्मरण करें और कहें- “हे नारायण, मेरे सभी भय और चिंताएं दूर करें।” मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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कर्ज़ और आर्थिक समस्या से राहत के लिए

एकादशी के दिन किसी ज़रूरतमंद को पीली दाल, गुड़ या केले का दान करें। दान देते समय मन में संकल्प लें कि आपकी आर्थिक परेशानी दूर हो। यह उपाय धीरे-धीरे धन संकट कम करता है।

दाम्पत्य सुख के लिए उपाय

पति-पत्नी साथ में भगवान श्री राम या विष्णु की पूजा करें और एक साथ दीपक जलाएं। फिर  “श्रीराम जय राम जय जय राम” मंत्र का 21 बार जाप करें। इससे रिश्तों में प्रेम और मधुरता बढ़ती है।

मनोकामना पूर्ति के लिए

एक नारियल पर लाल मौली बांधें और एकादशी के दिन विष्णु जी को अर्पित करें। पूजा के बाद नारियल को मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर रख दें। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई कामना अवश्यक पूर्ण होती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. विजया एकादशी कब मनाई जाती है?

विजया एकादशी हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा।

2. विजया एकादशी का महत्व क्या है?

विजया एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि यह विजय, सफलता और बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।

3. विजया एकादशी किस देवता को समर्पित है?

विजया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन माता तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।