चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन: चैत्र नवरात्रि 2025 के नौ दिनों के उत्सव में दूसरा दिन मां ब्रह्माचारिणी को समर्पित होता है जो कि मां दुर्गा का दूसरा एवं अविवाहित रूप है। ब्रह्माचारिणी नाम संस्कृत शब्द ‘ब्रह्म’ से आया है जिसका अर्थ तपस्या होता है एवं चारिणी का मतलब होता है महिला अनुयायी। इस प्रकार मां ब्रह्माचारिणी तपस्या, भक्ति और संयम का प्रतीक हैं। नवरात्रि का दूसरा दिन अत्यंत महत्व रखता है क्योंकि इस अवसर पर भक्त बुद्धि, धैर्य और आत्म-अनुशासन की कामना के लिए मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करते हैं।
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इस साल चैत्र नवरात्रि 2025 का दूसरा और तीसरा नवरात्रि एक ही दिन पड़ रहा है। एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग के ज़रिए हम आपको बता रहे हैं कि नवरात्रि का दूसरा दिन कब है और इसका समापन किस समय होगा। इसके साथ ही मां ब्रह्माचारिणी के महत्व एवं दूसरे नवरात्रि की पूजन विधि के बारे में भी आगे बताया गया है। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजन विधि एवं महत्व क्या है।
चैत्र नवरात्रि 2025 दूसरा दिन: समय और तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल द्वितीया और तृतीया तिथि दोनों एक ही दिन पड़ रहे हैं। 31 मार्च को द्वितीया और तृतीया तिथि हैं और इनका समय निम्न है:
द्वितीया तिथि का समय : 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 31 मार्च, 2025 को सुबह 09 बजकर 13 मिनट पर समाप्त।
तृतीया तिथि का समय: 31 मार्च को सुबह 09 बजकर 13 मिनट पर शुरू होकर 01 अप्रैल, 2025 को प्रात: 05 बजकर 45 मिनट पर समाप्त।
मां ब्रह्माचारिणी की पूजा का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्माचारिणी का संबंध मंगल ग्रह से होता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में मंगल कमज़ोर या नीच का होता है, उन्हें मां ब्रह्माचारिणी की पूजा ज़रूर करनी चाहिए।
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मां ब्रह्माचारिणी का महत्व
मां ब्रह्माचारिणी का बहुत गहरा आध्यात्मिक महत्व है और इसी के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा होती है। वह सांसारिक और दिव्य ज्ञान दोनों का प्रतिनिधत्व करती हैं एवं वह बुद्धि का भी प्रतीक हैं। शांत और संयमित स्वरूप में मां ब्रह्माचारिणी सफेद रंग के वस्त्र धारण किए होती हैं और उनके एक हाथ में अष्टदल की माला एवं दूसरे हाथ में कमंडल होता है। ये चीज़ें उनकी कठोर तपस्या और तप की भावना को दर्शाते हैं। मां दुर्गा के इस स्वरूप में उन्हें पवित्र ग्रंथों, अनुष्ठानों एवं आध्यात्मिक ज्ञान के लिए पूजा जाता है।
भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से मां ब्रह्माचारिणी की उपासना करने से उनकी दिव्य कृपा प्राप्त होती है। उनकी पूजा से खासतौर पर बुद्धि एवं ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है। उनका स्वरूप शांत और दिव्य है एवं अत्यंत सौम्य और करुणामयी होने की वजह से वे मां दुर्गा के अन्य रूपों से एकदम भिन्न हैं। मां अपने भक्तों पर कभी भी क्रोध नहीं करती हैं और जो भी उनकी शरण में आता है, उस पर शीघ्र अपनी कृपा बरसाती हैं।
ब्रह्माचारिणी नाम दो संस्कृत शब्दों से बना है जिसमें से एक ब्रह्म और दूसरा चारिणी है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ होता है उसका पालन करने वाला। इस तरह ब्रह्माचारिणी नाम का अर्थ बनता है ‘जो तपस्या के मार्ग पर चलता हो’। मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, दीर्घायु और साहस का आशीर्वाद मिलता है।
मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप को ‘ब्राह्मी’ के नाम से भी जाना जाता है। जो जातक चिंता, भावनात्मक तनाव या नकारात्मक परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें मां ब्रह्माचारिणी की पूजा एवं व्रत करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि उनकी दिव्य उपस्थिति बेचैन मन को शांति, स्थिरता एवं आंतरिक शांति मिलती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार मां दुर्गा ने पर्वतों के शासक राजा हिमावत की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया था। महर्षि नारद की सलाह से मां पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। माता ने कई वर्षों तक पूरी लगन और सच्ची भक्ति के साथ तप किया जिसकी वजह से उन्हें ‘तपश्चारिणी’ या ‘ब्रह्माचारिणी’ नाम मिला। तपस्या के दौरान मां पार्वती ने कठोर व्रत किया और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए गहन ध्यान में लीन रहीं।
