योगिनी एकादशी व्रत को रखने से होता है समस्त पापों का नाश!

जून के महीने में आने वाले कई व्रत-त्योहारों में से एक है योगिनी एकादशी का यह व्रत। इस व्रत के बारे में सभी जानकारी जानने के लिए इस लेख को पढ़ें, और यदि आप इस दिन से जुड़ी अन्य परंपराओं के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषी को कॉल करें। 

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आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस साल कोरोना के दौर में योगिनी एकादशी 17 जून, बुधवार को है। इस दिन श्री विष्णु के साथ-साथ पीपल के पेड़ की भी पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि विष्णु को समर्पित इस एकादशी के व्रत को रखने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही इस व्रत को रखने से सभी बीमारियाँ खत्म होती हैं और व्यक्ति को यश, सुन्दर रूप और गुण की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं योगिनी एकादशी के मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

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योगिनी एकादशी शुभ मुहूर्त

  योगिनी एकादशी पारणा मुहूर्त

एकादशी तिथि आरंभ: 16 जून प्रात: 5:40 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त: 17 जून सुबह 7:50 तक

पारणा मुहूर्त 

18 जून, को 05:23:14 से 08:10:52 तक     
अवधि 

2 घंटे 47 मिनट

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योगिनी एकादशी व्रत की कथा

प्राचीन काल में हेम नामक एक माली अलकापुरी नगर में राजा कुबेर के यहां रहता था। उसका काम हर दिन भगवान शंकर की पूजा के लिए मानसरोवर से फूल लाना था। एक दिन उसे किसी कारण से फूल लाने में बहुत देर हो गई और वह दरबार में बहुत देर से पहुंचा। कुबेर इस बात से बेहद क्रोधित हुए और हेम को उन्होंने कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। माली हेम श्राप के प्रभाव के चलते इधर-उधर भटकता रहता। एक दिन भटकते-भटकते वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। अपने योग बल से ऋषि ने उसका दुख  समझ लिया और उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा। इस व्रत के प्रभाव से हेम माली का कोढ़ी शरीर ठीक हो गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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योगिनी एकादशी व्रत व पूजा विधि 

योगिनी एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात से ही हो जाती है। व्रती को दशमी तिथि की रात से ही सादा भोजन ग्रहण करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन ज़रूर करना चाहिए। इसके अलावा, सोशल डिस्टन्सिंग को लेकर सरकारी दिशानिर्देश का पालन करें और पूजा करते समय बाहर जाने से बचें। यदि आवश्यक हो, तो ज़रूरी उपाय करें और सुरक्षित रहें।

  • प्रात:काल उठें और स्नानादि करने के बाद व्रत का संकल्प लेकर सूर्य देवता को जल चढ़ाएं। 
  • फिर पीले वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल को साफ़ कर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखकर उनकी पूजा करें। 
  • भगवान नारायण की मूर्ति को स्नानादि कराएं और उन्हें भोग लगायें। 
  • पीले फूल, धूप, दीप, तुलसी पत्ता और पंचामृत आदि अर्पित करें। 

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  • अब माँ लक्ष्मी और श्री हरि के मन्त्रों का जाप करें। दिन में योगिनी एकादशी की कथा ज़रुर सुने। 
  • इस दिन अन्न-वस्त्र का या जूते छाते का दान करना बहुत कल्याणकारी रहता है। 
  • पीपल के पेड़ की भी पूजा अवश्य करें।
  • व्रती केवल जल और फल ग्रहण करें 
  • रात्रि में जागरण करना भी ज़रूर करना चाहिए। 

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आशा करते हैं योगिनी एकादशी पर हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आयी होगी। एस्ट्रोसेज से जुड़े रहने के लिए आप सभी का धन्यवाद !