हिन्दू नववर्ष शुरू: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (विक्रमी संवत् 2081) विशेष भविष्यवाणी

हिन्दू नववर्ष शुरू: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (विक्रमी संवत् 2081) विशेष भविष्यवाणी

हिंदू नव वर्ष 2024 इस बार 8 अप्रैल 2024 दिन सोमवार की रात 11:51 बजे से प्रारंभ हो जाएगा लेकिन सूर्योदय कालीन तिथि लेने के कारण सनातन धर्म का नववर्ष 2024 (विक्रम संवत 2081) इस वर्ष 9 अप्रैल 2024 दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। सनातन धर्म में पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदुओं का नववर्ष मनाया जाता है। यही कारण है कि यह दिन सभी सनातन धर्मी लोगों के लिए विशेष और महत्वपूर्ण स्थान रखता है और प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी भव्य और दिव्य तरीके से उत्साहित होकर सभी सनातन धर्मियों के बीच यह पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन से माॅं भगवती के पवित्र नवरात्रि पर्व का शुभारंभ भी होता है।

चैत्र माह शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नूतन संवत्सर का आरंभ होता है। यह सभी के लिए अत्यंत शुभ समय होता है। इसी कारण इस दिन सभी को अपने-अपने निवास स्थान पर अपने कुल और संप्रदाय के अनुसार ध्वज लगाना चाहिए। गृह को सुशोभित करना चाहिए, मंगल गान करने चाहिए, रोशनी करनी चाहिए, तोरण लगाने चाहिए, मंगल स्नान करने के बाद इस दिन देवी देवताओं, ब्राह्मणों, गुरुओं और धर्म ध्वज की पूजा अर्चना करनी चाहिए और इस ध्वज के नीचे पंक्तिबद्ध बैठकर सभी को पूजा अर्चन करना चाहिए। इस दिन नए वस्त्र आभूषण धारण करने चाहिए। इस दिन आपको अपने व्यक्तिगत ज्योतिषी से नए संवत्सर का भविष्यफल भी जानना चाहिए।

जब कभी भी नव वर्ष शुरू होता है तो हम यह जानना चाहते हैं कि उस वर्ष में देश और दुनिया तथा आम जनमानस के लिए किस प्रकार के परिणाम ईश्वर की कृपा से और ग्रहों की विभिन्न स्थितियों और गोचर के परिणाम स्वरूप प्राप्त होंगे। इसके लिए हम चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी कि वर्ष लग्न कुंडली का अवलोकन करते हैं तथा जब भी हमें नववर्ष का फल कथन करना हो हम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी कि वर्ष लग्न कुंडली का अवलोकन करते हैं और उसी के आधार पर पूरे वर्ष में होने वाली शुभाशुभ घटनाओं के बारे में विचार किया जाता है और यह जाना जाता है कि यह वर्ष किस प्रकार की स्थितियों को जन्म देने वाला है। 

   (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा – 2024)                    

हिंदू नव वर्ष 2024 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) जिसे हम नूतन वर्षारंभ भी कहते हैं, उसकी कुंडली धनु लग्न की बनी है। लग्न के स्वामी ग्रह बृहस्पति महाराज पंचम भाव में सप्तमेश और दशमेश वक्री और अस्त बुध के साथ विराजमान हैं। तीसरे भाव में कुंभ राशि में द्वितीयेश और तृतीयेश शनिदेव, पंचमेश और द्वादशेश मंगल के साथ विराजमान हैं। चतुर्थ भाव में अष्टमेश चंद्रमा अस्त अवस्था में हैं और उनकी युति षष्ठेश और एकादशेश शुक्र, भाग्येश सूर्य तथा राहु के साथ हो रही है। केतु महाराज कुंडली के दशम भाव में विराजमान हैं।

लग्नेश और चतुर्थेश बृहस्पति का त्रिकोण भाव में बैठना एक राजयोग कारक स्थिति का निर्माण कर रहा है। इसके अतिरिक्त उनका योग दशमेश और सप्तमेश बुध के साथ होना भी राजयोग सरीखा है। त्रिकोण स्थान यानी भाग्य स्थान के स्वामी सूर्य महाराज भी केंद्र भाव में बैठकर राजयोग निर्मित कर रहे हैं लेकिन इसके साथ ही षष्ठेश और अष्टमेश का योग भी इस कुंडली में बना हुआ है।

अभी हमने यह जानना कि वर्ष लग्न कुंडली की क्या स्थिति है और ग्रहों की कौन-कौन सी राशियों में उपस्थिति है, जो हमारे जीवन को विभिन्न रूपों में प्रभावित कर सकती है। चलिए अब आगे बढ़ते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि वर्ष लग्न कुंडली के अनुसार, यह नूतन संवत्सर 2081 यानी हिंदू नव वर्ष 2024 हमारे देश और देशवासियों के लिए तथा आसपास के देशों और लोगों पर किस प्रकार का ग्रह जनित प्रभाव डाल सकता है:

