चैत्र नवरात्रि 2025 का चौथा दिन: इस पूजन विधि से करें मां कूष्‍मांडा को प्रसन्‍न!

चैत्र नवरात्रि 2025 का चौथा दिन: इस पूजन विधि से करें मां कूष्‍मांडा को प्रसन्‍न!

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: चैत्र नवरात्रि 2025 की शुरुआत हो चुकी है और इस दौरान भक्‍त नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्‍न नौ रूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि का प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के एक अलग स्‍वरूप को समर्पित होता है जिसमें हर देवी के लिए विशिष्‍टअनुष्‍ठान, रंग और पूजन विधि आदि होती है। नवरात्रि के चौथे दिन को चतुर्थी के नाम से जाना जाता है और यह दिन मां कूष्‍मांडा को स‍मर्पित है जिन्‍हें ब्रह्मांड के निर्माता के रूप में पूजा जाता है।

एस्‍ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्‍लॉग में हम आपको नवरात्रि के चौथे दिन के महत्‍व, तिथि, समय, पूजन विधि और मां दुर्गा के चौथे रूप देवी कूष्‍मांडा से जुड़ी कथा के बारे में बता रहे हैं। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं नवरात्रि के चौथे दिन के बारे में।

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चैत्र नवरात्रि 2025 का चौथा दिन: समय और तिथि

चैत्र नवरात्रि 2025 की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 01 अप्रैल, 2025 को सुबह 05 बजकर 45 मिनट पर होगी और इसका समापन 02 अप्रैल, 2025 को रात्रि 02 बजकर 35 मिनट पर होगा।

मां कूष्‍मांडा का महत्‍व

कूष्‍मांडा नाम संस्‍कृत के तीन शब्‍दों से मिलकर बना है जिसमें कू (थोड़ा), ऊष्‍मा (ऊर्जा की गर्माहट) और अंडा (डिंब) शामिल है। इन तीनों शब्‍दों को जोड़कर कूष्‍मांडा नाम बनता है जिसका अर्थ है ब्रह्मांडीय का निर्माण करने वाली। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि मां कूष्‍मांडा की दिव्‍य मुस्‍कान से ब्रह्मांड की रचना हुई थी जिससे पूरी सृष्टि में प्रकाश और ऊर्जा का संचार हुआ।

मां कूष्‍मांडा की आठ भुजाएं जिनमें वह अस्‍त्र, रुद्राक्ष की माला और अमृत कलश रखती हैं जो कि उनकी श‍क्ति और करुणा का प्रतीक हैं। देवी कूष्‍मांडा सिंह पर सवार रहती हैं जो कि साहस और शक्‍ति को दर्शाता है।

माना जाता है कि मां कूष्‍मांडा की पूजा करने से उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य, संपत्ति और शक्‍ति की प्राप्‍त‍ि होती है। उनका हरियाली और वनस्‍पति से भी संबंध है जो कि शांति और विकास का प्रतीक है। ऐसा कहा जाता है कि जब पूरा ब्रह्मांड अंधकार में डूब गया था, तब मां कूष्‍मांडा ने अपनी मुस्‍कान से पूरे संसार को प्रकाशमय किया था। इस वजह से प्रकाश फैलाने वाले सूर्य से मां कूष्‍मांडा का संबंध माना जाता है और देवी कूष्‍मांडा की पूजा में नारंगी रंग को अधिक महत्‍व दिया जाता है।

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मां कूष्‍मांडा का ज्‍योतिषीय महत्‍व

चैत्र नवरात्रि 2025 के चौथे दिन के स्‍वामी सूर्य देव हैं जो कि ऊर्जा, शक्‍ति और उत्‍साह का प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिन देवी कूष्‍मांडा की पूजा करने से भक्‍तों को शक्‍ति, प्रतिभा और सफलता की प्राप्‍ति होती है।

मां कूष्‍मांडा के लिए शुभ रंग, भोग और मंत्र

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा को प्रसन्‍न करने के लिए पूजन के समय भक्‍तों को नारंगी रंग के वस्‍त्र पहनने चाहिए। इसके अलावा आप मां कूष्‍मांडा को नारंगी और गुलाब के फूल अर्पित करें।

नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्‍मांडा को भोग में मालपुआ, शहद, नारियल और फल भी चढ़ा सकते हैं।

मंत्र:

प्रार्थना मंत्र:

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।।

स्‍तुति:

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

कालसर्प दोष रिपोर्ट – काल सर्प योग कैलकुलेटर

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा की पूजा का धार्मिक महत्‍व

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा का पूजन करने से निम्‍न लाभ मिलते हैं:

  • नकारात्‍मक ऊर्जा का नाश: मां कूष्‍मांडा की कृपा प्राप्‍त करने से जीवन से अंधकार, भय और नकारात्‍मकता दूर होती है।
  • सेहत और जीवन शक्‍ति में सुधार: मां कूष्‍मांडा सूर्य की ऊर्जा की अधिष्‍ठात्री देवी हैं इसलिए उनकी पूजा करने से शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को मज़बूती मिलती है।
  • समृद्धि और शांति: देवी अपने भक्‍तों को भौतिक सुख-समृद्धि, सफलता और आर्थिक स्थिरता प्रदान करती हैं।
  • बुद्धि और रचनात्‍मकता में वृद्धि: मां कूष्‍मांडा का ज्ञान, बुद्धि और रचनात्‍मकता से भी संबंध है। छात्र और पेशेवर लोग शिक्षा एवं करियर में उन्‍नति के लिए उनकी उपासना करते हैं।

