शुक्र गोचर विशेष : शुक्र गोचर से जुड़ी पांच जरूरी बात जो आपको जाननी चाहिए

28 मई 2021 को शुक्र गोचर होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से देखा जाये तो हर गोचर बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी से दुनिया के तमाम जीव जंतुओं की नियति तय होती है। इन ग्रहों का हमारे जीवन पर प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष रूप से जरूर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आज हम आपको शुक्र ग्रह के इस गोचर से जुड़ी पाँच बेहद महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं।

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वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह

वैदिक ज्योतिष के लिहाज से शुक्र एक बेहद ही शुभ ग्रह है। यह किसी भी जातक की कुंडली में भौतिक सुख और वैवाहिक जीवन का कारक होता है। शुक्र को सभी बारह राशियों में वृषभ और तुला राशि का स्वामित्व प्राप्त है। वहीं सभी 27 नक्षत्रों में भरणी, पूर्वा, फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र पर शुक्र का ही आधिपत्य है। मीन राशि में शुक्र उच्च का होता है और कन्या राशि में शुक्र नीच हो जाता है। सभी नौ ग्रहों के बीच बुध और शनि शुक्र के मित्र ग्रह माने जाते हैं जबकि सूर्य और चंद्रमा से शुक्र को बैर है। शुक्र एक राशि में लगभग 23 दिनों तक गोचर करते हैं।

शुक्र गोचर तिथि और समय

शुक्र का गोचर 28 मई, 2021 को रात के 11 बजकर 44 मिनट पर मिथुन राशि में हो रहा है और 22 जून, 2021 के दोपहर 02 बजकर 07 मिनट तक शुक्र मिथुन राशि में ही स्थित रहेंगे। इसके बाद वे कर्क राशि में गोचर करेंगे। 

शुक्र यदि कुंडली में शुभ फल दे

जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र शुभ स्थान पर स्थित हो उस जातक का जीवन भौतिक सुखों से परिपूर्ण होता है। ऐसे जातकों का वैवाहिक जीवन भी बेहद सुखद रहता है। शुक्र के बाली होने पर जातकों का रुझान कला और साहित्य की तरफ हो जाता है। ऐसे जातक सिनेमा, मीडिया, लेखन इत्यादि की तरफ ज्यादा झुकाव महसूस करते हैं।

आइये अब देखते हैं कि शुक्र यदि कुंडली में शुभ फल देने की स्थिति में हो तो जातकों को क्या फल देता है।

शुक्र यदि कुंडली में अशुभ फल दे

शुक्र यदि किसी जातक की कुंडली में अशुभ स्थान पर बैठा हो तो ऐसे जातक के जीवन में दरिद्रता आती है। जातक का वैवाहिक जीवन भी सुखद नहीं रहता और संतान उत्पन्न करने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है। ऐसे जातकों को किडनी और आँख संबंधी बीमारियां परेशान करती हैं। वहीं जिन महिलाओं की कुंडली में शुक्र कमजोर होता है उन्हें गर्भपात का दुख झेलना पड़ता है।

ऐसे में जिन जातकों की कुंडली में शुक्र कमजोर हो उन्हें शुक्र शांति के उपाय करने चाहिए। आइये अब शुक्र शांति के उपाय जान लेते हैं।

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शुक्र शांति के उपाय

  • शुक्र देवता को सफ़ेद रंग बेहद प्रिय है। ऐसे में जिन जातकों की कुंडली में शुक्र कमजोर स्थान पर बैठे हों। उन्हें शुक्र देवता को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन सफ़ेद या फिर गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें। 
  • मान्यता है कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। यही वजह है कि सनातन धर्म में गाय पूजनीय है। ऐसे में यदि आप शुक्र से पीड़ित हैं तो आपको प्रति दिन भोजन करने से पहले अपनी थाली से भोजन का एक हिस्सा अलग कर लेना चाहिए और इस हिस्से को किसी सफ़ेद गाय को खिला दें। इससे शुक्र की आप पर विशेष कृपा होगी।
  • शुक्र यदि कमजोर हो तो आप हीरा या ओपल जैसे रत्न धारण कर सकते हैं। लेकिन कोई भी रत्न धारण करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें।
  • दान करना सनातन धर्म में बहुत ही शुभ कार्य माना गया है। ऐसे में शुक्र देवता को समर्पित दिन यानी कि शुक्रवार के दिन किसी मंदिर जाकर दही, खीर, ज्वार, रंग-बिरंगे कपडे, चांदी ,चावल, इत्र इत्यादि का दान करें। शुक्र देवता अति प्रसन्न होंगे।
  • शुक्रवार का दिन शुक्र देवता के साथ-साथ माता लक्ष्मी को भी समर्पित होता है। ऐसे में आप शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी या माँ जगदम्बा की पूजा जरूर करें। साथ ही श्री सूक्त का पाठ भी करें। इससे शुक्र देवता आपको शुभ फल देंगे।
  • शुक्रवार के दिन व्रत रखें। अनाज न खाएं। नमक न खाएं। फलाहार पर रहें। शुक्र देव आप पर प्रसन्न होंगे।

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हम उम्मीद करते हैं कि शुक्र गोचर से जुड़ा हमारा यह लेख आपको जरूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ जरूर साझा करें। धन्यवाद!

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