  • विशेष विचारणीय बात यह भी है कि 8 अप्रैल 2024 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ समय पर सूर्य ग्रहण की छाया भी रहेगी। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन विश्व के अन्य क्षेत्रों में दिखाई देने से इसका प्रभाव भी अवश्य ही इस वर्ष अनुभव होगा।
  • ग्रहों की स्थिति के अनुसार पूर्व और उत्तर दिशा के देशों और प्रदेशों के निवासियों को अपेक्षाकृत सुख की प्राप्ति होगी। मध्य देशों में वर्षा अत्यधिक होने से रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है, जबकि पश्चिम दिशा के प्रदेशों में घी और धान्य में मंदी की स्थिति बन सकती है और पशुधन की हानि हो सकती है।
  • कृषि उत्पादन उत्तम होगा। 
  • सामान्य जनों के हित में नए नियम कायदे कानून बनाए जाने की प्रबल संभावना बनेगी। 
  • आम जनमानस को नई योजनाओं की सूचना मिलेगी और उनके हित के लिए कुछ नई योजनाएं शुरू हो सकती हैं।
  • इस वर्ष विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का बोलबाला रहने की उम्मीद है। 
  • इस वर्ष न्यायपालिका बहुत महत्वपूर्ण परिस्थितियों में बहुत महत्वपूर्ण परिणाम प्रदान करेगी और उसकी महत्ता समय-समय पर सिद्ध होती‌ रहेगी।
  • सामाजिक, धार्मिक और कला संबंधों में उपयोगी कार्य होंगे और देश-विदेश में कलाकारों का नाम होगा। 
  • व्यापार, उद्योग धंधों में भी उन्नति के योग बनेंगे।
  • रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ेगा और नई-नई रेल लाइनों का शुभारंभ हो सकता है। इस वर्ष बुलेट ट्रेन से संबंधित कोई विशेष काम भी शुरू हो सकता है। कुछ नए क्षेत्रों में भी रेल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
  • उपरोक्त कुंडली में सूर्य ग्रह जो कि भाग्येश बने हैं, राहु से पीड़ित होने के कारण सत्ता और प्रजा के बीच विश्वास में कुछ कमी हो सकती है। अनेक प्रकार के ऐसे प्रश्न उठाए जाएंगे, जो कपोल कल्पित होंगे, जिनसे सरकार की परेशानियां बढ़ सकती हैं। 
  • छोटे चुनावों में सत्ता पक्ष निर्बल हो सकता है। 
  • खनिज और धातु उद्योगों में विशेष प्रगति होने के योग बनेंगे। 
  • चंद्रमा भी सूर्य और शुक्र के साथ राहु के प्रभाव में है तथा पीड़ित अवस्था में हैं। इस कारण से हाई राइज़ बिल्डिंगों में दुर्घटनाओं की बढ़ोतरी हो सकती है और खदानों में भी किसी प्रकार की दुर्घटना के योग बन सकते हैं। 
  • गुरु वृषभ राशि में गोचर करेंगे जिसकी वजह से बैंकिंग सेक्टर पर विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। कुछ बैंकों का विलय होगा और कुछ बैंक स्कैम्स का खुलासा भी हो सकता है। 
  • संपत्ति से संबंधित उल्टे सीधे परिणाम प्राप्त होंगे। 
  • ऑटोमोबाइल के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। 
  • विशिष्ट ग्रंथों का प्रकाशन चुनौतीपूर्ण होगा। 
  • विभिन्न क्षेत्रों कीविभिन्न म्युनिसिपल कारपोरेशन के लोगों में असंतोष बढ़ेगा जिससे दैनिक कार्यों में समस्या होगी।
  • हड़तालें बढ़ेंगी और आंदोलन की संभावना बढ़ेगी।
  • ट्रांसपोर्ट से संबंधित कर्मियों का असंतोष बढ़ सकता है। 
  • टैक्स कलेक्शन, रिवेन्यू जेनरेशन और विदेशी व्यापार की स्थिति विचारणीय होगी। इस पर ध्यान देना आवश्यक होगा। 
  • कोई ऐसा टैक्स भी लगाया जा सकता है, जिसके बारे में ज्यादा हल्ला मचे।
  • भारत के पड़ोसी देशों विशेषकर चीन और नेपाल से संबंध बिगड़ सकते हैं।
  • इस वर्ष आतंकवाद और असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण करने में भारत के प्रयास सफल होंगे। 
  • ऑटोमोबाइल क्षेत्र में प्रगति होगी और औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने से देश की जीडीपी में सुधार हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही व्यय भी बढ़ेंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर ज्यादा जोर रहेगा और इसी पर अधिकांश खर्च होगा।
  • धार्मिक कार्यक्रम भी संपन्न होंगे। 
  • खाद्यान्न भंडारों और आर्थिक विषयों की स्थिति चिंताजनक रहेगी। 
  • मित्र देशों की स्थिति असामान्य हो जाएगी। 
  • कोर्ट कचहरी में मुकदमों की संख्या बढ़ेगी। 
  • कई बड़ी कंपनियों और औद्योगिक घरानों तथा बैंकों का परस्पर विलय हो सकता है।
  • कुछ नए घोटालों का खुलासा होगा।
  • समुद्री क्षेत्र में दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नूतन संवत्सर २०८१) – हिन्दू नववर्ष 2024 – का अर्थ एवं महत्व 

चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।
शुक्लपक्षे समग्रं तु तदा सूर्योदय सति।।

                                                                     -हेमाद्रौ ब्राहोक्तेः  

जब हम नूतन संवत्सर के बारे में बात करते हैं तो हेमाद्री के ब्रह्म पुराण के अनुसार, जगत पिता ब्रह्मदेव जी ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन यानी की प्रतिपदा तिथि को सूर्योदय के समय इस संपूर्ण चराचर जगत की रचना की थी। यही वजह है कि प्रतिवर्ष हम चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात प्रथमा तिथि को नूतन संवत्सर का आरंभ मानते हैं। यानी कि हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ इसी दिन से माना जाता है और नया संवत्सर शुरू होता है। यदि आंग्ल वर्ष 2024 की बात की जाए तो 8 अप्रैल 2024 सोमवार की रात्रि को 11:51 बजे रेवती नक्षत्र और वैधृति योग तथा किंस्तुघ्न करण में धनु राशि में नव संवत्सर का प्रवेश होगा। यह विक्रम संवत 2081 कहलाएगा जिसका नाम कालयुक्त होगा।

चूंकि संवत्सर का प्रवेश रात्रि के समय में होगा तो अगले दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि होने के कारण चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रि का प्रारंभ 9 अप्रैल मंगलवार को माना जाएगा। 8 अप्रैल 2024 की रात्रि की धनु लग्न की कुंडली हमने ऊपर दी हुई है। मगर शास्त्रानुसार सूर्योदय कालीन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि मंगलवार को ही मानी जाएगी और इसी कारण मंगलवार से शुरू होने के कारण इस संवत्सर के राजा मंगल होंगे। यह 52वां संवत्सर होगा जिसका नाम कालयुक्त होगा। 

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कालयुक्त नाम के नूतन संवत्सर का फल 

रोगवृद्धिः प्रजायेत कालयुक्ते विशेषतः।
राजयुद्धं भवेद घोरं वृष्टिर्घोरा वरानने।। 

उपरोक्त श्लोक के अनुसार कालयुक्त नमक संवत्सर के दौरान विभिन्न प्रकार के रोगों की वृद्धि होगी यानी कि जनता अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ित हो सकती है और रोगों में वृद्धि हो सकती है।  प्रजा को कष्ट होगा और समस्याएं बढ़ेंगी। इसके अतिरिक्त विभिन्न राष्ट्रों के शासकों के मध्य आपसी टकराव, क्षुब्धता और बिखराव के कई कारण बनेंगे जिससे युद्ध जैसी स्थितियां का सामना करना पड़ सकता है। कहीं पर घनघोर वृष्टि यानी बारिश होने से खड़ी फसलों को भयंकर हानि हो सकती है और बाढ़ आदि का प्रकोप भी हो सकता है।

वत्सरे कालयुक्ताख्ये – सुखिनः सर्वजन्तवः। 
संतपथापिच-सस्यनि-प्रचूरणित तथा गदाः।।

कालयुक्त संवत्सर होने के कारण इस वर्ष में प्रजा में रोग और शोक की वृद्धि हो सकती है। ऐसा भविष्यफल भास्कर का कथन है लेकिन वर्षपर्यन्त होगी और धान्य के उत्पादन में अच्छी वृद्धि देखने को होगी जिसके कारण साधारण जनता को आनंद और सुख की प्राप्ति हो सकती है। विभिन्न राज्यों के मध्य परस्पर युद्ध की विभीषिका उत्पन्न हो सकती है और प्रजा का विनाश भी हो सकता है। कहीं-कहीं धन-धान्य की वृद्धि होगी और वृक्षों पर पुष्प फल भी लगेंगे।

इस संवत्सर की और अधिक बात की जाए तो तो वर्षा कम हो सकती है और व्यापार में भी कमी होने के योग बनेंगे। राजकीय लोगों में विवादों की स्थिति जन्म लेगी। चैत्र तथा वैशाख के महीना में अरिष्ट होने के योग बनेंगे। उत्तर दिशा के क्षेत्र में सत्ता परिवर्तन भी हो सकता है। आषाढ़ मास में कम वर्षा होगी लेकिन श्रावण में अधिक वर्षा हो सकती है। भाद्रपद में खंडवृष्टि होने के योग बनेंगे। वाहनों और इलेक्ट्रिक सामान के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है।

चैत्रसितप्रतिपदि यो वारोऽर्कोदये सः वर्षेशः। 

                                                                      -ज्योतिर्निबन्ध

ज्योतिर्निबन्ध में वर्णित उपरोक्त श्लोक की बात करें तो उसके अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सूर्योदय कालीन समय पर जो वार (दिन) होता है, उसी के अनुसार उसे संवत्सर का राजा घोषित होता है। इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तो सोमवार 8 अप्रैल को ही आ जाएगी लेकिन सूर्योदय कालीन प्रतिपदा अगले दिन मंगलवार को व्याप्त होने के कारण इस बार हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत् 2081 का राजा मंगल ग्रह होगा। 

