बुध का वक्री होना आम लोगों के लिए शुभ या अशुभ, जान लीजिये

बुध को सभी ग्रहों के बीच युवराज का दर्जा प्राप्त है। यह नौ ग्रहों में सबसे तेज गोचर करने वाले ग्रहों में से एक है। बुध किसी भी जातक की कुंडली में बुद्धि, हाजिरजवाब, गणित, व्यापार आदि का कारक होता है। ऐसे में बुध यदि कमजोर हो तो जातकों को वाणी संबंधी समस्याएं तो रहती ही हैं। इसके साथ-साथ कमजोर गणित और कमजोर आर्थिक स्थिति से भी वह जातक जूझता नजर आता है।

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चूंकि सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाला यह ग्रह अब अपनी वक्री चाल शुरू करने वाला है। ऐसे में हम आज आपको इस लेख में इस बात की जानकारी देने वाले हैं कि बुध ग्रह की वक्री चाल शुभ होती है या अशुभ। लेकिन उससे पहले वक्री बुध से जुड़ी कुछ खास जानकारी आपके साथ साझा कर देते हैं।

वक्री बुध कब और कहाँ

साल 2021 में बुध दूसरी बार वक्री होने जा रहा है। मई के महीने की 30 तारीख को दोपहर के 03 बजकर 47 मिनट पर बुध मिथुन राशि में वक्री हो जाएगा और फिर 23 जून, 2021 के दोपहर 02 बजकर 50 मिनट पर बुध वृषभ राशि में दोबारा मार्गी हो जाएंगे।

वक्री बुध के चरण

बुध के वक्री होने की प्रक्रिया पांच भागों या फिर कहें तो पांच चरणों में विभाजित है। इन पांच चरणों का देश-दुनिया पर अलग-अलग तरीके से असर पड़ता है। ऐसे में आइये उन पांच चरणों को जान लेते हैं। 

पहला चरण या फिर छाया चरण के पूर्व

इस चरण में बुध की चाल धीमी होनी शुरू हो जाती है। यह बुध के वक्री होने की शुरुआत होती है। इस अवधि में आम लोगों को फैसले लेने में दिक्कत आती है।

दूसरा चरण या फिर बुध वक्री दशा

यह बुध के वक्री होने का दूसरा चरण है। इसमें बुध वक्री होने से ठीक पहले एकदम स्थिर नजर आते हैं। इस अवधि को हिन्दू पंचांग में बैंगनी रंग का दिखाया जाता है।

तीसरा चरण या फिर बुध वक्री अवस्था

इस अवस्था में बुध अपनी वक्री चाल प्रारम्भ कर देता है और आम जन-जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। चूंकि बुध संचार का कारक होता है और आज के युग में लगभग हर इंसान कंप्यूटर या दूरभाष के जरिये एक दूसरे से संचार करता है या फिर इन पर काम करता है। ऐसे में बुध की इस अवस्था का प्रभाव दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी पर पड़ता है।

चौथा चरण या फिर बुध प्रत्यक्ष अवस्था

इस अवस्था में बुध की वक्री चाल पुनः धीमी हो जाती है। हिन्दू पंचांग में बुध की इस स्थिति को भूरे रंग से दर्शाया जाता है। 

पांचवी अवस्था या फिर छाया चरण के बाद

इस अवस्था में बुध मार्गी होना प्रारम्भ कर देता है। इस दौरान लोगों को ध्यान लगाने में दिक्कत महसूस होती है। किसी बात पर राय बनाने में कठिनाई महसूस होती है। साथ ही गलत फैसले लेने की आशंका भी बढ़ जाती है।

आइये अब देखते हैं कि वक्री बुध का आम जन-जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

वक्री बुध का प्रभाव : शुभ या अशुभ?

बुध के वक्री होने पर इसका शुभ या अशुभ प्रभाव पूरी तरह से जातकों की कुंडली में बुध के स्थान से तय होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में बुध शुभ स्थान पर मौजूद है तो ऐसे जातकों को बुध शुभ फल देंगे। यदि अशुभ स्थान पर बैठे हैं तो अशुभ फल देंगे।

आम तौर पर देखा जाता है कि जिन जातकों की कुंडली में बुध अशुभ फल देने की स्थिति में मौजूद रहते हैं। उन्हें वक्री बुध की इस अवधि में संवाद करने में दिक्कत महसूस होती है। या तो वे एकदम ही चुप हो जाते हैं या फिर जहां कुछ नहीं बोलने की भी जरूरत थी वहाँ भी बहुत कुछ बोल जाते हैं। निर्णय क्षमता प्रभावित होती है। खास कर के मीडिया, टेलीकम्यूनिकेशन, आदि के क्षेत्रों से जुड़े ऐसे जातकों को कार्यक्षेत्र में परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यापार में दिक्कतें आती हैं और आप उटपटांग फैसले लेने लगते हैं। चर्म रोग से जुड़ी समस्या परेशान करती है।

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हालांकि जिन जातकों की कुंडली में बुध शुभ फल देने की स्थिति में हो उनके लिए बुध का वक्री होना शुभ फल देता है। ऐसे जातक अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करते हैं और सराहना पाते हैं। व्यापार में विस्तार होने की संभावना बढ़ जाती है। वक्री बुध नवीनता का सूचक होता है। इस दौरान नयी योजनाएं बनाना शुभ होता है। किसी भी किए गए कार्य का पुनर्मूल्यांकन के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है। इसके साथ ही कागजी कार्यवाही और कर्ज़ चुकाने के लिए भी यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।

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