कुंडली में प्रेम योग, जानें हर बात | Kundali mein Prem Yog

कुंडली में बनने वाला प्रेम योग एक ऐसा ग्रह योग है, जो कुछ लोगों के लिए प्रेम रोग बन जाता है, जिसकी कोई दवा नहीं होती लेकिन वास्तव में यह एक ऐसा शुभ योग है जो आपके जीवन में प्रेम की बहार लेकर आता है और आपके जीवन को रंगीन बना देता है। आपको दुनिया की हर चीज से प्यार होने लगता है और आप खुद को एक अलग ही दुनिया में पाते हैं।

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यह एक अलग ही एहसास है और आप प्रेम का एहसास होने पर एक अलग ही इस स्थिति में आ जाते हैं। कई बार तो सुध बुध भी भूल जाते हैं और केवल अपने प्यार के बारे में ही सोचने लगते हैं। प्यार एक कोमल भावना है लेकिन क्या यह सभी को मिल पाता है या क्या सभी का प्यार सफल हो पाता है? तो इसका जवाब जानने के लिए आज आप इस लेख को पढ़ें। आपको हम कुंडली में बनने वाले प्रेम योग के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं।  

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प्रत्येक व्यक्ति का यही सपना होता है कि उसके जीवन में कोई ऐसा हो, जो केवल उसका हो। जो केवल उसी के बारे में सोचे, उसी के बारे में जाने और उसको खुश रखने की कोशिश करे। जब वह किसी मुसीबत में हो तो उसका साथ दे और जब खुशी का पल हो तो उसे भरपूर प्यार दे अर्थात अपने जीवन में प्रेम की तलाश हर किसी को होती है। किसी की यह तलाश बहुत जल्दी पूरी हो जाती है तो किसी को बहुत ज्यादा प्रयास करने पर भी प्रेम में सफलता नहीं मिलती। तो आखिर ऐसी कौन सी स्थितियां हैं, जिनमें आपको प्रेम प्राप्ति या प्रेम की प्राप्ति ना होना जैसी बातें हो सकती हैं, यह सब ज्योतिष के आधार पर समझा जा सकता है क्योंकि कुंडली में प्रेम योग ऐसी ही स्थिति के बारे में बताता है और यह भी बताता है कि क्या आपका प्यार सफल होगा अथवा निष्फल होगा। 

क्या आपकी कुंडली में बन रहे हैं राजयोग?

ज्योतिष के नजरिए से देखें तो अनेक ऐसे योग मिलते हैं, जिनमें व्यक्ति को विपरीत लिंगी के प्रति विशेष रूप से आकर्षण महसूस होता है और यही वह आकर्षण हैं, जो ईश्वर ने प्रदान किया है। इसी की वजह से दो लोग एक दूसरे की ओर खिंचे चले आते हैं और फिर धीरे-धीरे एक दूसरे की अच्छाई और बुराई को स्वीकार करते हुए सदा सदा के लिए एक दूसरे के बन जाते हैं। उनके लिए एक दूसरे की कमी भी मजबूती बन जाती है और वह किसी और की कोई भी बात सुनना और समझना भी नहीं चाहते क्योंकि वह प्यार के रंग में रंगे होते हैं। कुंडली में बनने वाले प्रेम योग उन्हें इस प्रेम पाश में बांधते हैं और एक दूसरे का मुरीद बना देते हैं। 

विशेष रूप से हर व्यक्ति की यही इच्छा होती है कि उसको जीवन में प्यार नसीब हो और जैसे ही उसके जीवन में अनुकूलता का वातावरण होता है, उसके जीवन में प्रेम का पदार्पण होता है और धीरे-धीरे वही प्रेम पुष्पित, पल्लवित और अंकुरित होने के बाद विकसित होने लगता है और फिर उसका विस्तार हो जाता है। कल तक जो व्यक्ति अनजान था, अचानक ही सबसे खास बन जाता है। यही प्रेम योग की खासियत है। किसी को यह प्यार अचानक से मिल जाता है तो किसी को समय लगता है यह समझने में कि उसे प्यार हुआ है। कभी एक दूसरे की बातों से, कभी एक-दूसरे के इशारों से, कभी अच्छा और लंबा वक्त एक दूसरे के साथ बिताने से और कभी अचानक ही किसी यात्रा के दौरान मिल जाने से आपको किसी के प्रति आकर्षण महसूस हो सकता है। 