इस वर्ष के विशेष बिंदु

वर्ष लग्न – धनु  

नक्षत्र – रेवती 

योग – वैधृति

करण – किंस्तुघ्न  

इस वर्ष के अधिकारी 

राजा – मंगल   

मंत्री – शनि

सस्येश – मंगल  

धान्येश – सूर्य 

मेघेश – शुक्र 

रसेश – गुरु  

नीरसेश – मंगल  

फलेश – शुक्र 

धनेश – चंद्र 

दुर्गेश – शुक्र  

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हिन्दू वर्ष के अधिकारी और उनका प्रभाव

वर्ष का राजा मंगल ग्रह 

अग्नि-तस्कर-रोगाढयो नृपविग्रहः दायकः। 
गतसस्यो बहुव्यालो भौमाब्दो बालहा भृशम्।।       

विक्रम संवत् 2081 के राजा मंगल होंगे। उपरोक्त श्लोक के अनुसार संवत्सर के राजा यदि मंगल महाराज हैं तो इस वर्ष आंधी तूफान का जोर रहने की संभावना रहेगी। वायुयान दुर्घटनाओं की बढ़ोतरी, अग्निकांड, भूकंप तथा प्राकृतिक आपदाओं में विशेष वृद्धि होने के योग बन सकते हैं। समाज में सामाजिक तत्वों, आतंकियों, सांप्रदायिक घटनाओं, ठगी, तस्करी, लूटपाट और विभिन्न प्रकार के पेचीदा रोगों की वृद्धि होने की वजह से आम जनमानस को परेशानी और पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है। वायु की तीव्रता रहेगी और बादल होने पर भी वर्ष की कमी का अनुभव होगा। प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि आंधी, ओलावृष्टि, चक्रवात, तूफान, आदि से कृषि उत्पादों की कमी हो सकती है। पशुधन की हानि के योग बन सकते हैं। सामाजिक माहौल बिगड़ सकता है। शासक वर्ग कर्तव्य पालन के प्रति उदासीन रवैया दिखाएंगे, जिससे आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला बढ़ेगा। प्रजा जनों के बीच पित्त, रक्त और विषाणु जनित रोगों की अधिकता हो सकती है। बालकों, बालिकाओं के प्रति क्रूरता और अपहरण जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। इसके अतिरिक्त सर्प जैसे जीव लोगों के बीच विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करेंगे। राजस्व की चोरी की घटनाएं बढ़ सकती हैं। झगड़ा और झंझटों की प्रवृत्ति बढ़ सकती है तथा कोर्ट कचहरी में मुकदमें बढ़ सकते हैं। अनाजों के दामों में महंगाई बढ़ेगी।

भौमे नृपे वह्निभयं जनक्षयं चौराकुलं पार्थिव-विग्रहश्च।
दुःखों प्रजा-व्याधि-वियोगपीड़ा स्वल्पं पयो मुञ्चति वारिवाहः।।

उपरोक्त श्लोक की बात करें तो नव संवत्सर का राजा मंगल होने की वजह से बेईमानी, चोरी, ठगी, भ्रष्टाचार, दुराग्रह और हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हो सकती है तथा प्राकृतिक उत्पातों में अधिकता रह सकती है। भूकंप, अग्निकांड, विस्फोट, जनधन की हानि के कारण बन सकते हैं। बड़े-बड़े राजनेताओं में आपसी विरोध और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रजा जनों को अनेक प्रकार के रोगों, व्याधियों, अपहरण, वायरल बुखार और अन्य पीड़ाएं हो सकती हैं। देश में आगजनी की घटनाएं बढ़ती हैं। सांप्रदायिक हिंसा, उग्रवाद तथा तनावपूर्ण स्थितियों से जानमाल की हानि हो सकती है। कहीं पर बहुत ज्यादा बारिश और कहीं पर एकदम सूखे की स्थिति बन सकती है और कहीं बाढ़ की उपस्थिति लोगों को परेशान कर सकती है। लोगों की धर्म कर्म में रुचि कम हो सकती है।

वर्ष का मंत्री शनि ग्रह  

रविसुते यदि मन्त्रिणि पार्थिवा विनय संहिता बहुदुःखदाः।
न जलदाय जलदाय जनतापदा जनपदेषु सुखं न धनं क्वचित्।।      

नूतन संवत्सर 2081 के मंत्री पद पर शनि महाराज विराजमान हैं। वर्ष का मंत्री शनि होने के कारण राजनेताओं और प्रशासन के लोगों का व्यवहार आम जनमानस के प्रति अत्यंत कठोर हो सकता है। वे नीति के विरुद्ध आचरण कर सकते हैं, जिससे जनता को कष्ट और असंतोष का भाव महसूस हो सकता है। देश के कुछ विशेष भागों में वर्षा की कमी होने से खाद्यान्न की कमी हो सकती है और प्राकृतिक प्रकोप होने की वजह से जनता में भय व्याप्त हो सकता है। सामान्य जनमानस के पास धन संपदा और पर्याप्त सुख संसाधनों की कमी हो सकती है, जिससे उनके अंदर असंतोष की भावनाएं बढ़ सकती हैं। इसके अतिरिक्त लोहा, स्टील, जस्ता, तांबा, तेल, सिक्का, आदि पदार्थ, खाद्यान्न तथा पेट्रोलियम पदार्थों के भाव तेज हो सकते हैं।

