3 प्रकार का होता है मांगलिक दोष, क्या आप जानते हैं दूसरा वाला है सबसे घातक !

वैदिक ज्योतिष में सौरमंडल के समस्त 9 ग्रहों में से मंगल ग्रह का स्थान विशेष है। इन्हें ग्रहों के सेनापति की उपाधि प्राप्त होती हैं। यही कारण है कि मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा, बड़े भाई, रिश्तों /संबंध, भूमि, शक्ति, रक्त और शौर्य का कारकतत्व प्राप्त होता है। मंगल ग्रह का किसी व्यक्ति के कुंडली के लग्न या कुछ विशेष भावों में विराजमान होना भी उस कुंडली में मंगल दोष का निर्माण करता है। 

ज्योतिष शास्त्रों अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत व प्रबल होती है, उस व्यक्ति को जीवन में पराक्रम, सुख और संपत्ति की प्राप्ति निश्चित रूप से होती है। ऐसे जातकों के अपने भाई-बहनों से संबंध भी बेहतर होते हैं और उनकी बीच अक्सर भाईचारा देखा जाता है। 

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मांगलिक होने से क्या होता है?

परंतु इसके विपरीत किसी कुंडली में मंगल दोष या मांगलिक दोष का निर्माण होना, उस जातक को वैवाहिक जीवन से संबंधित कई प्रकार का कष्ट मिलने के योग बनाता है। इस दोष के कारण ही अक्सर पति-पत्नी के बीच सामंजस्य और प्रेम की कमी देखने को मिलती है। क्योंकि मांगलिक दोष सबसे अधिक जातक के शादीशुदा जीवन को प्रभावित करता है। इससे जातक की शादी में देरी के साथ-साथ उसे विवाह में कई समस्या भी आती हैं। 

इसके अतिरिक्त व्यक्ति जीवन भर कानूनी विवाद, ऋण या कर्ज से परेशान, दांपत्य सुख से वंचित रहने के साथ-साथ गंभीर चोट या दुर्घटना का शिकार हो सकता है। इसलिए कुंडली के समस्त दोषों में से मंगल दोष को बेहद प्रभावी माना गया है और इसके लिए ज्योतिषी जातकों को कारगर उपाय करते हुए इस दोष से मुक्ति पाने की सलाह भी देते हैं। 

आइये जानें आखिर कुंडली में बनने वाला ये मांगलिक दोष कितने प्रकार का होता है और इस दोष से मुक्ति पाने के लिए सरल उपाय क्या होंगे। 

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कुंडली में मंगल दोष

ये देखा गया है कि जब भी विवाह की बात आती है तो सबसे पहले आमतौर पर भावी वर-वधु की जन्म कुंडली मिलान किया जाता है। इस दौरान उन दोनों की कुंडली में ज्योतिष विशेषज्ञ मांगलिक कुंडली का विचार करते हुए ये जानने की कोशिश करते है कि दोनों में से कोई मांगलिक तो नहीं? ऐसे में यदि लड़के या लड़की में से कोई भी मांगलिक निकलता है तो इस स्थिति में विवाह स्वीकृत नहीं होता है। क्योंकि ज्योतिष अनुसार विवाह के लिए दोनों कुंडली का मंगलीक होना या दोनों कुंडली का मांगलिक न होना आवश्यक होता है। 

यूँ तो आपने भी अपने जीवन में कई बार इस दोष के बारे में अलग-अलग बातें व धारणाएं सुनी होगी। परंतु क्या आप जानते हैं कि मांगलिक कुंडली भी तीन प्रकार की होती है। साथ ही मांगलिक दोष के तीनों प्रकार का अपना अलग-अलग प्रभाव होता है। चलिए इस बारे में विस्तार पूर्वक करते हैं चर्चा…. 

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मांगलिक दोष कितने प्रकार के होते हैं?

