इस रक्षाबंधन भाई को राखी बांधते समय ज़रूर करें इस मंत्र का उच्चारण !

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार रक्षाबंधन का त्यौहार हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2020 में रक्षाबंधन का त्यौहार 3 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। इस त्यौहार को और भी खास बनाने के लिए एस्ट्रोसेज लाया है “रक्षाबंधन मेगा सेल”, जिसमें आप पाएंगे ढेरों ऑफर्स और बंपर छूट। ज़्यादा जानकरी के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें!

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रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र और ख़ुशियों के लिए प्रार्थना करती हैं। हम सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्म में कोई भी पवित्र कर्म बिना मंत्रों के पूरे नहीं माने जाते। तो चलिए आज इस लेख में आपको एक ऐसे पवित्र मंत्र के विषय में बताते हैं, जिसका उच्चारण बहनों को राखी बांधते समय ज़रूर करना चाहिए। 

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राखी बांधते समय इस मंत्र का करें उच्चारण

रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित होता है, जो न जानें कई सालों पहले से मनाया जाता है। इस त्यौहार का उल्लेख महाभारत, भविष्य पुराण और मुग़ल काल के इतिहास में भी देखने को मिलता है। रक्षाबंधन से जुड़ी एक पौराणिक कथा के विषय में हम आपको आगे अपने इस लेख में बताएंगे। फ़िलहाल इतिहास के पन्नों में कई जगहों पर यह ज़िक्र भी मिलता है कि जब भी किसी व्यक्ति की कलाई पर कोई भी रक्षा सूत्र बांधा जाए, तो उस समय जातक को नीचे बताये मंत्र का उच्चारण ज़रूर करना चाहिए। इससे व्यक्ति के सौभाग्य और आयु में वृद्धि होती है। 

अधिकांश लोग आज भी इसका विधिवत पालन करते हैं। रक्षाबंधन के त्यौहार में भी बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र(राखी) बांधती है। मान्यता है कि इस विशेष मंत्र का उच्चारण करते हुए यदि भाई की कलाई पर राखी बांधी जाए, तो इससे भाई-बहन का रिश्ता और भी मज़बूत होता है और भाई दीर्घायु होता है। चलिए जानते हैं इस दिव्य मंत्र के बारे में-

येन बद्धो बलि: राजा दानवेन्द्रो महाबल:!

तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल !!

इस मंत्र का अर्थ है कि जिस रक्षासूत्र से शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा महान बलि को बांधा गया था, उसी पवित्र सूत्र को मैं तुम्हारी कलाई पर बांधती हूं, जो तुम्हारी हमेशा रक्षा करेगा और हर विपरीत परिस्थिति से तुम्हें बचाएगा। 

भाई को रक्षा सूत्र बंधवाने के बाद बोलना चाहिए, कि जिस रक्षासूत्र से महान राजा दानवेन्द्र बलि को बांधा गया था, उस पवित्र सूत्र के बंधन की कसम खाता हूँ कि बहन, मैं तुम्हारी हर विपत्ति में, हर परेशानी में सदैव रक्षा करुंगा।

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द्रौपदी ने भी इस देवता को बाँधी थी राखी  

भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक कहे जाने वाले इस त्यौहार को प्राचीन काल से ही मनाया जाता है। इस पर्व के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं भी बताई गयी है। एक कहानी के अनुसार, महाभारत काल के समय में शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्री कृष्‍ण की एक उंगली कट गई थी। जब द्रौपदी की नज़र भगवान कृष्ण की कटी हुई उंगली से निकलने वाले खून पर पड़ी तो वो घबरा गई और जल्दी-जल्दी में तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर और श्री कृष्‍ण की उंगली पर उस कपड़े को बांध दिया जिससे खून का निकलना तुरंत ही बंद हो गया। ये घटना सावन के महीने की पूर्णिमा तिथि को ही घटी थी। ऐसा माना जाता है कि इस घटना के बाद से ही राखी बांधने की परंपरा की शुरुआत हुई और राखी का त्यौहार दुनियाभर में आज तक मनाया जाता है। 

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आशा करते हैं रक्षाबंधन के बारे में इस लेख में दी गई जानकारी आपको पसंद आयी होगी।

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