तेल, धान्य महंगे होंगे। गौ, आदि दुधारू पशुओं की हानि हो सकती है। सत्ता पर बैठे लोगों के बीच परस्पर विवाद बढ़ सकता है। विभिन्न देशों में परस्पर युद्ध की आशंका बढ़ेगी।

वर्ष का सस्येश मंगल ग्रह 

अथ च सस्यपतौ धरणीसुते गजतुरङ्गखरोष्ट्रगवामपि। 
भवति रोगहतिश्च घना जलं ददति नैव तुषान्नविनाशनम्।।  

नव वर्ष 2081 के सस्येश मंगल ग्रह हैं। सस्येश को चौमासे की फसलों का स्वामी ग्रह माना जाता है। इसके परिणामस्वरूप हाथी, घोड़े, गधे, आदि चौपाये जानवरों तथा गाय, बैल, भैंस, ऊंट, आदि दूध देने वाले पशुओं में भी विभिन्न प्रकार के रोगों की उत्पत्ति हो सकती है। देश के कुछ स्थानों पर वर्षा की कमी के कारण खड़ी फसलों जैसे कि धान, चना, सोयाबीन, अनाज, सब्जियों, आदि की फसलों को हानि पहुंच सकती है और उनके भावों में विशेष तेजी रहेगी। कुछ स्थानों पर सूखा पड़ने से समस्या बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त यांत्रिक वाहनों में बहुत बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। नई-नई तकनीकें आएंगी। ईंधन के वाहनों का बाजार बढ़ सकता है। पुराने वाहनों की नष्ट करने की स्क्रैप पॉलिसी में नए बदलाव आएंगे।

वर्ष का धान्येश सूर्य ग्रह

पश्चाद धान्याधिपे सूर्ये पश्चाद धान्यं तदानहि। 
विग्रहं भूभृतां धान्यं महर्घं ज्वरपीडनम्।।

इस वर्ष के धान्येश सूर्य महाराज हैं। इसके कारण शीतकाल में होने वाली फसलों में कमी हो सकती है, जैसे कि मूंग, मोठ, बाजरा, धान, दलहन, आदि की पैदावार में कमी हो सकती है। प्राकृतिक प्रकोपों का सामना करने के कारण कृषि उत्पादन को हानि पहुंच सकती है और फसलों का भी नुकसान हो सकता है। इसी वजह से दलहन, तिलहन और धान आदि के अनाजों के मूल्य में भी वृद्धि के योग बनेंगे। परस्पर राजनेताओं में बैर, विरोध, टकराव और विवाद उत्पन्न होंगे। आपसी अहम भावना का टकराव होगा। देश में राजनीतिक वातावरण अत्यंत कटु हो जाएगा और एक युद्ध जैसी स्थिति को जन्म देगा। सभी प्रकार के अनाज तेज भाव में हो जाएंगे‌ जिससे लोगों को परेशानी होगी और विचित्र प्रकार के ज्वर आम जनमानस को कष्ट दे सकते हैं।

वर्ष का मेघेश शुक्र ग्रह 

भृगुसुतो जलदस्यपतिः यदा जलमुचो जलदादि-विशोभजनाः। 
धन-निधानयुता द्विजपालकाः नृपतयो जनता सुखदायकाः।।

नववर्ष 2081 का मेघपति अर्थात् मेघेश शुक्र ग्रह होने के कारण वर्षा अच्छी होने की संभावना बढ़ जाएगी। ऐसे शासक वर्ग जो उच्च प्रतिष्ठित हैं, राजनेता हैं और ब्राह्मणों और विद्वानों का हित करने का प्रयास करेंगे और उनका सम्मान करने के लिए कुछ ना कुछ नया काम शुरू कर सकते हैं। राजनेताओं और प्रशंसकों को धन-धान्य की वृद्धि प्राप्त होगी। उनकी समृद्धि बढ़ेगी। अनेक प्रकार के जननेता और प्रशासक भी प्रजाजनों की भलाई और कल्याण हेतु प्रयास करेंगे और नई-नई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत होगी जिससे आम जनमानस को लाभ होगा और उनमें संतुष्टि का भाव बढ़ेगा और उन्हें सुख मिलेगा। 

वर्ष का रसेश गुरु ग्रह 

यदि गुरौ रसपे सुखिनो जनाः समधिकेन फलादियुता द्रुमाः। 
जनपदा जननायक-सैनिका हव-हयायुध वाह-विगाहिताः।।    

