षटतिला एकादशी 2022: इस दिन तिल का होता है विशेष महत्व, जानें नियम और शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में माघ महीने का हर एक दिन पवित्र माना जाता है और अगर दिन एकादशी का हो तो फिर क्या ही कहने। माघ माह एक बेहद ही पावन माह कहलाता है इसलिए इस महीने में पड़ने वाली एकादशी का भी विशेष महत्व बताया गया है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं।

अपने इस विशेष ब्लॉग में आज जानेंगे कि वर्ष 2022 में षटतिला एकादशी कब पड़ेगी? इस एकादशी का नाम षटतिला क्यों पड़ा? इस एकादशी तिथि का शुभ मुहूर्त क्या होता है? साथ ही इस दिन से जुड़ी अन्य रोचक और महत्वपूर्ण जानकारियां आपको इस लेख के माध्यम से प्रदान की जा रही हैं।

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षटतिला एकादशी 2022: तिथि और शुभ मुहूर्त

28 जनवरी, 2022 (शुक्रवार)

षटतिला एकादशी व्रत मुहूर्त

षटतिला एकादशी पारणा मुहूर्त: 07:11:09 से 09:20:27 तक 29, जनवरी को

अवधि: 2 घंटे 9 मिनट

जानकारी: ऊपर दिया गया मुहूर्त नई दिल्ली के लिए मान्य है। अपने शहर के अनुसार इस दिन का शुभ मुहूर्त जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

कैसे पड़ा इस एकादशी का नाम षटतिला एकादशी?

षटतिला का अर्थ होता है तिल को छह प्रकार से इस्तेमाल करना। यही वजह है कि इस एकादशी को षटतिला कहा जाता है। दरअसल माघ मास में शरद ऋतु जहां एक तरफ अपने चरम पर होती है वहीं धीरे-धीरे सर्दियां जाने लगती है। ऐसे में इस मौसम में तिल का महत्व कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि तिल सर्दियों को काटता है। इसीलिए इस दौरान स्नान, दान, तर्पण, आहार, इत्यादि में तिल का विशेष महत्व बताया गया है। 

मान्यता है कि इस दिन तिल का छह तरह से उपयोग किया जाता है जिसमें तिल से स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिलोदक करना, तिल का हवन करना, तिल से बने भोजन करना और तिल का दान करना महत्वपूर्ण बताए गए हैं।

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षटतिला एकादशी महत्व

षटतिला एकादशी के दिन तिल का विशेष महत्व होता है। जैसा कि हमने पहले भी बताया कि इस वर्ष षटतिला एकादशी का व्रत 28 जनवरी को किया जाएगा। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है और ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाले या एकादशी की पूजा करने वाले लोग इस दिन सुबह और शाम दोनों समय भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, इस एकादशी तिथि से संबंधित व्रत कथा पढ़ते और सुनते हैं, आरती करते हैं, और इस तरह से अपनी पूजा का समापन करते हैं।

षटतिला एकादशी को बहुत सी जगहों पर पाप हरणी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में महत्व और मतलब साफ है कि, यह एकादशी तिथि व्यक्ति के समस्त पापों का नाश करती है। षटतिला एकादशी के दिन आरती किए बिना इस दिन की पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसे में इस दिन आरती अवश्य करें।

पुराणों में षटतिला एकादशी के बारे में वर्णित है कि, इस व्रत को सच्ची श्रद्धा और भक्ति से करने से कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और स्वर्ण दान करने से कहीं ज्यादा फल एकमात्र षटतिला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मिल जाता है।

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षटतिला एकादशी 2022: व्रत के नियम

हिंदू धर्म में किए जाने वाले तमाम व्रत और त्योहारों का अलग-अलग नियम और कायदा होता है। ऐसे में बेहद आवश्यक हो जाता है कि यदि आप कोई व्रत करने जा रहे हैं तो पहले उस व्रत के नियम आदि जान लें और उसके अनुरूप ही व्रत का पालन करें। कहा जाता है नियम के साथ किया गया व्रत कई गुना फलदाई हो जाता है।

