घर में सजाइए क्रिसमस ट्री और पाएं वास्तु दोष से छुटकारा!

यूँ ही नहीं सजाया जाता क्रिसमस ट्री बल्कि इसके पीछे होता हैं ये विशेष महत्व ! शीत ऋतु दस्तक दे चुकी है। शीत ऋतु के साथ-साथ बड़े दिन की तैयारियां भी हम प्रारंभ कर देते हैं। इस दिन की तैयारियों में बच्चे खासा उत्सुक होते हैं। क्रिसमस  ईसाईयों का एक महत्वपूर्ण पर्व है। ईसाई धर्म क्या इस त्योहार को हर धर्म के लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। त्यौहार चाहे जो भी हो इसे हमें पूर्ण प्रसन्नता के साथ मिल जुलकर मनाना चाहिए। आखिर हमारे जीवन का लक्ष्य है आनंद व प्रसन्नता।

क्रिसमस ट्री खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

इस त्यौहार में सर्वप्रथम हम क्रिसमस ट्री खरीद कर लाते हैं। ऐसे में इस पौधे के चयन करते समय ध्यान रहे कि यह पौधा अस्वस्थ व मुरझाया हुआ ना हो। अगर यह पौधा घर का मुखिया या पुरुष लाए तो ‘यांग’ ऊर्जा का संचार होता है। वहीं इस की सजावट स्त्री या महिला करे तो ‘यिन’ ऊर्जा का संचार होकर ब्रह्मांड की दो विरोधी शक्तियों का संतुलन स्थापित होता है। जो कि एक अच्छी फेंगशुई का आधार है। यह पौधा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इस पौधे को घर की अलग-अलग दिशाओं में लगाकर उचित लाभ लिया जा सकता है।

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किस दिशा में रखें क्रिसमस ट्री ?

  • सर्वप्रथम इस पौधे को घर के अग्नि कोण अर्थात दक्षिण पूर्व दिशा में लगाने से आय में वृद्धि होती है। जिससे रुके हुए कार्य व पैसा मिलने की संभावना बनती है। व्यापार में आय के नए साधन व नौकरी में प्रमोशन की संभावना बनती है।
  • इस पौधे को पूर्व दिशा में लगाने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है। आपसी प्रेम व सहयोग की भावना विकसित होती है ।
  • इस पौधे को घर की दक्षिण दिशा में लगाने से जीवन में प्रसिद्धि व यश की प्राप्ति होती है। युगल में प्रेम का विस्तार होता है और जीवन में स्थिरता आती है व विकास होता है।
  • अगर इस पौधे को ईशान कोण (उत्तर पूर्व ) दिशा में लगाएं तो निर्मल ह्रदय को शक्ति मिलती है। अवसाद से मुक्ति मिलकर कार्य क्षमता में वृद्धि आती है। प्रयास हीनता से मुक्ति मिल आशायें जन्म लेती है।
  • ध्यान रहे इस पौधे को मुख्य द्वार या घर के मध्य (ब्रह्मस्थान ) पर ना लगाएं । सकारात्मक ऊर्जा अवरोधित हो सकती है।

क्रिसमस ट्री की सजावट का महत्व

  • इस पौधे का आधार अर्थात् तला सबल रखें, ताकि यह हिले व डुले नहीं व मजबूती से स्थिर रहे ।
  • सजावट के लिए प्रायः हम कई रंगों का प्रयोग करते। हर रंग व सामग्री का अपना एक महत्व होता है। जो कि अगर विवेक पूर्ण किया जाए तो औपचारिक रूप में काम करता है। समस्याओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
  • क्रिसमस ट्री पर अखरोटनुमा बाल टांगी जाती है। यह व्यक्ति में विवेक व मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन करती है।
  • क्रिसमस ट्री पर सुनहरी बाल ज्ञान, विवेक का विस्तार का प्रतीक है। यह व्यक्ति को मानसिक बल देती है। वहीं चांदी के रंग की बाल शीतलता का प्रतीक है। शांत मन व सच्चाई का प्रतिनिधित्व करता है।
  • क्रिसमस ट्री को हिरण का चित्र या प्रतिमा से भी सजाया जाता है। जो कि उच्च स्वास्थ्य का प्रतीक है। हिरण एक दीर्घायु व स्वस्थ प्राणी है, जो कि उच्च स्वास्थ्य का विस्तार करता है।
  • क्रिसमस ट्री पर लाल फीते  में बांधकर सुनहरे सिक्के टांगे जाते हैं। जो धन संपत्ति  के अपव्यय से हमें बचाते है। धन के सदुपयोग के लिए यह एक शक्तिशाली प्रयोग है।
  • लाल फीते में बांधकर घंटियां भी टांगी जाती हैं। जो कि जीवन में मिठास व सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
  • क्रिसमस ट्री पर लाल दिल टांगे जाते हैं। जो प्रेम व सहयोग का विस्तार करता है।
  • तथा लाल फलों को टांगना  सफलता व समृद्धि का प्रतीक है।
  • क्रिसमस ट्री के सबसे ऊपर एक स्टार लगाया जाता है, जो हमारे सभी उद्देश्य व महत्वाकांक्षाओं को विस्तार देता है। अर्थात् आकाश तत्व प्रदान करता है।
  • अंत में गोल्डन पाउडर छिड़का जाता है। जो संपत्ति का सदुपयोग व सही संचार को दर्शाता है।
  • क्रिसमस ट्री के नीचे घर या हट की आकृति रखी जाती है , जो कि सुख व समृद्धि का प्रतीक है।
  • ध्यान रहे प्रायः क्रिसमस ट्री की तैयारी में अत्याधिक लाल रंग का प्रयोग किया जाता है।
  • लाल रंग प्रेम का प्रतीक है किंतु इसका अत्यधिक प्रयोग क्रोध व हिंसा को भी जन्म देता है।
  • हर रंग का प्रयोग संतुलित ढंग से करें।

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कुल मिलाकर क्रिसमस ट्री एक पूर्ण संतुलन यंत्र की तरह हमारे सभी तत्वों का संतुलन कर जीवन व परिवार में सुख शांति व समृद्धि लाता है। तभी तो इसको देखने मात्र से ही आंखों को असीम खुशी व प्रसन्नता का एहसास होता है।

आप सभी को बड़े दिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।

दीप्ति जैन
आधुनिक वास्तु एस्ट्रो विशेषज्ञ

दीप्ति जैन एक जानी-मानी वास्तुविद हैं, जिन्होंने पिछले 3 सालों से वास्तु विज्ञान के क्षेत्र में अपने कौशल और प्रतिभा को बखूबी दर्शाया है। उनके इस योगदान के लिए उन्हें कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। दीप्ति जैन न केवल वास्तु बल्कि सामाजिक मुद्दों, हस्‍तरेखा विज्ञान, अध्यात्म, कलर थेरेपी, सामुद्रिक शास्त्र जैसे विषयों की भी विशेषज्ञ हैं।

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