विवाह दिवस संस्कार- शादी की सालगिरह का महत्व और विधि

हिन्दू धर्म में जिस प्रकार से विवाह संस्कार को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है उसी प्रकार से विवाह दिवस संस्कार को भी बेहद अहम माना गया है। आजकल शादी की सालगिरह तो अमूमन हर शादीशुदा जोड़ा जरूर मनाता है, लेकिन इस बात से शायद ही कोई अवगत होगा की हिन्दू धर्म में बाक़ायदा विवाह दिवस संस्कार के लिए विशेष विधि विधान बताये गए हैं। आज इस लेख के द्वारा हम आपको खासतौर से विवाह दिवस संस्कार की अहमियत और उसे संपन्न करने की सही विधि के बारे में बताने जा रहे हैं। आईये जानते हैं कि हिन्दू धर्म में विवाह दिवस संस्कार को किस प्रकार से अहम माना गया है और क्या है इसकी विशेषता।

विवाह दिवस संस्कार की महत्ता

जन्मदिवस संस्कार की भांति ही विवाह दिवस संस्कार को भी खासतौर से महत्वपूर्ण माना गया है। जिस प्रकार से शास्त्रों में व्यक्ति के जन्मदिवस को मनाया जाना ख़ासा महत्वपूर्ण माना जाता है उसी प्रकार से शादी की सालगिरह को भी विधि विधान के साथ संपन्न करवाने का ख़ासा महत्व है। शास्त्रों में लिखा है कि जिस प्रकार से अविवाहित लोगों के लिए विवाह संस्कार की ख़ास महत्ता है उसी प्रकार से शादीशुदा लोगों के लिए विवाह दिवस की भी विशेष अहमियत है। विवाह सालगिरह को एक उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए, अगर विवाह से जुड़े सभी विधि विधान ना भी किये जाए तो कम से कम उनमें से कुछ प्रमुख विधियों को तो जरूर दोहराना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अगर विवाह दिवस के दिन एक छोटे उत्सव का आयोजन कर परिवार और मित्रों के साथ इस दिन को हर्षपूर्वक मनाया जाए तो इससे शादीशुदा जोड़े के बीच प्रेम की भावना बढ़ती है। साथ ही जीवन के आम दिनों में दोनों के बीच पैदा होने वाली शिकायतें भी दूर होती है, इस लिहाज से भी विवाह दिवस संस्कार का क्रियान्वयन करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन विवाहित जोड़े साथ में बिताये गए तमाम ख़ास मौकों को याद कर जीवन की एक नई दिशा में शुरुआत कर सकते हैं। विवाहित जोड़े अपने रिश्ते को एक बार फिर से जीवंत करने और अनजाने में हुई भूल चूक का सुधार करने के लिए हर वर्ष विवाह दिवस संस्कार को विशेष रूप से संपन्न करें तो इससे कोई हानि नहीं है बल्कि इसके लाभ ही लाभ हैं। विवाह दिवस संस्कार एक ऐसा संस्कार है जिसे दुनिया के सभी देशों में सभी धर्म के लोग अलग-अलग तरीके से मानते हैं। हिन्दू धर्म में विवाह दिवस संस्कार को संपन्न करने के लिए कुछ विशेष विधि बताई गयी है।

