चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन: चैत्र नवरात्रि 2025 नौ दिनों का पर्व है जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक अलग रूप की पूजा की जाती है और उनके हर रूप के लिए अलग एवं विशेष अनुष्ठान, प्रार्थनाएं और रंग निर्धारित हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन को तृतीया के नाम से जाना जाता है जो कि मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा रूप हैं। तीसरा नवरात्रि अत्यंत धार्मिक महत्व रखता है एवं यह साहस, शांति और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।
इस बार चैत्र नवरात्रि तृतीया और द्वितीया तिथि दोनों एक ही दिन पड़ रही हैं। एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको नवरात्रि के तीसरे दिन की तिथि और समयावधि के बारे में बता रहे हैं। इसके साथ ही जानेंगे मां चंद्रघंटा का आध्यात्मिक महत्व क्या है और इस दिन किस विधि से देवी मां का पूजन किया जाता है। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं नवरात्रि के तीसरे दिन के बारे में।
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चैत्र नवरात्रि 2025 तीसरा दिन: तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार द्वितीया और तृतीया तिथि एक ही दिन यानी 31 मार्च, 2025 को है और इसकी समयावधि निम्न प्रकार से है:
द्वितीया तिथि का समय: 30 मार्च, 2025 को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 31 मार्च, 2025 को सुबह 09 बजकर 13 मिनट पर समाप्त।
तृतीया तिथि का समय: 31 मार्च, 2025 को सुबह 09 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर 01 अप्रैल, 2025 को सुबह 05 बजकर 45 मिनट पर समाप्त है।
इस प्रकार आप 31 मार्च, 2025 को सुबह 09 बजकर 13 मिनट के बाद तृतीया तिथि की पूजा कर सकते हैं।
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चैत्र नवरात्रि 2025 तीसरा दिन: महत्व
माना जाता है कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जीवन में सुख और शांति आती है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों पर शीघ्र कृपा दिखाती हैं और उन्हें चिंताओं एवं परेशानियों से मुक्त करती हैं। शेर पर सवार मां चंद्रघंटा दया, साहस और शांति प्रदान करती हैं जिससे भक्तों को अड़चनों को पार करने एवं आंतरिक शांति प्राप्त करने में मदद मिलती है। कहते हैं कि उनकी घंटी जैसी प्रतिध्वनि नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी आत्माओं को दूर भगाती है और अपने भक्तों को सुरक्षा प्रदान करती हैं।
जो भी भक्त सच्चे मन से मां चंद्रघंटा की पूजा करता है, उसे शांति मिलती है एवं अपने निजी जीवन और करियर में सफलता प्राप्त होती है।
मां चंद्रघंटा का महत्व
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है जो कि मां दुर्गा का तीसरा रूप है। मां चंद्रघंटा को दया, साहस और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार में सुशोभित रहता है और इसी वजह से उन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। वह उग्र होने के साथ-साथ दयालु भी हैं। वह शांति प्रदान करने के साथ-साथ बुरी शक्तियों का नाश करने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं।
मां चंद्रघंटा सिंह पर सवार रहती हैं जो कि साहस और शक्ति का प्रतीक है। उनका यह स्वरूप भक्तों को जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने की प्रेरणा देता है। उनका सुनहरा स्वरूप दिव्य तेज से आलोकित होता है। देवी के दस हाथ हैं जिनमें तलवार, त्रिशूल, धनुष, बाण, गदा और कमंडल सहित अनेक अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं जो कि उनकी अपने भक्तों की रक्षा करने की तत्परता और पराक्रम को दर्शाते हैं। उनके एक हाथ में कमल का फूल भी रहता है जो कि पवित्रता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। वहीं उनका एक हाथ अभय मुद्रा में रहता है जो कि आश्वासन और सुरक्षा का संकेत देता है।
रौद्र रूप होने के बावजूद देवी चंद्रघंटा शांति और करुणा का प्रतीक हैं। जो भक्त सच्चे मन से मां चंद्रघंटा की आराधना करते हैं, उन्हें आंतरिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और मानसिक स्पष्टता मिलती है जिससे वे अपने जीवन में सही निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। मां चंद्रघंटा का संबंध मणिपुर चक्र से है जो कि आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और खुद में बदलाव लाने को नियंत्रित करता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी उपासना से दिव्य चेतना जागृत होती है, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है और ब्रह्मांड के साथ मज़बूत संबंध स्थापित होता है।