इस वर्ष का रसाधिपति अर्थात् रसेश गुरु बृहस्पति महाराज हैं। बृहस्पति का विशेष प्रभाव होने के कारण विशिष्ट साधनों से संपन्न लोगों में भौतिक सुखों की विशेष वृद्धि के योग बनेंगे। फल, फूल, आदि वृक्षों की पैदावार अच्छी होगी। जनमानस विद्वानों, पंडितों, ब्राह्मणों की सेवा और सत्कार करने को तैयार रहेंगे लेकिन किसी सीमावर्ती प्रांत या जनपद में शासकों और प्रशंसकों तथा पुलिस सैन्य अधिकारियों को बल प्रयोग करना पड़ सकता है क्योंकि ऐसे स्थान पर सांप्रदायिक हिंसा की संभावना बढ़ सकती है। बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों का वर्चस्व बढ़ेगा वर्तमान संवत्सर में लोग उच्च कोटि के वाहनों को संग्रहित करेंगे।

वर्ष का नीरसेश मंगल ग्रह 

नीरसेशो-यदा-भौमः प्रवाल-रक्त-वाससाम्।
रक्त-चन्दन-ताम्राणां-अर्घ-वृद्धिर्दिने-दिने।।

धातुओं के स्वामी अर्थात् नीरसेश का पद मंगल ग्रह को मिलने के कारण मूंगा, पुखराज, हीरा, माणिक्य, आदि विशेष रत्नों तथा लाल वस्त्रों, गर्म वस्त्रों, लाल चंदन, सोना, पीतल, तांबा, लाख, खल, बिनौला, आदि और लाल वर्ण के पदार्थ और धातुएं दिन प्रतिदिन महंगाई को प्राप्त होंगी यानी कि इनके दामों में बढ़ोतरी के योग दिन प्रतिदिन बनते चले जाएंगे। दवाइयां बनाने वाले मूलभूत पदार्थों के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। ईंधन महंगा होगा।

वर्ष का फलेश शुक्र ग्रह 

यदि फलस्यपतौ भृगुजे धरा-मृदुकुमार-मही-रूहराशयः। 
बहुफला-नरनाथ-सुभोगदा-द्विजवराः श्रुतिपाठः-परायणाः।।

फलपति अर्थात् फलेश के पद पर शुक्र ग्रह के होने के कारण वर्षा की अच्छी संभावना बनती है। पृथ्वी पर कोमल घास, फल, फूलों और छोटे पौधों के समूह की पैदावार में बढ़ोतरी हो सकती है जिससे इनकी बढ़ोतरी होगी। राजनेताओं और प्रशासन के लोगों के बीच धन संपदा और ऐश्वर्य की बढ़ोतरी हो सकती है, उनकी साख और समृद्धि की वृद्धि भी हो सकती है। ब्राह्मण वर्ण, कर्मकांड पंडितों, यज्ञ, अनुष्ठान, आदि करने वाले लोग लाभान्वित हो सकते हैं और ऐसे कार्यों में बढ़ोतरी होती है। फूड क्वालिटी में सुधार करने के लिए कुछ नए कायदे कानून बनाए जा सकते हैं। मोटे अनाज का उत्पादन अधिक होगा और इसे खाने पर लोगों का जोर रहेगा। वेद पाठ में विश्वास बढ़ेगा। लोग पूजा पाठ धार्मिक कार्य संपन्न कराएंगे। 

वर्ष का धनेश चंद्र ग्रह  

धनपतिः मृगलांछनको यदा रसचय-क्रय-विक्रयतो धनम्।
वसनशालि सुगंधरसं बहु द्रविण-तैलयुतं नृपसौख्यदम्।।

धनपति अर्थात् धनेश या धन के स्वामी चंद्रमा बनने के कारण इस वर्ष रस से भरे पदार्थों जैसे दूध, घी, शरबत, तेल और सेब, जूस, मौसमी, आदि रसीले फलों में खरीद और बेचने के कारण यानी कि क्रय विक्रय के द्वारा धन का अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वस्त्र, अनाज, तेल, सुगंधित तेल, दूध, घी, गुड़, चावल, इत्र, खुशबू, मिठाई, आदि और किराने की वस्तुओं के व्यापार से भी अच्छे लाभ की प्राप्ति की संभावना बढ़ सकती है। मौका परस्त नेताजन विशेष प्रकार के सुख साधनों से संपन्न होते चले जाएंगे और प्रजा कानून का पालन करेगी और अपने कर या टैक्स का उचित भुगतान भी करेगी। चावल, टेक्सटाइल और सर्विस सेक्टर का एक्सपोर्ट बढ़ सकता है। देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और एक्सपोर्ट इंपोर्ट बढ़ेगा।

वर्ष का दुर्गेश शुक्र ग्रह 

नगर-देश विशेष पतिर्यदा भृगुसुतो बहुसौख्यकरो मतः। 
विनयवाणिज-गोहसमः सुखोनगवने निकटेऽपि च दूरतः।।