हालांकि आकर्षण और प्रेम में बड़ा अंतर है। आकर्षण जहां केवल कुछ समय के लिए या फिर किसी खास वजह से भी हो सकता है तो प्रेम दिल की एक निश्चल भावना है, जो व्यक्ति से हो जाता है और भले ही उस व्यक्ति में कितनी भी कमियां हों लेकिन वह व्यक्ति आपके लिए विशेष बन जाता है। फिर प्यार में वही सब कुछ कि एक दूसरे से घंटों बातें करना, एक दूसरे से रूठना, नाराज होना, फिर मनाने लगना, साथ में घूमने फिरने जाना, पार्टी करना, तोहफे लाना और अपने भविष्य के सपने सजाना, यह सभी बातें प्रेम संबंधों में डूबे जातक भली-भांति समझ सकते हैं। 

कुछ लोगों के जीवन में तो यह प्यार बहुत जल्दी आ जाता है और कुछ को कोशिश करने के बाद मिलता है लेकिन कुछ लोगों की लाख कोशिशों के बाद भी उनके जीवन में नीरसता बनी रहती है और वह चाहे कितनी ही कोशिश कर लें, उनके जीवन की बंजर जमीन पर प्यार  का बीज कभी अंकुरित नहीं हो पाता है और वह अपने जीवन में सूनापन, अकेलापन और उदासी महसूस करते हैं और धीरे-धीरे हताश होने लगते हैं। उन्हें लगता है कि उनका कोई अपना नहीं है और इसकी वजह से उनका आत्मविश्वास भी डगमगाने लगता है। 

वैदिक ज्योतिष के अंदर विशेष ग्रह योग और उनको की दशाएं व्यक्ति के जीवन में प्रेम के फल को प्रदान करती हैं और कुछ विशेष दशाएं प्रेम के अंकुर को नष्ट कर देती हैं, जिसकी वजह से कुछ लोगों को जीवन में प्यार मिल जाता है और कुछ सदा सदा के लिए अकेले हो जाते हैं इसलिए उन ग्रह योगों और कुंडली में बनने वाले प्रेम योग का अध्ययन यह बता सकता है कि आपको जीवन में प्रेम मिलेगा अथवा नहीं और अगर मिलेगा तो किस ग्रह की दशा होगी, जब आपको अपने प्रियतम से मिलने का सौभाग्य प्राप्त होगा। तो आइए जानते हैं कुंडली में बनने वाले प्रेम योग को।

कुंडली में प्रेम योग (Kundali mein Prem Yog) 

यदि कुंडली की बात की जाए और कुंडली में बनने वाले प्रेम योग को समझना हो तो सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि वह कौन सा ग्रह है, जो इसके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है तो यहां हम बताना चाहेंगे कि कुंडली में “शुक्र ग्रह (Planet Venus) अच्छी स्थिति में होना एक सफल प्यार की निशानी को बताता है और यदि आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह सही स्थिति में विराजमान हैं तो आपको जीवन में प्यार अवश्य मिल सकता है। 

चंद्रमा (The Moon) आपकी कल्पनाशीलता को बढ़ाता है और आपको जीवन में किसी साथी की जरूरत महसूस कराता है। यह आपके मन पर नियंत्रण रखता है, जो कि प्रेम के लिए अत्यंत आवश्यक है इसलिए शुक्र के साथ चंद्रमा की अच्छी स्थिति होना भी प्रेम संबंधों के लिए आवश्यक होता है और इससे व्यक्ति अपने प्रेम जीवन को एक दिशा देने में कामयाब हो सकता है। 

मंगल ग्रह (Planet Mars) ऊर्जा प्रदान करने वाला ग्रह है और जीवन में किसी भी काम को करने के लिए हमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। जब आप किसी को पसंद करते हैं तो आपके लिए यह आवश्यक है कि आप उनसे अपने दिल की बात कहें। यह साहस आपको मंगल ग्रह ही प्रदान करता है। वरना ऐसे प्यार का तो कोई फायदा ही नहीं कि आप अपने मन में प्यार करते रहें और जिन से प्यार करते हैं, उन्हें इसका पता ही ना चले और आपके सामने ही कोई और उन्हें प्रपोज कर दे और आप देखते रह जाएं, इसलिए मंगल ग्रह का भी इसमें बहुत बड़ा योगदान है। 