ज्योतिष में मुख्य रूप से मांगलिक कुंडली के तीन प्रकार बताएं गए हैं। जो कुछ इस प्रकार हैं:-

क्रम संख्या मांगलिक कुंडली के प्रकार 
सामान्य मांगलिक कुंडली या पत्रिका, 
द्विबल मांगलिक कुंडली या पत्रिका और,
त्रिबल मांगलिक कुंडली या पत्रिका

1. सामान्य मांगलिक कुंडली :

जिस भी जातक की जन्म कुंडली में लाल ग्रह मंगल प्रथम यानी लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव और द्वादश भाव (1-4-7-8-12) में से किसी भी भाव में उपस्थित हो तो, ये स्थिति उस कुंडली में सामान्य मांगलिक दोष का निर्माण करेगी। 

2. द्विबल मांगलिक कुंडली :

किसी जातक की जन्मकुंडली में मंगल का प्रथम यानी लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव और द्वादश भाव (1-4-7-8-12) में होने के साथ-साथ अपनी नीच राशि कर्क का भी होना, इस स्थिति में कुंडली में मंगल का दुष्प्रभाव बढ़ा देता है। इसके अलावा 1, 4, 7, 8 और 12वें भावों में से किसी भी भाव में मंगल के अलावा सूर्य, शनि, राहु या केतु में से कोई अन्य ग्रह भी उपस्थित हो तो, तब उस कुंडली में द्विबल मांगलिक दोष का निर्माण होता है।

3. त्रिबल मांगलिक कुंडली :

यदि किसी जातक की जन्म कुंडली के प्रथम यानी लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव और द्वादश भाव (1-4-7-8-12) में से किसी भाव में मंगल उपस्थित होने के साथ-साथ अपनी नीच राशि कर्क का भी हो। साथ ही इस भावों में शनि, राहु, केतु भी उपस्थित हो तो, ये स्थिति मंगल दोष का प्रभाव तीन गुना बढ़ा देती है। इस तरह की कुंडली को ही ज्योतिष में त्रिबल मांगलिक पत्रिका कहा जाता है। 

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मंगल दोष के लक्षण : मांगलिक दोष के लक्षण

  • ये देखा गया है कि जिस जातक की कुंडली के लग्न में ये दोष बनता है, उस जातक का स्वभाव अत्यधिक आक्रामक, गुस्सैल, और अहंकारी प्रवृत्ति का होता है।
  • कुंडली के चतुर्थ में मंगल दोष का बनना, जातक को जीवन में सुखों से वंचित करने के साथ-साथ उनके पारिवारिक जीवन में भी कई प्रकार का कष्ट देने का कार्य करता है। 
  • कुंडली के सप्तम भाव में मंगल दोष का होना, जातक को सबसे अधिक वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्या देता है। इससे उसका वैवाहिक जीवन चुनौतियों से भरा रहता है।
  • कुंडली के अष्टम भाव में इस दोष का बनना जातक को दांपत्य सुख की कमी, विवाह में बाधा, ससुराल सुख में कमी या ससुराल पक्ष से संबंध खराब कर सकता है। 
  • इसके अलावा द्वादश भाव में मांगलिक दोष के बनने से जातक को वैवाहिक जीवन में कठिनाई होने के साथ-साथ कुछ शारीरिक क्षमताओं में कमी, क्षीण आयु, जीवन में कई प्रकार के रोग, कलह-झगड़े आदि की समस्या दे सकता है। 

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मांगलिक दोष के उपाय

  • कुंडली में मांगलिक दोष को कम करने के लिए जातक को अपनी कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत करने की ज़रूरत होती है। इसके लिए जातक को नियमित रूप से “ॐ भौमाय नम: और ॐ अं अंगारकाय नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए। 
  • नियमनुसार जातक को मंगलवार के व्रत का पालन करना चाहिए। 
  • हर मंगलवार हनुमान जी की पूजा-आराधना कर हनुमान मंदिर में बूंदी का प्रसाद बांटना उचित रहता है। 
  • मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करके भी मंगल दोष को कम किया जा सकता है। 
  • मंगलवार के दिन केवल लाल कपड़े ही धारण करने चाहिए या अपने पास हमेशा एक लाल रंग का रुमाल रखना चाहिए। 
  • व्यक्ति को हनुमान मंदिर में लाल सिंदूर व लाल चोला चढ़ाते हुए, हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। 
  • हर मंगलवार जरूरतमंद व गरीबों में लाल मसूर की दाल अथवा लाल वस्त्र का दान करना भी उचित रहता है। 
  • कुंडली से मंगल दोष को कम करने के लिए मंगल ग्रह से संबंधित दान करना भी अनुकूल होता है। 
  • मांगलिक दोष के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए आप ऑनलाइन मंगल दोष निवारण पूजा भी करवा सकते हैं। 

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