दुर्गपति अर्थात् सेनापति अर्थात् दुर्गेश का पद शुक्र ग्रह को प्राप्त हुआ है। इसकी वजह से देश के विशिष्ट नागरिकों और विशिष्ट वर्ग के लोगों को ही सुख संसाधनों की प्राप्ति होगी और उनकी समृद्धि विशेष रूप से होगी। सर्वत्र शांति बने रहने के योग बनेंगे। शासन दृढ़ होगा। वाणी और विनय के प्रभाव से व्यवहार में बढ़ोतरी होने के कारण सुख और शांति की प्राप्ति होगी। दूर रहने वाले लोगों और पर्वतीय स्थान के लोगों को भी विभिन्न सुख सुविधा उपलब्ध होने से उनकी समस्याओं में कमी आएगी और उनके सुख संसाधन सुलभ होंगे। कितनी भी कठिन से कठिन परिस्थिति हो, उसका अच्छा हल देखने को मिलेगा। केंद्र द्वारा राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं पर कार्य बढ़ेगा।

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इस प्रकार हम निम्नलिखित आगामी घटनाओं के संकेत देख सकते हैं:

  • इस हिंदू नव वर्ष 2081 में सूर्य, गुरु, चंद्र और शनि को एक-एक पद मिला है जबकि शुक्र और मंगल को तीन-तीन पदों की प्राप्ति हुई है और बुध ग्रह को कोई पद प्राप्त नहीं हुआ है।
  • इस वर्ष सौम्य ग्रहों को भी पांच पद मिले हैं और क्रूर ग्रहों को भी पांच पद मिले हैं।
  • इस वजह से काली, पीली, लाल रंग की वस्तुओं, खाद्यान्न और उनसे संबंधित पदार्थों के दामों में विशेष तेजी देखने को मिलेगी।
  • बराबर पदों पर सौम्य और क्रूर ग्रहों के विराजमान होने के कारण मिले-जुले फलों की प्राप्ति होगी।
  • मुख्य रूप से राजा के मंगल और मंत्री के शनि होने से वैमनस्य बढ़ सकता है और जनता त्रस्त हो सकती है।
  • शुक्र और मंगल को सर्वाधिक पद मिलने के कारण स्त्रियों और वर्दीधारी तथा क्षत्रिय लोगों का प्रभुत्व बढ़ सकता है। जनता में विप्र और क्षत्रियों को प्रबल प्रोत्साहन मिलेगा तथा वैश्यों को भी अच्छे काम का अच्छा लाभ मिलेगा।
  • इस वर्ष के राजा मंगल हैं और मंत्री शनि। ये दोनों ही विपरीत प्रकृति के ग्रह माने जाते हैं और मुख्य पदाधिकारी परस्पर विरोधी ग्रह होने के कारण राजनीतिक और सामाजिक रूप से परस्पर वैर और विरोध का सामना तथा विरोधी घटनाओं में बढ़ोतरी हो सकती है। जातीय हिंसा और सांप्रदायिक घटनाओं की बढ़ोतरी होने से माहौल विषाक्त रहेगा। विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के मध्य युद्ध और जनहानि के समाचार भी मिल सकते हैं। भारत के संबंध पड़ोसियों से भी बिगड़ने की स्थिति बन सकती है।
  • भारतवर्ष के अंदर आंतरिक संघर्ष होने की संभावना बन सकती है जिस पर ध्यान देना होगा। पूंजीपतियों और धनाड्य लोगों के हाथ में शक्ति बढ़ेगी। देश में कीड़े, मकोड़े और संक्रामक तथा पेचीदा रोगों में बढ़ोतरी हो सकती है। भारतीय लोग विदेश जाने को लालायित दिखाई दे सकते हैं। शीतल पेय पदार्थों को लेकर कोई विशेष नियम बनाए जा सकते हैं और इन पर वाद विवाद होते रहेंगे। देश में कुछ स्थानों पर बहुत अच्छी वर्षा और कुछ स्थानों पर बिल्कुल सुख की स्थिति बन सकती है। चीन से संबंध और ज्यादा कटु होने के योग बनेंगे। आपस में वैमनस्य भी और बढ़ सकता है। बांग्लादेश से भी कोई नया विवाद उत्पन्न हो सकता है। भारत के पड़ोसी नेपाल से भी संबंध बिगड़ सकते हैं।
  • इस वर्ष न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी और उनके कई आदेश इतिहास बन सकते हैं।
  • सरकार द्वारा आम जनमानस के लिए कुछ नई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की जा सकती है।
  • देश में आंतरिक कलह और आतंकवाद जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ेगी। इन पर विशेष ध्यान देना होगा।
  • सीमावर्ती राज्यों और क्षेत्र की सीमाओं की निगरानी बढ़ानी होगी। कुछ विशेष पड़ोसी मुल्कों जैसे भारत के पड़ोसी देशों चीन, बांग्लादेश और नेपाल से भारत के संबंध बिगड़ सकते हैं। पाकिस्तान अन्य देशों का साथ लेकर भारत के विरुद्ध खड़ा होने का प्रयास जारी रखेगा।
  • धातु और अनाजों के दामों में बढ़ोतरी होगी। किसी स्थान पर अतिवृष्टि और किसी स्थान पर अनावृष्टि होगी जिससे कुछ स्थानों पर सूखा पड़ सकता है और कुछ जगह बाढ़ की स्थिति जन्म लेगी। इस दौरान कुछ नई कर व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं और कोई नया टैक्स भी शुरू हो सकता है। समाज में लोगों के मध्य आपसी तनाव बढ़ने के योग बनेंगे जिसे न्यायालय में वाद विवादों की संख्या बढ़ेगी।
  • सत्ता में बैठे राजनीतिक दलों को आपसी संघर्ष और अंतर्कलह का सामना करना पड़ सकता है।
  • इस वर्ष कालयुक्त संवत्सर होने से पानी की कमी हो सकती है जिससे जल स्तर और नीचे जा सकता है।
  • आश्विन नाम के वर्ष का फल यही होता है कि अनेक प्रकार की फसलें उपजाई जाएंगी जिनका फायदा मिलेगा।
  • संवत् की सवारी बैल होने के कारण घास, पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होगा।
  • रोहिणी का निवास तट पर होने के कारण वर्षा थोड़ी-थोड़ी होती जाएगी जिससे पानी की समस्या बढ़ सकती है।
  • चैत्र के महीने में प्रजा में सुख की बढ़ोतरी होगी और मध्यम खेती होगी तथा वर्ष भी मध्यम होगी।
  • वैशाख के महीने में ब्राह्मणों के मध्य विरोध हो सकता है। उड़द, तेल, जौ का उत्पादन कम होगा। जौ और गेहूं जैसे पौधों में रोग हो सकता है। गन्ना, दूध, रस और घी के दामों में कमी आएगी।
  • ज्येष्ठ मास में आरोग्यता बढ़ेगी। कहीं पर कुछ उपद्रव हो सकते हैं। धान महंगे हो जाएंगे।
  • आषाढ़ मास में छोटे बालकों को पीड़ा हो सकती है। कपास और सूत के दामों में कमी हो सकती है। वर्षा की कमी हो सकती है। कहीं भी प्राकृतिक आपदा उत्पन्न हो सकती है। देश में उपद्रवों की संख्या बढ़ सकती है।
  • श्रावण मास में धान्य की उत्पत्ति अधिक होगी। चौपायों में रोग हो सकते हैं। कपास, वस्त्र और जूट में महंगाई होगी। वर्षा अधिक होगी।
  • भाद्रपद मास में शुभ फल प्राप्त होंगे। अच्छी वर्षा होगी। धान्य के दामों में कमी आएगी।
  • आश्विन मास में उड़द और मूंग का उत्पादन कम होगा। व्यापारी जातकों को समस्या हो सकती है। अत्यधिक वर्षा हो सकती है। गौ को पीड़ा हो सकती है। भूमि अनेक प्रकार के धान्य से परिपूर्ण होगी। क्षत्रियों में परस्पर विरोध हो सकता है।
  • कार्तिक मास में वर्षा की कमी हो सकती है। चोरों का भय बढ़ेगा। आपसी विरोध होगा जिससे क्षति के योग बनेंगे। अग्नि, रोग और जल का भय हो सकता है। पक्षियों को पीड़ा मिलेगी।
  • मार्गशीर्ष मास में वर्षा और खेती मध्यम होगी। धातुओं के भाव तेज हो सकते हैं। गौ माता को पीड़ा हो सकती है। घी आदि महंगे होंगे।
  • पौष मास में घी, आदि महंगे होंगे। विभिन्न प्रकार के तेल और घी के दामों में बढ़ोतरी होगी। भूमि पर सुभिक्ष बढ़ेगा।