कुंडली का पंचम भाव (Fifth House of the Birthchart) हमारी भाव भंगिमा और हमारे रुझान को बताता है। यह हमारी बुद्धि और विवेक का भाव भी है तो यहीं से हमारे प्रेम संबंधों के बारे में जानकारी मिलती है। यदि आपका प्रेम भाव अर्थात पंचम भाव शुभ ग्रहों के प्रभाव में है तो आपके जीवन में प्रेम की गंगा बहती है और आपको उस गंगा में डुबकी लगाने का मौका अवश्य मिलेगा लेकिन यदि पंचम भाव और पंचम भाव के स्वामी कमजोर स्थिति में हैं अथवा पीड़ित हैं अथवा उन पर पाप ग्रहों का अधिक प्रभाव है तो व्यक्ति के जीवन में कई बार प्रेम आता ही नहीं है और कई बार आने के बाद भी चला जाता है और उनका प्यार निष्फल हो जाता है। यह सब कुछ ग्रह जनित स्थितियों पर ही निर्भर करता है। 

इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि कुंडली में शुक्र, चंद्रमा, मंगल और पंचम भाव और पंचमेश यदि अच्छी और शुभ स्थिति का निर्माण कर रहे हैं तो इन ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशा के दौरान व्यक्ति के जीवन में प्रेम का पदार्पण होगा। उसके जीवन में कोई खास व्यक्ति दस्तक देगा, जो बहुत जल्दी उसका अपना बन जाएगा और वह उसको इतना प्यार करेगा कि जातक काफी स्नेह महसूस करेगा और उनके साथ ही सदा जिंदगी बिताने के बारे में सोचेगा। इसी आधार पर कुंडली में प्रेम योग का निर्माण होता है। 

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कब मिलेगा प्यार

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि जब कुंडली में शुक्र, चंद्रमा और मंगल से संबंधित दशाएं अनुकूल स्थिति में आती हैं तो व्यक्ति के जीवन में प्रेम आता है। इन ग्रहों के कारण ही प्रेम परवान चढ़ता है और आप किसी को दिल से चाहने लगते हैं। यदि वैदिक ज्योतिष की बात करें तो ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को और साथ में चंद्र देव को स्त्री संज्ञक माना गया है जबकि मंगल देव को पुरुष ग्रह की संज्ञा दी गई है। शुक्र और मंगल यदि कुंडली में एक साथ स्थित हो अथवा एक दूसरे के नक्षत्र में स्थित हों या फिर एक दूसरे से किसी भी प्रकार का संबंध बना रहे हों तो जब इन ग्रहों की दशाएं कुंडली में आती हैं तो जातक को प्रेम होता है और उनका कोई रिश्ता शुरू होता है तथा वह व्यक्ति प्रेम के सागर में डुबकी लेने लगता है।  

शुक्र ग्रह अनुकूल होने पर व्यक्ति को अपने साथी के प्रति आकर्षण भी महसूस होता है और मंगल के साथ होने के कारण भोग, विलास और आनंद आदि में उसे काफी अच्छा महसूस होता है। पंचम भाव का स्वामी भी यदि अच्छी स्थिति में है तो उसकी दशा और अंतर्दशा में जातक को प्यार होता है और यदि पंचम भाव का संबंध सप्तम भाव से बन जाए तो व्यक्ति लंबे समय तक उस रिश्ते में रह सकता है और समय आने पर उस व्यक्ति से विवाह करके सारी जिंदगी उसके साथ रहने का संकल्प भी ले सकता है। यदि शुक्र ग्रह पंचम भाव में हो अथवा पंचम भाव पर उसकी दृष्टि हो तो जातक को जीवन में प्रेम मिलने की अच्छी संभावनाएं होती हैं। इसके अतिरिक्त शुक्र और चंद्रमा एक दूसरे के साथ ही युति सम्बन्ध में हों अथवा उनके बीच राशि परिवर्तन हो अथवा दृष्टि संबंध में हो तो भी इनकी दशाएं प्यार की कोमल भावनाओं को उत्पन्न करके उन्हें आगे बढ़ाने वाली होते हैं। 

कुंडली में पंचम भाव और एकादश भावों के स्वामियों का आपस में अच्छा संबंध होना प्रेम जीवन में सफलता का परिचायक होता है और जब इनकी दशाएं आती है तो व्यक्ति के जीवन में प्यार की बहार लौट आती है। इस प्रकार यह ग्रह अपनी दशा – अंतर्दशा में जातक के जीवन को प्रभावित करते हैं और उसके जीवन में प्रेम की गंगा बहाते हैं। 