इस प्रकार से करें विवाह दिवस संस्कार की तैयारी

भारतीय संस्कृति में आज भी विवाह दिवस को बहुत से जगहों पर शादीशुदा जोड़े संकोच और लज्जा का विषय मानते हैं। भारत में आज भी बहुत से ऐसे राज्य हैं जहाँ पत्नियां पराये लोगों के समाने अपने पति से भी पर्दा कर लेती हैं। खास करके जिन राज्यों में या धर्मों में प्रेम विवाह को कुप्रथा माना जाता है ,वहां विवाह से पूर्व लड़का-लड़की एक दूसरे को नहीं जानते। इसका परिणाम ये होता है कि शादी के बाद भी दोनों काफी सालों तक अनजानों की तरह ही पेश आते हैं। ऐसी शादियों का परिणाम ही यह होता है कि, शादी के बाद जोड़े विवाह दिवस को लेकर संकोच करते हैं। जबकि हिन्दू धर्म की मान्यताओं की बात करें तो दो भाइयों की तरह ही पति पत्नी भी हर सुख दुःख में एक दूसरे के साथी होते हैं। इसलिए ना तो विवाह दिवस संस्कार को लेकर उन्हें किसी प्रकार का संकोच रखना चाहिए और ना ही दूसरों के सामने किसी प्रकार की झिझक करनी चाहिए। शास्त्रों में भी विवाह बंधन को सबसे पवित्र बंधन के तौर पर माना गया है ,लिहाजा पति पत्नी को सामाजिक रूप से एक साथ किसी उत्सव या त्यौहार के अवसर पर उपस्थित होने पर किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार से किसी हवन या कर्म काण्ड के दौरान एक साथ बैठने में संकोच नहीं किया जाता है, उसी प्रकार से विवाह दिवस के दिन भी विशेष हवन में बैठने से संकोच नहीं करना चाहिए। आजकल आधुनिक युग में नवविवाहित जोड़ों में संकोच तो नहीं देखा जाता है लेकिन विवाह दिवस को मनाने का उनका तरीका भी बिल्कुल अलग होता है। हिन्दू धर्म को मानने वालों को विशेष रूप से विवाह दिवस के दिन नीचे दिए क्रियाओं का पालन अवश्य करना चाहिए।

व्रत धारण

शादी के बाद हर लड़के को अपना पति धर्म निभाना चाहिए और ठीक इसी तरह हर लड़की को अपना पत्नी धर्म। जिस तरह जन्म दिन के अवसर पर व्रत धारण करने की क्रिया की जाती है ऐसे ही विवाह दिवस संस्कार पर भी व्रत धारण करना चाहिए। दांपत्य जीवन से ही परिवार बनता है और परिवार से ही समाज का निर्माण होता है। इसलिए अगर दांपत्य जीवन सही नहीं चल रहा है तो इससे समाज का विकास भी ठीक ढंग से नहीं हो पाता। इसलिए विवाह दिवस संस्कार के दिन कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए व्रत धारण करना चाहिए।   

इस दौरान सबसे पहले पति द्वारा निम्नलिखित बातों की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए:

  • पत्नी के लिए किसी भी प्रकार के कटु शब्द या गाली का प्रयोग ना करें।
  • पत्नी की किसी भूल के लिए उन्हें सबके सामने भला बुरा ना कहें बल्कि एकांत में उन्हें अपनी गलतियों का एहसास दिलाएं।
  • किसी भी परायी स्त्री या युवती के साथ पत्नी की अनुपस्थिति में एकांत में बातचीत ना करें।
  • पत्नी पर संतान उत्पत्ति के लिए किसी भी प्रकार का दवाब ना डालें।
  • यदि शादी के बाद पत्नी अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती है तो उसकी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी उठाएं।
  • घर में होने वाले खर्चों का बजट पत्नी की सहमति से बनाएं और पैसों पर पत्नी का पूरा अधिकार रखें।
  • घर को स्वर्ग बनाने में पत्नी की पूरी सहायता करना और गृह कार्यों में उनका हाथ बंटाना।
  • विशेष मौकों पर पत्नी के सद्गुणों की प्रशंसा करने से ना चुके।
  • बच्चों की देखभाल और पढ़ाई पर विशेष ध्यान रखकर पत्नी के काम को सरल बनाएं।
  • पत्नी को स्वावलंबी बनाने की दिशा में पूरा सहयोग देना ना कि समाज की बेड़ियों से बांधकर रखना।
  • पत्नी की सभी जायज़ आवश्यकतों की पूर्ती करना और उसकी सुख सुविधाओं का ध्यान रखना।

इस दौरान पत्नी द्वारा निम्नलिखित बातों की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए:

  • छोटी-छोटी बातों पर रूठने और झल्लाने की आदत का त्याग करना।
  • दूसरों का गुस्सा बच्चों पर निकालना और उन्हें भला बुरा कहने की आदत का त्याग करना।
  • ससुराल में सास या ननद के साथ बातचीत के दौरान कटु शब्दों का प्रयोग ना करें।
  • परिवार के रहन-सहन का ख़ास ख्याल रखते हुए हमेशा हसँते मुस्कुराते रहना।
  • घर की साफ़-सफाई का ख्याल रखना और कभी भी मेहनत से जी ना चुराना।
  • व्यर्थ की चीजों पर पैसे ना खर्च करना।
  • पति की जानकारी के बिना कोई भी काम ना करें।
  • पति के साथ साथ परिवार के सभी सदस्यों की सेहत का ख्याल रखना।
  • सामाजिक कार्यों में भागीदारी के लिए पति पर किसी भी प्रकार का अंकुश ना लगाना।
  • सुबह शाम घर के मंदिर में ज्योत जलाना और धार्मिक संस्कारों में भागीदारी रखना।

