दो शुभ योगों में रखा जाएगा वैशाख अमावस्या का व्रत; कर लें ये उपाय नहीं सताएगा अकाल मृत्यु का डर!

दो शुभ योगों में रखा जाएगा वैशाख अमावस्या का व्रत; कर लें ये उपाय नहीं सताएगा अकाल मृत्यु का डर!

एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको वैशाख अमावस्या 2024 के बारे में बताएंगे और साथ ही इस बारे में भी चर्चा करेंगे कि इस दिन कौन-कौन से योग बन रहे हैं और इन योगों के दौरान कौन से उपाय करने चाहिए ताकि आप मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त कर सके। तो आइए बिना देरी किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि विस्तार से वैशाख अमावस्या के पर्व के बारे में।

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हर महीने चंद्रमा की घटती बढ़ती कलाओं के चलते पूर्णिमा और अमावस्या तिथि आती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में 12 अमावस्या तिथि पड़ती है और इन सभी अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व है लेकिन इन सभी में वैशाख माह की अमावस्या बहुत अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। बता दें कि कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को जब चंद्रमा रात में पूरी तरह दिखाई नहीं देता है तो उसे अमावस्या कहते हैं। पुराणों के अनुसार, हर अमावस्या का दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष महत्व होता है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि यह दिन तर्पण, स्नान, दान आदि के लिए बहुत पुण्य और फलदायी होता है। इस अमावस्या को पितरों को मोक्ष दिलाने वाली अमावस्या भी बताया गया है। ख़ास बात यह है कि इस साल वैशाख अमावस्या पर ज्योतिष की दृष्टि में बेहद ही शुभ माने जाने वाले योगों का निर्माण हो रहा है इसलिए इस तिथि का महत्व और भी बढ़ गया है। तो आइए जानते हैं कि इस साल वैशाख अमावस्या कब पड़ रही है और इस दिन कौन से शुभ योगों का निर्माण हो रहा है व इस योग के दौरान कौन-कौन से उपाय अपनाने चाहिए।

वैशाख अमावस्या 2024: तिथि व समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख के कृष्ण पक्ष का आखिरी दिन अमावस्या तिथि होती है। इस साल यह तिथि 08 मई 2024 दिन बुधवार को पड़ रही है।

अमावस्या आरम्भ : मंगलवार 07 मई, 2024 की सुबह 11 बजकर 43 मिनट से 

अमावस्या समाप्त : बुधवार मई 08, 2024 की सुबह 08 बजकर 53 मिनट तक।

उदया तिथि के अनुसार, 08 मई को वैशाख अमावस्या पड़ेगी। 

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वैशाख अमावस्या पर शुभ योग

ख़ास बात यह है कि इस बार वैशाख अमावस्या पर दो बेहद शुभ योग आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है। सौभाग्य योग में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस योग में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने पर आय, सुख, और धन में वृद्धि होती है। इस योग में सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जा सकते हैं और इस कार्य के परिणाम में फलदायी होते हैं। बात करें आयुष्मान योग की तो ज्योतिष में आयुष्मान योग को बेहद शुभ माना जाता है। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है और हर कार्य सफलतापूर्वक होने लगते हैं।

वैशाख अमावस्या का महत्व

कोई भी अमावस्या तिथि सनातन धर्म में विशेष महत्वपूर्ण और फलदायी मानी जाती है। वैशाख अमावस्या की बात करें तो ज्योतिष और धर्म दोनों नजरिए से यह बहुत अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस अमावस्या पितरों को समर्पित है। ज्योतिष के अनुसार, पितृ दोष से मुक्ति के लिए इस अमावस्या पर विधि-विधान से पूजा पाठ की जानी चाहिए। अमावस्या के दिन स्नान, तर्पण,और दान करना विशेष फलदायी होता है। वैशाख अमावस्या पर सत्तू का दान भी बहुत ही शुभ माना जाता है और यही कारण है कि से सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है।

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वैशाख अमावस्या : पूजा विधि 

  • हिंदू मान्यता के अनुसार, वैशाख मास की अमावस्या के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर घर के सभी कार्यों से निवृत्त होकर स्नान कर लेना चाहिए। 
  • इसके बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें तो विधि-विधान से पूजा करें। 
  • पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए वैशाख अमावस्या के दिन अपने पितरों की विशेष रूप से पूजा जरूर करनी चाहिए। 
  • वैशाख अमावस्या का पुण्य फल पाने के लिए इस दिन पवित्र नदियां, जलाशय, कुंड आदि पवित्र स्थलों में जाकर स्नान-दान करना चाहिए और अपने आराध्य देवी-देवता का मंत्र जप जरूर करना चाहिए।
  • वैशाख अमावस्या पर पितरों के नाम का तर्पण और श्राद्ध भी करना चाहिए। साथ ही इस दिन उपवास भी रखें और इसके बाद ब्राह्मणों को पेट भरकर भोजन कराएं।
  • वैशाख अमावस्या पर पीपल के पेड़ और हनुमान जी की भी की पूजा करनी चाहिए।
  • वैशाख अमावस्या पर हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्त्रनाम आदि का विधि-विधान से पाठ करना चाहिए।