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किस कुंडली में प्रेम योग सफल नहीं होता

वर्तमान समय में दिल टूटना सबसे दुखी कर देने वाली घटना है। एक बार को आप बीमार हो जाएं तो उसका इलाज किया जा सकता है लेकिन यदि आपका दिल टूट जाए तो बहुत समय तक उसकी चोट रहती है। वह चोट दिखाई तो नहीं देती लेकिन आपको अंदर तक तोड़ कर रख सकती है और उससे आप जीवन जीने की सभी जरूरतों से पीछे भी हट सकते हैं और कई बार तो डिप्रेशन में भी जा सकते हैं इसलिए कोई नहीं चाहता कि आप का दिल टूट जाए या कोई आपको धोखा दे दे लेकिन ज्योतिष शास्त्र इस बात से भी पर्दा उठाता है कि कुछ ऐसी खास स्थितियां होती हैं, जो यदि किसी जातक की कुंडली में मौजूद हैं तो उन्हें प्रेम जीवन में धोखा भी प्राप्त हो सकता है और उनका दिल भी टूट सकता है। 

ऐसी ग्रह स्थितियों के कारण प्रेम जीवन में समस्याओं का अंबार लग जाता है और व्यक्ति परेशान हुआ घूमता है और उसकी हालत देवदास जैसी हो जाती है। कई बार वह सोचने लगता है कि मेरी ही कोई गलती होगी जिसकी वजह से ऐसा हुआ जबकि वास्तविकता इससे भिन्न भी होती है। कई बार उसे सामने वाला व्यक्ति धोखा देता है लेकिन कुंडली के ग्रह बता देते हैं कि आपका प्रेम सफल होगा अथवा नहीं अथवा आपका दिल टूटेगा या उस को सुकून मिलेगा। जिस प्रकार शुक्र और मंगल की परिस्थिति जीवन में प्रेम और आकर्षण को बढ़ाने वाली मानी जाती है लेकिन यदि उसके ऊपर शनि ग्रह का प्रभाव आ जाए या केतु ग्रह की स्थिति का निर्माण हो तो जातक के प्रेम जीवन में समस्याएं आ जाती हैं। उन दोनों के बीच लड़ाई झगड़े होना, यहां तक कि रिश्ता टूटने की नौबत भी आ जाती है। 

इसके अतिरिक्त कुंडली में शुक्र और चंद्रमा की स्थिति भी प्रेम योग का निर्माण करती है लेकिन यदि इनके साथ शनि देव स्थित हो जाएं या इन पर शनि ग्रह की दृष्टि हो तो यह भी प्रेम योग को दूषित कर देती है क्योंकि चंद्रमा का शनि के साथ मिलन विष योग बनाता है और शुक्र के साथ शनि की स्थिति साथी से वियोग को दर्शाती है। ऐसी स्थिति होने पर व्यक्ति अपने पसंदीदा साथी से मनमुटाव का सामना करता है और छोटी छोटी बातें धीरे-धीरे बड़ी होकर अपने साथी को खो बैठता है और उसके जीवन से प्यार चला जाता है। 

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कुंडली में लव मैरिज के योग ( Kundali mein Love Marriage ke Yog)

ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत यह पता लग जाता है कि किसी जातक का विवाह प्रेम विवाह होगा अथवा पारंपरिक विवाह। ग्रहों का परस्पर संयोग इस बात की ओर इशारा स्पष्ट रूप से दे देता है। विवाह योग्य उम्र में आपकी कौन से ग्रहों की दशाएं चल रही हैं, वे भी इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आपकी लव मैरिज होगी या फिर अरेंज मैरिज। जब भी हम किसी को प्रेम करते हैं तो हमारे मन में यही इच्छा होती है कि यही व्यक्ति हमारा जीवन साथी बने और इस वजह से कई बार तो उनकी बात को उनके परिवार वालों द्वारा भी स्वीकार कर लिया जाता है लेकिन कई बार उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ता है जिसकी वजह से कई बार उनका भरोसा भी उठ जाता है और कई बार वे कामयाब भी हो जाते हैं। 

