हर तरह के तनाव की वजह हैं ये ग्रह, जानें इसके निवारण के ज्योतिषीय उपाय

ज़िंदगी में बढ़ती भाग-दौड़ के साथ लोगों के जीवन जीने का तरीका तो बेहतर हुआ लेकिन इसके बदले में मनुष्य ने बहुत कुछ गंवाया भी है। खास कर मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से यह भाग दौड़ और व्यस्त ज़िंदगी आम लोगों के लिए काफी तनाव भरा साबित होता है। मानो तनाव पहले से कम था कि, 2020 में कोरोना ने हमारे जीवन में दस्तक देकर इस तनाव को और भी कई गुना बढ़ाने का काम कर दिया है।

कोरोना के बाद से लोगों को नौकरी, स्वास्थ्य अपने भविष्य इत्यादि का तनाव होने लगा है। लोग अकेले रहने को मजबूर हुए हैं, उन्होंने अपने किसी खास को गंवाया है, खौफ और डर हमेशा हावी रहा और इन सब ने मानसिक तनाव की स्थिति को बद से बदतर करने में अहम भूमिका निभाई।

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जाहिर है कि मानसिक तनाव से पीड़ित व्यक्ति को अपने कार्य पर ध्यान लगाने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसके अलावे मानसिक तनाव मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। अनिद्रा और बेचैनी की वजह से भोजन भी कम हो जाता है। पसंदीदा गतिविधियों से भी मन उचटने लगता है और स्वभाव में भी बेरुखी आ जाती है जिसकी वजह से भाषा भी तल्ख़ होने लगती है जो कि कभी-कभी अच्छे भले रिश्ते में भी खटास लाने की वजह बन जाता है। कुल मिला कर बात ये है कि स्वस्थ मन से ही स्वस्थ तन का आधार बनता है। यही वजह है कि मानसिक स्वास्थ्य मनुष्य जीवन का एक प्रमुख हिस्सा है जिस पर शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही ध्यान देने की जरूरत है।

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ऐसे में आज हम आपको इस लेख में मानसिक तनाव को दूर करने के ऐसे ज्योतिषीय उपाय बताने वाले हैं जिन्हें अपनाकर आप रोज़मर्रा के जीवन में अकारण होने वाले तनाव से खुद को बचा सकते हैं। 

मानसिक तनाव और ज्योतिष शास्त्र

चूंकि ज्योतिष शास्त्र मानता है कि मनुष्य के वर्तमान और भविष्य में घट रही या घटने वाली हरेक घटना ग्रहों की चाल व स्थिति पर निर्भर करती है। ऐसे में मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य पर भी भी ग्रहों के गोचर और स्थिति का बहुत प्रभाव पड़ता है। कई ऐसे ग्रह हैं जिनके कमजोर होने की स्थिति में मनुष्य को मानसिक तनाव से दो-चार होना पड़ता है। आइये जानते हैं उन ग्रहों का आपके मानसिक स्वास्थ्य पर असर और उसके उपाय।

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सूर्य

सूर्य को सभी ग्रहों के बीच राजा का दर्जा प्राप्त है। सूर्य प्रत्यक्ष हैं, सूर्य पूजनीय हैं और सभी प्राणियों के आत्मा स्वरूप माने जाते हैं। ऐसे में कभी-कभी आपको ऐसा महसूस होता होगा कि अचानक ही आपके आत्मविश्वास में कमी आ गयी है। कार्यक्षेत्र में अधिकारी आपसे खुश नहीं रह रहे हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद भी आप ध्यान लगाने में सक्षम नहीं रह पा रहे हैं और साथ ही सिर में भारीपन सा भी महसूस होता रहता है। तो ऐसी स्थिति में संभव है कि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में मौजूद हो। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब-जब सूर्य लग्न या सप्तम भाव से गोचर करे या फिर अपनी नीच राशि तुला में मौजूद रहे तब-तब ऐसी स्थिति का सामना जातकों को करना पड़ सकता है। 

सूर्य शांति का उपाय

ऐसे में जातकों को सूर्य को शांत और उसके नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर तांबे के बर्तन में जल, रोली, चावल और लाल पुष्प मिलकर सूर्य देवता को “ॐ घृणि: सूर्याय नमः” का जाप करते हुए जल अर्पित करना चाहिए। इससे जातकों का मानसिक तनाव कम होगा।

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बुध

बुध को सभी ग्रहों के बीच युवराज की संज्ञा दी जाती है। यह किसी भी जातक के संचार करने की क्षमता और बुद्धि का कारक माना जाता है। ऐसे में यदि आपको ऐसा महसूस हो कि अचानक ही आपके जीवन में आपके मित्रों से आपकी अनबन होने लगी है या फिर मित्रों या सहकर्मियों के मज़ाक से आपको ठेस पहुँचने लगे तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि बुध आपकी कुंडली में कमजोर स्थिति में मौजूद हो। इसके अलावा कार्यक्षेत्र में भी सहकर्मियों के साथ संचार करने में या अपनी बात उन्हें ठीक ढंग से बता पाने में आपको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है या फिर अपनी भावनाओं को सही तरीके से लोगों तक पहुंचा पाने में अक्षम महसूस कर रहे हैं तो यह भी कमजोर बुध के लक्षण हैं। अगर कुंडली में बुध सही स्थिति में मौजूद है तो यह भी हो सकता है कि बुध उस दौरान अपनी नीच राशि मीन में गोचर कर रहे हों। 

बुध शांति के उपाय

उपरोक्त स्थिति में आपको बुध को प्रसन्न करने के उपाय करने चाहिए। आप इस समस्या के समाधान के लिए प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा करें। जितना ज्यादा हो सके हरे वस्त्र धारण करें। इसके अलावा गाय को हरा चारा खिलाएं। आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।

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शनि

कभी-कभी जातकों को ऐसा महसूस होता है कि अचानक ही उनके बने हुए कार्य बिगड़ने लगे हैं। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या फिर अधीनस्थ लोगों से मनमुटाव होने लगा है। या फिर अचानक ही जीवन में आलस्य बढ़ने लगा है जिसकी वजह से आप अपने निर्धारित लक्ष्य को पाने में असमर्थ रहने लगे हों। जाहिर है कि ये सारी परिस्थिति मानसिक तनाव को उत्पन्न करने की कारक है। ऐसे में यह मुमकिन है कि शनि देवता आप पर कुपित हों। ऐसे में जातकों को कुंडली में शनि की स्थिति पर गौर करना चाहिए। यदि वहाँ सब ठीक है तो ऐसा संभव है कि शनि उस दौरान अपनी नीच राशि मेष में गोचर कर रहे हों। 

शनि शांति के उपाय

ऊपर बताई गयी परिस्थिति में जातकों को शनि शांति के उपाय करने चाहिए। जातक “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें व शनिवार के दिन भगवान शनि के सामने तेल का दीपक जलाएं। इसके साथ ही शनिवार के दिन काली उड़द का दान करें। आपको इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।

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