तो आइये जान लेते हैं षटतिला एकादशी व्रत के नियम क्या कुछ कहते हैं:

  • एकादशी व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है। ऐसे में दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तक व्रत का पालन किया जाता है। द्वादशी के दिन पारण के बाद व्रत पूरा होता है। 
  • दशमी तिथि को सूर्यास्त से पहले बिना प्याज, लहसुन का भोजन करना उत्तम रहता है। 
  • इस दिन रात में भगवान का ध्यान करके सोयें। इसके अलावा मुमकिन हो तो ज़मीन पर ही सोयें। 
  • सुबह उठकर स्नानादि करें और भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद विधिपूर्वक इस दिन की पूजा करें और षटतिला एकादशी व्रत की कथा भी पढ़ें। यदि मुमकिन हो तो दिन भर निराहार रहें और शाम के समय फलाहार करें। हालाँकि यदि आपको स्वास्थ्य संबंधित कोई भी परेशानी हो तो निराहार व्रत ना रहने की सलाह दी जाती है। 
  • एकादशी व्रत में ब्रह्माचार्य का बेहद महत्व बताया गया है। ऐसे में इस दिन ब्रम्हचर्य का पालन करें और किसी के बारे में भी ना ही गलत सोचें और ना ही किसी के बारे में कुछ गलत मांगे। 
  • द्वादशी तिथि पर स्नान करें। भगवान का पूजन करें। अपनी यथाशक्ति के अनुसार किसी योग्य  ब्राह्मण, किसी जरूरतमंद, किसी गरीब व्यक्ति को दान करें और उसके बाद अपने व्रत का पारण करें। 

भगवान विष्णु की कृपा से आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी और आपको षटतिला व्रत का शुभ परिणाम अवश्य मिलेगा।

षटतिला एकादशी के दिन कैसे किया जा सकता है तिल का प्रयोग?

जैसा कि हमने पहले बताया कि षटतिला एकादशी के दिन तिल का विशेष महत्व होता है और इस दिन तिल का छह तरह से प्रयोग करके आप इस दिन के फल को अपने जीवन में कई गुना बढ़ा सकते हैं। वहीं जान लेते हैं षटतिला एकादशी के दिन तिल का प्रयोग कैसे किया जा सकता है।

  • इस दिन स्नान करने की जल में तिल डालकर उससे स्नान करें। 
  • तिल का उबटन लगाएं। 
  • पूजा में भगवान को तिल अवश्य अर्पित करें। 
  • जल पीते समय उसमें थोड़ा सा तिल डाल लें और फिर उसे पियें।
  • इसके अलावा फलाहार करते समय तिल से बनी कोई मीठी वस्तु खाएं। 
  • षटतिला एकादशी के दिन हवन करते समय तिल का प्रयोग करें और पूजा के बाद तिल का दान करें। 

जानकारी के लिए बता दें कि तिल का प्रयोग करने के लिए जरूरी नहीं है कि आप षटतिला एकादशी का व्रत रहें। षटतिला एकादशी के दिन तिल का प्रयोग कोई भी व्यक्ति कर सकता है।

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षटतिला एकादशी: ये राशिनुसार उपाय दिलाएंगे भगवान विष्णु की असीम कृपा 

षटतिला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सुख-सौभाग्य, धन-धान्य में वृद्धि होती है। तो आइए जान लेते हैं कि षटतिला एकादशी के इस शुभ दिन पर इन सभी चीजों का लाभ प्राप्त करने के लिए आप अपनी राशि के अनुसार क्या कुछ उपाय कर सकते हैं।