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मां चंद्रघंटा की पूजा का ज्योतिषीय महत्व
शुक्र ग्रह से संबंध होने के कारण मां चंद्रघंटा का ज्योतिषीय महत्व बहुत अधिक है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में शुक्र कमज़ोर या नीच का होता है, उन्हें सुख-सुविधाओं, रिश्तों, रचनात्मक कार्यां में अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसा माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से शुक्र के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है और उसके नकारात्मक प्रभाव में कमी आती है एवं व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, सौंदर्य और समृद्धि का आगमन होता है। जो जातक संतुलन, प्रेम और कला के क्षेत्र में सफलता पाना चाहते हैं, वे मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं।
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चैत्र नवरात्रि 2025: मां चंद्रघंटा को क्या चढ़ाएं
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को अर्पित की जाने वाली चीज़ों का चयन सावधानीपूर्वक करना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कुछ चीज़ें मां चंद्रघंटा की दिव्य कृपा को आकर्षित करती हैं। इनमें से दूध अत्यधिक महत्व रखता है और इसे मां चंद्रघंटा के पूजन में ज़रूर शामिल करना चाहिए। देवी को दूध अर्पित करने के बाद इसे किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद व्यक्ति को दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
दूध के अलावा मां चंद्रघंटा को सफेद रंग की चीज़ें जैसे कि खीर, मिश्री और सफेद रंग के फूल भी चढ़ा सकते हैं क्योंकि ये चीज़ें पवित्रता और आस्था का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके अलावा शहद भी चढ़ा सकते हैं जो कि मिठास, आरोग्यता और दिव्य ऊर्जा से संबंधित है। मां चंद्रघंटा को शहद चढ़ाने से समृद्धि और ज्ञान मिलता है एवं जीवन में सुख-शांति आती है।
इसके अलावा देवी मां की मूर्ति या तस्वीर पर चंदन लगाने और उन्हें लाल एवं पीले रंग के पुष्प अर्पित करने की सलाह दी जाती है। ये चीज़ें आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाती हैं और पूजा के लिए शांत वातावरण निर्मित करती हैं।
मां चंद्रघंटा के लिए मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
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चैत्र नवरात्रि 2025 के तीसरे दिन के लिए राशि अनुसार उपाय
मेष राशि: आप सुबह और शाम के समय मां चंद्रघंटा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ध्यान रखें कि दीपक बुझे नहीं क्योंकि इससे घर में सकारात्मकता बनी रहेगी।
वृषभ राशि: मां चंद्रघंटा को वृषभ राशि वाले फल और चमेली का फूल अर्पित करें।
मिथुन राशि: इस राशि वाले मां चंद्रघंटा की उपासना करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
कर्क राशि: आप रोज़ लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करने के साथ मां चंद्रघंटा की पूजा करें और उन्हें लाल रंग के पुष्प चढ़ाएं।
सिंह राशि: इस राशि वाले दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और मां चंद्रघंटा को तांबे के सिक्के या तांबे का छत्र चढ़ाएं।
कन्या राशि: जिनकी कन्या राशि है, वे मां लक्ष्मी की पूजा करें और नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
तुला राशि: मां चंद्रघंटा को चावल और दूध से बनी खीर का भोग लगाएं।
वृश्चिक राशि: आप मां चंद्रघंटा की पूजा करें। आप गरीब लोगों को लाल रंग के वस्त्र या दालें दान में दें।
धनु राशि: इस राशि वाले दूध और गुड़ से बनी मिठाई देवी मां को चढ़ाएं और उनके आगे दीपक जलाएं। इससे जीवन में सकारात्मकता आती है। माथे पर हल्दी का तिलक लगाना भी शुभ रहेगा।
मकर राशि: शाम के समय मकर राशि वाले साफ वस्त्र पहनें और देवी मां को भोग चढ़ाएं एवं भोग में सेब और केला अर्पित करें।
कुंभ राशि: आपको मां चंद्रघंटा की उपासना करनी चाहिए और देवी कवच का पाठ करना चाहिए। आप मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई चढ़ाएं।
मीन राशि: इस राशि वाले मां चंद्रघंटा की हल्दी की माला से पूजा करें और उन्हें घर पर सूजी से मिठाई बनाकर चढ़ाएं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर. 31 मार्च, 2025 को चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है।
उत्तर. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना होती है।
उत्तर. मां चंद्रघंटा से शुक्र ग्रह का संबंध है।