रसोई में आसानी से मिल जाने वाली इन वस्तुओं से ग्रह दोष दूर करें

ज्योतिष शास्त्र यह मानता है और उसकी भविष्यवाणियों से इस बात की कई बार पुष्टि भी हुई है कि आपके और हमारे जीवन में घटने वाली हर घटना का संबंध प्रत्यक्ष तौर से या फिर अप्रत्यक्ष तौर से ग्रहों के गोचर या स्थिति पर निर्भर करता है। ग्रहों के द्वारा प्रदान किए जाने वाले ये फल शुभ या अशुभ दोनों प्रकार के हो सकते हैं। ग्रह जब किसी जातक की कुंडली में शुभ स्थान पर हो तो उसे अच्छे फल देता है लेकिन ग्रह यदि किसी जातक की कुंडली में नीच अवस्था में हो तो सामान्य परिस्थितियों में ये अशुभ फल देता है।

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आम मनुष्य का ग्रहों पर तो नियंत्रण नहीं हो सकता है लेकिन ग्रहों के इन अशुभ प्रभावों को कुछ उपाय कर हम कम जरूर कर सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको उन चीजों के बारे में बताने वाले हैं जो आपकी रसोई में आसानी से मिल जाते हैं और उनका उपयोग या दान कर आप अपने जीवन के ग्रह दोष दूर कर सकते हैं।

सूर्य

सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य यदि कमजोर हो तो सामान्य स्थिति में ऐसे जातक को यश नहीं मिलता, करियर में दिक्कतें आती हैं और पिता से उसके संबंध खराब रहते हैं। ऐसे में आप सूर्य के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा शुद्ध घी, केसर, गेहूं आदि का दान करें। सूर्य देवता प्रसन्न होंगे।

चंद्रमा

चंद्रमा यदि कमजोर हो तो ऐसे जातक को मानसिक तनाव घेर लेता है और वह अवसाद की तरफ बढ़ने लगता है। ऐसे जातकों पर क्षय रोग का खतरा भी मंडराने लगता है। ऐसे में चंद्रमा को मजबूत या चंद्रमा के दोष को खत्म करने के लिए जातकों को चंद्रमा को जल अर्पित तो करना ही करना चाहिए। इसके साथ-साथ खाने में रसीले फल, जूस, चावल इत्यादि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। आप इन चीजों का दान कर के भी चंद्रमा की कृपा के पात्र बन सकते हैं।

मंगल 

मंगल ग्रह को क्रूर ग्रहों में गिना जाता है। जिस जातक की कुंडली में मंगल कमजोर स्थान पर बैठा हो ऐसे जातकों के दुश्मन सर उठाने लगते हैं और उसका जीवन इन वजहों से परेशानी से घिर जाता है। मंगल किसी भी जातक के जीवन में साहस और पराक्रम का भी कारक माना जाता है। ऐसे में आप मंगल देवता की कृपा पाने के लिए अपने खाने में लाल फल और लाल सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। मंगल देवता प्रसन्न होंगे।

बुध

बुध सभी ग्रहों में सबसे छोटा व सबसे तेज ग्रह है। यह ग्रह किसी भी जातक के जीवन में बुद्धि, व्यवसाय, करियर और संचार इत्यादि का कारक माना जाता है। बुध यदि कमजोर हो तो ऐसे जातकों को चर्म रोग की समस्या और वाणी दोष होने लगता है। ऐसे में जिन जातकों की कुंडली में बुध कमजोर अवस्था में हो उन्हें धनिया, मूंग दाल, सौंफ व हरी सब्जियों का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा ऐसे जातक त्रिफला, सहजन की फली इत्यादि का दान भी कर सकते हैं। बुध ग्रह से संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।

गुरु

बृहस्पति देवता को सभी ग्रहों के बीच गुरु का दर्जा प्राप्त है। बृहस्पति देवता की जिस जातक पर कृपा हो वह व्यक्ति विवेकवान, व्यवहारी और उच्च पद पर आसीन होता है। यदि बृहस्पति की दशा कुंडली में कमजोर हो तो सामान्य परिस्थिति में ऐसे जातक को काफी अपमान का भागीदार बनना पड़ता है। साथ ही उसके ऊपर पीलिया रोग जैसे खतरे भी मंडराने लगते हैं। ऐसे में आपको बृहस्पति देवता को प्रसन्न करने के लिए हल्दी, केसर, केला व पीले रंग की वस्तुओं का दान करना चाहिए। इससे गुरु बहुत प्रसन्न होते हैं।

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शुक्र

शुक्र देवता को सभी नौ ग्रहों में सबसे चमकीला ग्रह माना जाता है। यह किसी भी जातक के जीवन में भौतिक सुखों और वैवाहिक जीवन इत्यादि का कारक माना जाता है। यदि किसी जातक की कुंडली में शुक्र देवता कमजोर स्थान पर हों तो ऐसे जातक को नेत्र व गुप्तांग संबंधी बीमारियां परेशान करती हैं। साथ ही जीवन से सुख-सुविधाएं भी मानो गायब सी हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में शुक्र को मजबूत करने या उसके दोष कम करने के लिए जातकों को सफ़ेद चीज जैसे कि दूध, दहि, चावल इत्यादि का दान करना चाहिए। इसके अलावा मखाने के खीर के सेवन से भी जातक के जीवन पर शुक्र देवता कृपा बरसा सकते हैं।

शनि

शनि को सभी ग्रहों में सबसे क्रूर माना गया है। यदि शनि देवता कमजोर स्थिति में हों तो ऐसे जातक को जीवन में करियर संबंधी रुकावटें आदि देखने को मिलती हैं। आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती है व दुर्घटना का योग इत्यादि भी बनता है। ऐसे में शनि देवता को प्रसन्न करने के लिए आप सरसों तेल;, काल तिल, काला उड़द, कलौंजी इत्यादि का दान करें। इससे शनि देवता अति प्रसन्न होते हैं।

राहु व केतु

राहु और केतु को ज्योतिष शास्त्र में छाया ग्रह माना जाता है। इन दोनों ग्रहों का प्रभाव अगर किसी जातक के जीवन पर पड़े तो उस जातक का जीवन परेशानियों से घिर जाता है। राहु के प्रकोप से जातक अनैतिक कार्यों में लिप्त होने लगता है व केतु के प्रभाव से उस जातक को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे ही कई और समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है जिससे बदनामी होती है। ऐसी स्थिति में इन दो छाया ग्रहों के दोष को कम करने के लिए जातकों को सिरका, नमक इत्यादि का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा बहते जल में जौ प्रवाहित करने से भी राहु और केतु ग्रह शांत होते हैं।

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