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चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: पूजन विधि

इस पवित्र दिन पर सबसे पहले कलश और उसमें विराजमान सभी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।

इसके बाद मां कूष्‍मांडा की उपासना करें।

अनुष्‍ठान शुरू करने से पहले अपने हाथ में ताज़े पुष्‍प लें, उनके सामने अपना सिर झुकाएं और पूरे भक्‍ति-भाव से उनके मंत्रों का जाप करें।

भोग चढ़ाते समय श्रद्धा और भक्‍ति के रूप में देवी को फल, फूल और सूखे मेवे अर्पित करें।

इसके बाद दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करें। यदि किसी कारण से आप पूरे ग्रंथ का पाठ नहीं कर सकते हैं, तो आप कम से कम कवच, अर्गला और कीलक का पाठ कर सकते हैं।

इसके पश्‍चात् मां कूष्‍मांडा से अपनी मनोकामना मांगें और प्रार्थना करते हुए आरती करें।

पूजन के समय मौजूद सभी भक्‍तों में प्रसाद बांटें और पूजा के दौरान अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए देवी मां से क्षमा मांगें।

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चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: राशि अनुसार उपाय

मेष राशि: नवरात्रि की पूजा करने के बाद मां कूष्‍मांडा का ध्‍यान और देवी के मंत्रों का जाप करें। उन्‍हें लाल रंग के पुष्‍प और सिंदूर अर्पित करें।

वृषभ राशि: इस दिन वृषभ राशि के जातक नहाने के बाद लाल रंग के कपड़े पहनें और देवी मां का पूजन करते समय लाल रंग के आसन पर बैठें। इस उपाय को करने से आपको अपने शत्रुओं से निजात मिल सकती है।

मिथुन राशि: अपने मन के भय को दूर करने और अपनी आभा को शुद्ध करने के लिए आप अपने बिस्‍तर के पास सेंधा नमक रखें। मां कूष्‍मांडा को चावल से बनी खीर चढ़ाएं और फिर इसे छोटी कन्‍याओं में बांट दें।

कर्क राशि: अपने घर के पूजन स्‍थल में नवरात्रि के चौथे दिन पूजन करने के बाद मां कूष्‍मांडा के मंत्रों का जाप करें। देवी को चंदन का तिलक लगाने के बाद अपने माथे पर भी चंदन का तिलक लगाएं।

सिंह राशि: नवरात्रि के चौथे दिन दीपक में लौंग और कपूर डालकर जलाएं। इससे आपके जीवन से सारी नकारात्‍मकता दूर हो जाएगी। आप अपने माथे पर रोली से तिलक लगाएं।

कन्‍या राशि: नवरात्रि के चौथे दिन पूजन करने के बाद 108 बार मां कूष्‍मांडा के मंत्र का जाप करें। आपको बुरी नज़र से रक्षा प्राप्‍त होगी।

तुला राशि: मां कूष्‍मांडा के आगे गुग्‍गल की धूप जलाएं और दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करें। इस उपाय को करने से आपके शत्रु परास्‍त होंगे।

वृश्चिक राशि: नवरात्रि के चौथे दिन वृश्चिक राशि वाले ‘ॐ देवी कूष्माण्डायै नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें और अपने एवं अपने परिवार के सदस्‍यों की कलाई पर मौली बांधें।

धनु राशि: नवरात्रि की पूजा करने के बाद कुछ देर के लिए ध्‍यान करें, कल्‍पना करें कि आपका जीवन आनंद, समृद्धि और उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य से भर गया है।

मकर राशि: चौथे नवरात्रि की पूजा करने के बाद 108 बार मां कूष्‍मांडा के मंत्र का जाप करें और उन्‍हें घी में लिपटा हुआ लौंग का जोड़ा चढ़ाएं। इस उपाय को करने से नौकरी और व्‍यवसाय में लाभ होता है।

कुंभ राशि: नवरात्रि के चौथे दिन कुंभ राशि वाले मां कूष्‍मांडा के सामने मिट्टी के दीये में दो कपूर जलाएं। इस दिन गरीब और ज़रूरतमंद लोगों खासतौर पर छोटी कन्‍याओं को खीर और अन्‍न का दान करें।

मीन राशि: मां कूष्‍मांडा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और देवी मां से क्षमा एवं समृद्धि का आशीर्वाद मांगें।

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अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

प्रश्‍न 1. चैत्र नवरात्रि 2025 का चौथा दिन कब है?

उत्तर. चैत्र नवरात्रि 2025 की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 01 अप्रैल, 2025 को सुबह 05 बजकर 45 मिनट पर होगी और इसका समापन 02 अप्रैल, 2025 को रात्रि 02 बजकर 35 मिनट पर होगा।

प्रश्‍न 2. नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के किस रूप की पूजा की जाती है?

उत्तर. इस दिन देवी कूष्‍मांडा की पूजा होती है।

प्रश्‍न 3. देवी कूष्‍मांडा से किस ग्रह का संबंध है?

उत्तर. देवी कूष्‍मांडा से सूर्य ग्रह का संबंध है।