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वैशाख अमावस्या की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मवर्ण नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। वे बहुत ही आध्यात्मिक गतिविधियों में लीन रहते थे और धर्म-कर्म के कामों में लगे रहते थे। साथ ही, ऋषि-मुनियों का आदर करते थे। एक बार उन्होंने किसी महात्मा के मुख से भगवान विष्णु की महिमा के बारे में सुना। फिर उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि भगवान विष्णु के नाम स्मरण से ज्यादा पुण्य किसी भी कार्य में नहीं है। धर्मवर्ण ने इस बात को आत्मसात कर लिया और सांसारिक मोह-माया को छोड़कर संन्यास ले लिया और रात दिन भगवान विष्णु के नाम का जाप करते। एक दिन भ्रमण करते-करते धर्मवर्ण पितृ लोक पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि पितर बहुत कष्ट में हैं। पितरों ने उन्हें बताया कि उनकी ऐसी स्थिति उनके संन्यास लेने के चलते हुई है क्योंकि उस ब्राह्मण के अलावा उनका पिंडदान करने वाला कोई और नहीं है। पितरों ने उस ब्राह्मण से कहा कि वह वापस जाकर जाकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करें। संतान उत्पन्न करें और वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करें। तभी वे इन सभी कष्टों से मुक्ति पा पाएंगे। अपने पितरों की बात सुनकर धर्म वर्ण ने उन्हें वचन दिया कि वह उनकी बात मानेंगे और अपना वचन पूरा करेंगे। साथ ही, पूरी विधि-विधान से उनका पिंडदान करेंगे। इसके बाद धर्मवर्ण ने संन्यासी जीवन छोड़ दिया। उन्होंने एक बार फिर से सांसारिक जीवन को अपनाया और वैशाख अमावस्या पर विधि विधान से अपने पितरों के लिए पिंडदान कर किया और मुक्ति दिलाई, जिसके बाद से वैशाख अमावस्या पर पिंडदान का महत्व बढ़ गया।

वैशाख अमावस्या पर क्या करें

  • वैशाख अमावस्या के दिन फलाहारी व्रत रखना चाहिए। इससे संयम, शांति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
  • इस अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो नहाने के पानी में गंगाजल व तिल डालकर स्नान करें। ऐसा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए। इससे उन्हें पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
  • पितृ दोष निवारण के लिए वैशाख अमावस्या के दिन पितरों के नाम से गरीबों व जरूरतमंदों को भोजन करवाना चाहिए।
  • इस दिन स्नान करके सूर्य को जल में तिल डालकर जल अर्पित करना चाहिए।
  • वैशाख अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए।

वैशाख अमावस्या में क्या न करें

  • वैशाख अमावस्या की दोपहर सोना नहीं चाहिए और पूरे दिन भगवान के नाम का जा करना चाहिए।
  • इस दिन मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा, किसी भी तरह का नशा नहीं करना चाहिए।
  • भोग और विलासिता की चीज़ों से बचने का प्रयास करना चाहिए।
  • उड़द या इससे बनी कोई भी चीज खाने से बचें।
  • मांगलिक कार्य, शुभ कामों के लिए खरीदारी करने से बचें। 
  • इसके अलावा, इस दिन नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।

वैशाख अमावस्या पर करें ये ख़ास उपाय

वैशाख अमावस्या के दिन विशेष उपाय किए जाते हैं। अगर आप अपने जीवन में किसी चीज को लेकर परेशान हैं, तो वैशाख अमावस्या के दिन ये खास उपाय जरूर अपनाएं। यह उपाय इस प्रकार हैं:

आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए

यदि आप आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं और धन टिक नहीं रहा है तो वैशाख अमावस्या पर सत्तू व जल का दान करें। धार्मिक मान्यता है कि वैशाख माह में सत्तू का दान करने से व्यक्ति को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। साथ ही, पितृ दोष से भी छुटकारा मिलता है और जीवन सुखमय होता है।

बुरी शक्तियों से बचने के लिए

अगर आप बुरी शक्तियों व नकारात्मक ऊर्जा की वजह से परेशान हैं और आपका काम बनते बनते बिगड़ जाता है व आप इससे मुक्ति पाना चाहते हैं, तो वैशाख अमावस्या के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। सनातन धर्म में बताया गया है कि महामृत्युंजय मंत्र के जाप से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त सभी दुख दूर हो जाते हैं।

बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए

वैशाख अमावस्या के दिन जरूरतमंद और असहाय लोगों की मदद करें। साथ ही, उन्हें भोजन कराएं क्योंकि भोजन कराने से बड़ा पुण्य कुछ नहीं होता है। अतः अमावस्या के दिन अन्न दान अवश्य करें। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और विशेष आशीर्वाद देते हैं। साथ ही, बड़ी से बड़ी बीमारियों से भी निजात मिल जाता है।

पापों से मुक्ति के लिए

अमावस्या के दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा उपासना करने का विधान है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अमोघ फल की प्राप्ति होती है। इसके लिए अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करें या  गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु प्रतिमा सामने रखकर विधि-विधान से पूजा करें। साथ ही पवित्र सनातन ग्रंथ गीता के दूसरे अध्याय का पाठ करें। ऐसा करने से आप सभी पापों से मुक्ति हो जाएंगे।

कालसर्प दोष से बचने के लिए

अमावस्या के दिन कालसर्प दोष से बचने के लिए भी पूजा की जाती है। इसके लिए वैशाख अमावस्या के दिन चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें। इसके बाद नाग-नागिन को नदी में प्रवाहित करें। इस उपाय को करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. वैशाख माह की अमावस्या कब है?

उत्तर 1. 08 मई को वैशाख माह की अमावस्या है।

प्रश्न 2. अमावस्या का क्या महत्व है?

उत्तर 2. ज्योतिष के अनुसार, पितृ दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है।

प्रश्न 3. वैशाख अमावस्या पर क्या करें?

उत्तर 3.  अमावस्या के दिन स्नान, तर्पण,और दान करना विशेष फलदायी होता है

प्रश्न 4.  अमावस्या किसके लिए अच्छी है?

उत्तर 4. अमावस्या पितरों के तर्पण के लिए अच्छी मानी जाती है।