नूतन संवत्सर के आरंभ होने के इस दिन विशेष रूप से कड़वे नीम की ताजी कोमल पत्तियां लेकर आनी चाहिए और उनमे थोड़ा सा जीरा, अजवाइन, काली मिर्च, नमक, हींग, इमली और थोड़ी सी शक्कर मिलाकर उसका चूर्ण बनाना चाहिए। इसको ग्रहण करने से इस समय में होने वाले रोगों का नाश होता है। विद्वानों, ब्राह्मणों और ज्योतिषियों को अपने पंचांग की पूजा करनी चाहिए। इस दिन ईश्वर दर्शन हेतु मंदिरों में जाना, गुरु पूजन और ज्योतिषी का आदर सत्कार और दक्षिणा देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त याचकों को भी दान, आदि देना चाहिए। घर आने वाले जातकों को भूखे पेट नहीं जाने देना चाहिए और मिष्ठान्न आदि भोजन कराना चाहिए। इस दिन नाच, गाना और उत्सव होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन आनंद उत्सव मनाने से संपूर्ण वर्ष आनंद मनाने का अवसर प्राप्त होता रहता है।

इस सही विधि अनुसार अब विद्यारंभ संस्कार को घर में ही करें आयोजित! 

हम आशा करते हैं कि हिन्दू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2024 आपके लिए शुभ रहे और आपके जीवन में मंगल ही मंगल हो। हम आपके मंगल भविष्य की भी शुभ कामना करते हैं।