उनकी इस तपस्या और भक्ति को सम्मान देने के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के इस तपस्विनी रूप की पूजा की जाती है जो भक्तों को अपनी आध्यात्मिक यात्रा में अनुशासन, धैर्य और अटूट विश्वास रखने के लिए प्रेरित करता है।
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चैत्र नवरात्रि 2025 दूसरा दिन: मां ब्रह्माचारिणी की पूजन विधि
- नवरात्रि के दूसरे दिन आप प्रतिपदा तिथि को स्थापित किए गए कलश की पूजा करें और इसके साथ ही भगवान गणेश का भी पूजन करें।
- पूजन के दौरान पुष्प, चंदन और रोली अर्पित करें।
- इस दिन पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करने से पहले उनकी मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से स्नान करवाएं।
- मां ब्रह्माचारिणी की पूजा में कमल का फूल ज़रूर रखें। इसके अलावा उन्हें दूध से बना भोग या मिठाई चढ़ाएं।
- चैत्र नवरात्रि 2025 के दूसरे दिन भक्तों को दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। यदि आप पूरा पाठ नहीं कर सकते हैं, तो इस ग्रंथ में से कीलक, अर्गला और कवच का पाठ ज़रूर करें।
- पूजन के आखिर में मां ब्रह्माचारिणी की आरती करें और ज्ञान, शक्ति एवं शांति की कामना करें।
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन के लिए शुभ रंग
नवरात्रि के दूसरे दिन के लिए पीले रंग को शुभ माना जाता है। इस दिन माता रानी को पीले रंग के वस्त्र पहनाने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही भक्तों को भी पूजन के दौरान पीले रंग के वस्त्र ही पहनने चाहिए। पूजन में पीले रंग के पुष्प, मिठाई और पीले रंग की अन्य वस्तुओं को शुभ माना जाता है। यह रंग मां ब्रह्माचारिणी के पालन-पोषण करने वाले स्वरूप को दर्शाता है और इसका संबंध ज्ञान, बुद्धिमत्ता, उत्साह, आनंद और बुद्धि से होता है।
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मां ब्रह्माचारिणी का आशीर्वाद पाने के लिए मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्माचारिणी रूपेण समस्थितल नमस्तस्यै नमतस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
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चैत्र नवरात्रि 2025 के दूसरे दिन के लिए उपाय
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कुंडली में मौजूद मंगल दोष से मुक्ति मिलती है। जिन लोगों को मंगल के अशुभ प्रभावों के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से काफी राहत मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर अगर मंगल कुंडली में मजबूत स्थिति में है, तो मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जमीन और प्रॉपर्टी से संबंधित क्षेत्रों में लाभ होता है और शारीरिक मजबूती मिलती है।
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन निम्न उपाय करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और मां ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- नवरात्रि के दूसरे दिन मंदिर जाएं और मां पार्वती एवं भगवान शिव को जल चढ़ाएं और पुष्प अर्पित करें। इनकी पंचोपचार से पूजा करें।
- इसके बाद शिव और पार्वती जी को मौली बांधे। इस उपाय को करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है।
- रामायण काल में माता सीता ने भी विवाह से पूर्व मां गौरी की पूजा की थी और बाद में उनका भगवान राम से मिलन हुआ था। जो स्त्रियां मनचाहा या योग्य वर चाहती हैं, उनके लिए मां गौरी का पूजन करना बहुत महत्व रखता है।
- नवरात्रि के दसूरे दिन स्नान करने के बाद दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप करें। इससे मनचाहा जीवनसाथी मिलने के योग बनते हैं और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- अपने ज्ञान को बढ़ाने और जीवन में सुख-शांति की कामना से आप मां ब्रह्माचारिणी का निम्न श्लोक पढ़ सकते हैं:
“तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारिणी, ब्रह्मरूपा धारा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।” शंकर प्रिया त्वं हि भुक्ति-मुक्ति दायिनी, शांतिदा ज्ञान दा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्”।।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर. 31 मार्च, 2025 को दूसरा नवरात्रि है।
उत्तर. दूसरे दिन मां ब्रह्माचारिणी की पूजा होती है।
उत्तर. मां ब्रह्माचारिणी का मंगल ग्रह से संबंध है।