  • मेष राशि: जीवन में धन धान्य की वृद्धि के लिए मंदिर में जाकर तिल का दान करें। इसके अलावा इस दिन भगवान विष्णु की घी के दीपक से आरती उतारें।
  • वृषभ राशि: सुख समृद्धि के लिए षटतिला एकादशी के दिन वृषभ राशि के जातक मिट्टी के बर्तन में तिल भरकर किसी ब्राह्मण को दान कर सकते हैं। इस दौरान आप उनका आशीर्वाद अवश्य लें।
  • मिथुन राशि: षटतिला एकादशी के दिन मिथुन राशि के जातक तिल और गुड़ के 11 लड्डू किसी मंदिर में दान कर दें। ऐसा करने से आपकी समस्त मनोकामनाएं अवश्य पूरी होगी।
  • कर्क राशि: कर्क राशि के जातक षटतिला एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद तुलसी के पौधे में तिल मिश्रित जल अर्पित करें और तुलसी का आशीर्वाद लें। इस उपाय को करने से आपको कार्य क्षेत्र में चौतरफा कामयाबी हासिल होगी।
  • सिंह राशि: षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की धूप दीप आदि से विधिवत पूजा करें और उन्हें तिल और उड़द दाल का भोग अवश्य लगाएं। इस उपाय को करने से सिंह राशि के जातकों के संतान के वैवाहिक जीवन में अपार खुशियां आएंगी।
  • कन्या राशि: षटतिला एकादशी के दिन कन्या राशि के जातक अपने घर में ही तिल से हवन करें। इस दौरान आप भगवान विष्णु के मंत्र बोलते रहें और 108 बार आहुति दें। इस उपाय को करने से आपके जीवन की हर एक परेशानी और बाधा अवश्य ही दूर होगी।
  • तुला राशि: तुला राशि के जातक षटतिला एकादशी के दिन विष्णु मंदिर में जाकर पीले रंग का कपड़ा दान करें। इस उपाय को करने से आपके बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लगने लगेगा और उन्हें सफलता अवश्य हासिल होगी।
  • वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जो जातक नौकरी में अच्छा लाभ कमाना चाहते हैं या अच्छी नौकरी प्राप्त करना चाहते हैं तो षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु के ‘ॐ माधवाय नमः’ मंत्र का 21 बार जप करें। इसके अलावा पिसे हुए तिल में शक्कर और घी मिलाकर भगवान विष्णु को भोग लगाएं। पूजा के बाद इस भोग को प्रसाद रूप में खुद भी ग्रहण करें।
  • धनु राशि: धनु राशि के जातक षटतिला एकादशी के दिन तिल मिश्रित थोड़ा सा जल भगवान विष्णु के समक्ष रखें और भगवान विष्णु की विधि पूर्वक पूजा करें। पूजा के बाद आप इस जल को घर के सभी सदस्यों को प्रसाद रूप में दें। ऐसा करने से आपके पूरे परिवार का स्वास्थ्य उत्तम बना रहेगा।
  • मकर राशि: मकर राशि के जातक अपने जीवन साथी के साथ अपने रिश्ते को खूबसूरत और मजबूत बनाए रखने के लिए षटतिला एकादशी के दिन छोटा उपाय यह कर सकते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु को तिल मिले हुए पंचामृत का भोग लगाएं और उन्हें एकाक्षी नारियल अर्पित करें।
  • कुम्भ राशि: षटतिला एकादशी के दिन स्नान से पहले शरीर पर तिल का उबटन लगायें और 20 मिनट बाद अपने स्नान के पानी में तिल मिलाकर उससे स्नान कर लें। इस दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करें। ऐसा करने से आप का सौंदर्य बना रहेगा।
  • मीन राशि: मीन राशि के जो जातक सरकारी नौकरी या सरकारी प्रतियोगिता में बैठने की तैयारी कर रहे हैं उन्हें सफलता प्राप्ति के लिए षटतिला एकादशी के दिन 11 तुलसीदल लेकर उस पर हल्दी का टीका लगाकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और फिर ये तुलसीदल भगवान विष्णु को अर्पित कर दें। इस उपाय को करने से आपको सफलता अवश्य होगी। (यहाँ इस बात का विशेष ध्यान रखें कि, तुलसी के पत्ते एकादशी तिथि पर न तोड़ें। आप चाहें तो एक दिन पहले से ही तुलसी के पत्ते तोड़ कर रख सकते हैं।) 

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