  • यदि ज्योतिष के आईने से बात करें तो ग्रहों की कुछ विशेष स्थितियां कुंडली में प्रेम विवाह की ओर स्पष्ट इशारा करती हैं। कुंडली का सप्तम भाव लंबी चलने वाली साझेदारी और विवाह का भाव भी माना जाता है। यदि कुंडली के पंचम भाव और सप्तम भाव के मध्य आपसी संबंध बन जाए तो व्यक्ति को प्रेम विवाह करने में आसानी होती है। इसके अतिरिक्त पंचम भाव का स्वामी यदि सप्तम भाव में स्थित हो अथवा सप्तम भाव का स्वामी पंचम भाव में स्थित हो तो भी प्रेम विवाह होना संभव हो सकता है। 
  • कुंडली में राहु और शुक्र की एक साथ उपस्थिति होना विशेष रुप से पंचम, एकादश या सप्तम भाव में होना प्रेम विवाह का एक स्पष्ट इशारा होता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार मंगल और शुक्र का लग्न अथवा सप्तम में बैठना भी प्रेम विवाह को जन्म दे सकता है। 
  • यदि कुंडली का पंचम भाव और सप्तम भाव बहुत अच्छे से संभला हुआ है अर्थात उन पर किसी भी पाप ग्रह या अशुभ ग्रह का प्रभाव नहीं है और इन भावों पर शुक्र और चंद्रमा जैसे ग्रहों की स्थिति है तथा मंगल उसमें उत्प्रेरक का काम कर रहा है तो प्रेम विवाह अवश्य ही हो जाता है।
  • शुक्र और चंद्रमा का एक साथ बैठना या एक दूसरे को दृष्टि देना या एक दूसरे से राशि परिवर्तन में होना भी प्रेम विवाह का कारण बन जाता है। 
  • इसके अतिरिक्त  प्रेम का मुख्य कारक शुक्र ग्रह होने के कारण यदि शुक्र ग्रह का संबंध जातक की कुंडली में उसके लग्न भाव, पंचम भाव, सप्तम भाव अथवा एकादश भाव से हो जाए तो व्यक्ति प्रेम की भावना से युक्त होता है और प्रेम विवाह की ओर अग्रसर होता है। 
  • कुंडली के पंचम भाव का संबंध यदि नवम भाव से हो तो भी प्रेम विवाह की संभावना बढ़ जाती है और यह माना जाता है कि इन दोनों व्यक्तियों के मध्य पूर्व जन्म का प्रेम ऋण बकाया होने के कारण यह वर्तमान जीवन में प्रेमी प्रेमिका बन कर जन्म लेते हैं और एक दूसरे से प्रेम विवाह करके सदा सदा के लिए एक दूसरे के हो जाते हैं। 
  • इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कुंडली के लग्न भाव, पंचम भाव, सप्तम भाव तथा एकादश भाव पर शुक्र, चंद्रमा और मंगल का प्रभाव जातक को प्रेम विवाह की दिशा में लेकर जाता है। 
  • वर्तमान समय में राहु और शुक्र की स्थिति के कारण भी अनेक प्रेम विवाह होते हुए देखे जाते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है कि राहु के तीनों नक्षत्र काम त्रिकोण के अंतर्गत आते हैं और शुक्र के साथ स्थित होकर वह प्रेम के लिए जातक को कुछ भी कर गुजरने को तैयार बनाता है। 