हर दांपत्य जीवन में पति पत्नी की अपनी अलग-अलग समस्याएं होती हैं। अर्थात हर शादीशुदा जोड़े को अपनी समस्याओं का अनुसरण करते हुए उसे आपसी सहमति से दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

संस्कार क्रम

विवाह दिवस संस्कार को विवाह के संक्षिप्त संस्करण के रूप में देखा जाता है और इसी तरह से इसे मनाया जाता है। विवाह में होने वाले पूजन की तरह ही इस संस्कार को भी निम्नलिखित विधि से मनाया जाना चाहिए।

मंगलाचरण-षष्टकर्म कलश पूजन

इस क्रिया के दौरान कलश स्थापना के साथ ही पति पत्नी को विशेष रूप से ऊपर दी गई बातों की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए। इस दौरान ईश्वर का ध्यान करते हुए निम्नलिखित मंत्र को उच्चारित करना चाहिए।

मंत्र- “नामा हं दाम्पत्यजीवनस्य पवित्रता मर्यादयोः रक्षणाय त्रुटिनाश्च प्रायश्चित्करणाय उज्जवलभविष्यद्वेतवे स्वोत्तरदावित्यपालनाय संकल्पमहं करिष्ये।”

मन्त्रों को बोलते हुए संकल्प लेना चाहिए। इसके पश्चात यदि समय सीमा का ख्याल रखते हुए  देव पूजन और स्वस्ति पूजन की क्रिया भी भली भांति संपन्न करवा लेनी चाहिए।

सामान्य क्रम के पूरा हो जाने के बाद विवाह में बोले जाने वाले मंत्रों का इस्तेमाल करके नीचे दिए गए कर्मों से निर्धारित जरुरी उपचार कराए जाने चाहिए।

  1. ग्रंथि बंधन
  2. पाणिग्रहण
  3. वर-वधु की प्रतिज्ञा
  4. सप्तपदी
  5. आश्वास्तना

विशेष आहुति

यदि विवाह दिवस के दिन यज्ञ संपन्न करवा रहें हो तो इस दौरान विशेष रूप से अग्निस्थापना करके गायत्री मन्त्रों का उच्चारण करते हुए आहुति दें। इसके अलावा विवाह संस्कार के अनुसार मन्त्रों के जाप के साथ ही साथ “ग्रंथि बंधन”, “पाणिग्रहण”, “वर वधु की प्रतिज्ञाएं”, “ सप्तपदी”, “आश्वस्तना” क्रियाओं को भी संपन्न करें। यदि यज्ञ के लिए समय ना हो तो दीपयज्ञ का आयोजन करें। इसके लिए किसी तस्तरी में पांच दीपक लेकर उसे गायत्री मन्त्र के उच्चारण के साथ प्रज्जवलित करें। इस दौरान पति पत्नी अपने दोनों हाथों को दीपक की तरफ रखें।

एकीकरण

इस क्रिया के दौरान पति पत्नी एक-एक करके सर्वप्रथम दीपक उठाएं और नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करें।  

मंत्र- ॐ समानी व् आकृतिः समाना हृदयानि वः।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति….(अथर्व.6.64.3)”

इसके बाद शादीशुदा दंपति मंत्रोउच्चारण के साथ ही एक दूसरे को फूलों की माला पहनाएं। उपस्थित लोग मंगल मन्त्रों के उच्चारण के साथ ही दंपति जोड़े पर फूलों की वर्षा करें और उन्हें आशीर्वाद दें। इसके साथ ही प्रसाद वितरण करके समारोह का समापन करें।

विवाह दिवस संस्कार के साथ ही पति पत्नी नए साल की शुरुआत नए ढंग से करने का प्रण लेते हैं। यदि पूर्व में वैवाहिक जीवन तनाव पूर्ण रहा हो तो, नए साल में उसका निपटारा करने और जीवन को हँसते मुस्कुराते हुए बीतने का प्रण लेना चाहिए।

हम आशा करते हैं की विवाह दिवस संस्कार पर आधारित हमारा ये लेख आपके लिए लाभकारी साबित होगा।