  • शुक्र और मंगल की युति आकर्षण के बाद प्रेम को बढ़ाती है। जहां मंगल ऊर्जा देता है, वहीं शुक्र प्यार की भावना को बढ़ावा देता है। इस प्रकार जातक और जातिका एक दूसरे से परस्पर शारीरिक आकर्षण में बंध कर प्रेम विवाह की ओर अग्रसर हो जाते हैं। 
  • यदि कुंडली के लग्न भाव के स्वामी अर्थात लग्न का संबंध पंचम भाव से हो और पंचम भाव का स्वामी सप्तम भाव से संबंध बनाए तो प्रेम विवाह होने की अच्छी संभावना बनती है और वह काफी लंबे समय तक चलता भी है। यदि शुक्र और मंगल की युति शुक्र की राशि में हो तो भी प्रेम विवाह संभव हो सकता है। 
  • यदि शुक्र ग्रह और चन्द्रमा पंचमेश व सप्तमेश होकर एक दूसरे के भाव में स्थित हों और लग्न से संबंध बनाएं तो लग्न और त्रिकोण के भाव का संबंध होने पर भी व्यक्ति का प्रेम विवाह होता है।
  • यदि जन्म कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी लग्न भाव के स्वामी से अधिक बलशाली हो और वह शुभ ग्रह के नवांश में स्थित हो तो जातक जिस से प्रेम विवाह करता है, वह स्वयं से उच्च कुल का व्यक्ति होता है। 
  • यदि जन्म कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी कमजोर अवस्था में है और यदि वह अस्त है अथवा नवांश कुंडली में वह नीच राशि में स्थित है तो ऐसा भी देखा जाता है कि व्यक्ति अपने कुल से निम्न कुल में विवाह करता है। 
  • यदि कुंडली में सप्तमेश और पंचमेश एक दूसरे के नक्षत्रों में स्थित हों तो भी प्रेम विवाह का योग बन सकता है। 
  • पंचम भाव और सप्तम भाव के स्वामी यदि पंचम भाव, एकादश भाव, लग्न भाव या सप्तम भाव में युति कर रहे हों तो यह भी प्रेम संबंधों को मजबूती देता है और प्रेम विवाह की स्थिति बना देता है। इस स्थिति में जातक का प्रेम विवाह लंबे समय तक चलता है। 
  • यदि शुक्र पंचम भाव को देख रहा हो अथवा चंद्रमा पर शुक्र की दृष्टि हो तो ऐसा प्यार चुपके चुपके शुरू होता है और फिर धीरे-धीरे परवान चढ़ता है। 
  • पंचम भाव प्रेम और भावनाओं का भाव है तो एकादश भाव महत्वाकांक्षा और उनकी पूर्ति का भाव है। यदि पंचमेश और एकादशेश एक साथ कुंडली में संयुक्त हों तो प्रबल प्रेम योग बनता है। 
  • यदि राहु का संबंध पंचम या सप्तम भाव से हो अथवा वह शुक्र से संयुक्त हो तो प्रेम विवाह की स्थिति का निर्माण करता है। ऐसा विवाह अंतरजातीय विवाह हो सकता है। 
  • यदि पंचम अथवा सप्तम भाव में स्वराशि का मंगल शुक्र के साथ स्थित हो तो प्रेम  को विवाह के रूप में बदलने में मदद करता है लेकिन विवाह के बाद ज्यादा लंबे समय तक साथ देने में समस्या आती है।  

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 कुंडली में प्रेम योग की असफलता का कारण

कुंडली में प्रेम होना और उसका सफल ना होना सबसे ज्यादा कष्टदायक होता है। इसके अतिरिक्त कई बार जिससे आप प्रेम करते हैं, उनसे आप विवाह तो कर लेते हैं लेकिन बाद में उनके साथ निभा पाने में समस्या आती है, तब आपको और ज्यादा कष्ट होता है। आइए जानते हैं कि ऐसी कौन सी स्थितियां हैं, जिनमें आपके प्रेम में बाधाएं आती हैं और प्रेम असफल हो सकता है। 

  • यदि कुंडली में प्रेम विवाह का योग हो लेकिन शुक्र ग्रह अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो अथवा प्रबल पाप कर्तरी योग में स्थित हो तो प्रेम विवाह होने में समस्याएं आती हैं अथवा विवाह होने के उपरांत भी विवाह चलने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
  • यदि उपरोक्त में से कोई भी प्रेम विवाह का योग कुंडली में बना हुआ है लेकिन सप्तम भाव पाप कर्तरी योग में अथवा अशुभ ग्रहों की दृष्टि या संबंध से युक्त है तो प्रेम विवाह में अत्यधिक समस्याएं आती हैं और विवाह बड़े विलंब से होता है। विवाह होने के बाद भी जातक जातिका को उस विवाह को चलाने के लिए बहुत प्रयास करने पड़ते हैं। 
  • यदि जातक की कुंडली में पंचम भाव का स्वामी अष्टम भाव में जाकर नीच राशि में चला जाए तो व्यक्ति को अपने पूर्व जन्म के कर्मों के कारण प्रेम संबंधों में धोखा अथवा समस्या होती है और प्रेम विवाह हो नहीं पाता है। यदि  कुंडली में अन्य योगों के कारण प्रेम विवाह संभव हो भी जाए तो जातक को जीवनसाथी से सुख नहीं मिलता है। 
  • किसी जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह अर्थात प्रेम का कारक ग्रह कुंडली के लग्न भाव से छठे भाव में, आठवें भाव में अथवा बारहवें भाव में हो तो प्रेम की संभावनाएं तो हो जाती हैं लेकिन प्रेम विवाह नहीं हो पाता है। यदि किसी कारणवश प्रेम हो भी जाए तो प्रेम  विवाह के बाद भी समस्याएं बनी रहती हैं। 
  • यदि कुंडली के सप्तम भाव में उच्च राशि का शुक्र स्थित हो अथवा शुक्र के साथ राहु स्थित हो तो जातक प्रेम विवाह तो कर लेता है लेकिन उसके बाद विवाहेत्तर संबंधों के कारण उसका विवाह असफल हो जाता है। 
  • यदि किसी जातक की कुंडली में पंचम भाव का स्वामी और सप्तम भाव का स्वामी छठे भाव, आठवें भाव या बारहवें भाव में बैठ जाएं और उन पर पाप ग्रहों का प्रभाव हो तथा शुभ ग्रह की कोई दृष्टि अच्छा संबंध ना हो तो लव लाइफ में बाधा आती है। अर्थात प्रेम संबंधों में टूटन आ सकती है और उन्हें जीवन में अपने प्यार की कुर्बानी देनी पड़ सकती है। 
  • यदि कुंडली के एकादश भाव में अर्थात प्राप्ति और महत्वाकांक्षाओं के भाव में पाप ग्रह मजबूत स्थिति में विराजमान हों तो भी प्रेम विवाह होने में समस्याएं आती हैं और प्रेमी  सदैव के लिए मिल नहीं पाते हैं। 
  • इसके अतिरिक्त यदि लड़का और लड़की के मध्य परस्पर कुंडली देखने पर किसी एक की कुंडली में राहु स्थित राशि में दूसरे का शुक्र स्थित हो तो विवाह विच्छेद होने अथवा यौन रोग के कारण विवाह विच्छेद होने के योग भी बन जाते हैं। 

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इस प्रकार हम ज्योतिष शास्त्र की मदद से ग्रहों की स्थितियों के आधार पर इस बात का अनुमान लगा लेते हैं कि किस व्यक्ति के जीवन में प्रेम होगा और किस व्यक्ति को प्रेम के लिए तरसना पड़ेगा। किसी का प्रेम विवाह सफल होगा और किसके प्रेम विवाह में समस्याएं आएंगी। वास्तव में सही कहा गया है – हर किसी को नहीं मिलता, यहां प्यार जिंदगी में।  खुशनसीब हैं वो जिनको है मिली ये बहार जिंदगी में।  

आचार्य मृगांक शर्मा से फोन/चैट पर जुड़ें

कुंडली में प्रेम योग को मजबूत बनाने के उपाय

यदि आपकी कुंडली में प्रेम योग कमजोर है या आपको प्रेम विवाह करने में समस्या आ रही है या फिर आप जिन्हें प्यार करते हैं, उनसे आप की नहीं बनती तो आपको कुछ विशेष उपाय करने चाहिए, जिनसे आप के मध्य प्रेम की वृद्धि हो और आप प्रेम विवाह करने में भी सफल हो जाएं। 

  • अपनी कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत करें। इसके लिए यह जानकर कि शुक्र कुंडली के लिए शुभ अथवा अशुभ ग्रह है, उसका दान और मंत्र जाप किया जा सकता है। 
  • जीवन में प्रेम की वृद्धि के लिए आप रोज क्वार्ट्ज स्टोन की अंगूठी, ब्रेसलेट या पेंडेंट भी धारण कर सकते हैं। 
  • अपनी कुंडली के पंचम भाव के स्वामी को जानकर उस को मजबूत करने से भी आपको प्रेम संबंधों में सफलता मिल सकती है। 
  • पंचम भाव के साथ साथ सप्तम भाव के स्वामी को मजबूती देने से आपका प्रेम विवाह संभव हो सकता है। 
  • सोमवार के दिन शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और पार्वती माता के मध्य कलावे से गठबंधन करके शीघ्र विवाह की कामना करें तो मनपसंद जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। 
  • कन्याओं को मनपसंद जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए मंगला गौरी व्रत करना चाहिए।
  • राधा कृष्ण की उपासना करने से भी प्रेम संबंध मजबूत होते हैं।  
  • इसके अतिरिक्त किसी विद्वान ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाकर उनके द्वारा बताए गए उपाय करने से भी आप अपने प्रेम जीवन को मजबूत बना सकते हैं। 

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