महा सूर्य ग्रहण: कल बरतें यह सावधानियां!

सूर्य ग्रहण के दौरान पड़ने वाले बुरे प्रभावों को दूर करने के लिये करें यह उपाय। साथ ही जानें सूतक काल की पूरी जानकारी। 

सूर्य ग्रहण की खगोलीय घटना को हिंदू धर्म में बहुत प्रमुखता दी गई है। हमारी संस्कृति में व्रत-त्योहारों और धार्मिक आयोजनों को बहुत प्रमुखता दी गई है। सूर्य ग्रहण भी इन्हीं में से एक है। अधिकांश लोगों को साल में घटित होने वाले सूर्य ग्रहणों की सही तारीख और तिथि का पता करते देखा जा सकता है, क्योंकि कई ऐसी बातें हैं जिन्हें सूर्य ग्रहण के दौरान ध्यान में रखा जाता है।

धार्मिक दृष्टिकोण से भी, ज्योतिषी इस दिन कुछ उपायों का पालन करने की सलाह देते हैं जिन्हें इस दिन माना जाना चाहिये। सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिन्हें स्मरण करना भी गलत माना जाता है। साल 2019 में तीन बार सूर्य ग्रहण की घटना घटित होनी थी, इन तीन में से दो ग्रहण पहले ही हो चुके हैं। साल का अंतिम सूर्य ग्रहण  26 दिसंबर 2019 को होगा और यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य एशियाई देशों में दिखाई देगा। भारत के दक्षिणी क्षेत्र में यह वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। आईये अब जानते हैं आने वाले वलयाकार सूर्य ग्रहण के बारे में।

वलयाकार सूर्य ग्रहण का समय और दृश्यता

दिनांक समय दृश्यता 
26 दिसंबर  2019 सुबह 08:17:02 बजे से 10:57:09 तक भारत(आंशिक दृश्यता) और अन्य एशियाई देश, ऑस्ट्रेलिया

वलयाकार सूर्य ग्रहण: ज्योतिषीय अध्ययन

जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि सूर्य ग्रहण का हिंदू संस्कृति में बड़ा महत्व है। सूर्य ग्रहण की घटना तब घटित होती है जब चंद्र ग्रह, सूर्य और पृथ्वी के मध्य में आ जाता है और सूर्य को आंशिक या पूर्ण रुप से ढक देता है। चूंकि सूर्य ग्रहण हमारे देश में भी आंशिक रुप से देखा जाएगा इसलिये हमें ज्योतिषीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उनका पालन करना चाहिये, इन उपायों के बारे में नीचे बताया गया है।

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 हिंदू पंचांग के अनुसार, तीसरा और वलयाकार सूर्य ग्रहण 2019 पौष मास की अमावस्या तिथि को घटित होगा। ज्योतिषीय गणनाएं बताती हैं कि यह सूर्य ग्रहण धनु राशि में और मूल नक्षत्र में होगा। इसलिये कहा जा सकता है कि दी गई राशि और नक्षत्र से संबंधित लोगों को इस दौरान प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। धनु राशि का स्वामी ग्रह बृहस्पति है जबकि मूल नक्षत्र का स्वामी क्रूर केतु ग्रह है। इस ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिये धनु और मूल नक्षत्र से संबंधित लोगों को इन ग्रह और नक्षत्र के स्वामियों को शांत करना चाहिये। इसके लिये आप गुरु यंत्र और केतु यंत्र को धारण कर सकते हैं या इन्हें घर में स्थापित कर सकते हैं।

वलयाकार सूर्य ग्रहण 2019 : सूतक काल

किसी भी ग्रहण के दौरान लगने वाले सूतक काल को अशुभ समय के रुप में देखा जाता है, इस समय कुछ ऐसे काम हैं जिनको करना सही नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि सूतक काल के दौरान किसी भी शुभ काम को करने से शुभ फलों की प्राप्ति नहीं होती। सूतक काल किसी भी ग्रहण से कुछ समय पहले शुरु हो जाता है और ग्रहण के बाद खत्म हो जाता है। सूतक काल की समाप्ति के बाद हर किसी को स्नान अवश्य करना चाहिये। हालांकि सूतक काल के दौरान बरती जानें वाली सावधानियां बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिये आवश्यक नहीं होतीं। आइये अब सूर्य ग्रहण 2019 के दौरान सूतक की समयावधि पर नजर डालते हैं। इसके बारे में नीचे बताया गया है।

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                सूतक काल प्रारंभ शाम 08:17 बजे,  दिसंबर 25, 2019
                सूतक काल समाप्ति सुबह 10:57 बजे तक, दिसंबर 26, 2019

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ ऐसी बातें हैं जिनका हमें ध्यान रखना चाहिये। आईये अब जानते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिये और क्या नहीं।

सूतक के दौरान करें यह काम

  • सूतक काल के दौरान प्रभु का ध्यान लगाना चाहिये। इसके साथ ही योग और प्राणायाम करना भी करना चाहिये।
  •  सूर्य ग्रहण से जुडे़ मंत्रों का जाप करके आप इसके बुरे प्रभावों से बच सकते हैं।
  • सूर्य ग्रहण की समाप्ति के बाद अपने घर और घर के सामान की साफ सफाई करनी चाहिये।
  • सूर्य ग्रहण के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • सूर्य ग्रहण की समाप्ति के बाद जल्द से जल्द स्नान करें और घर में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर गंगाजल का छिड़काव करें।
  • अपने इष्ट देवता की स्तुति करें।
  • सूर्य ग्रहण की समाप्ति के बाद नया भोजन बनाएं और खाएं।

सूतक के दौरान न करें यह काम

  • इस दौरान कोई भी नया काम शुरु न करें।
  • खाना खाने और बनाने से बचें।
  • सूर्य ग्रहण के दौरान दांतुन, बालों पर कंघी और मलमूत्र त्याग करने से भी बचें।
  • इस समय आपको देवी-देवताओं की मूर्तियों को और तुलसी के पत्तों को भी नहीं छूना चाहिये।

गर्भवती महिलाएं जरुर बरतें यह सावधानियां

ग्रहण की अवधि गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत संवेदनशील होती है। इसलिए, उन्हें बहुत सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। ऐसी महिलाओं को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए और सब्जियों और फलों की कटाई, सिलाई, बुनाई जैसी गतिविधियाँ से बचना चाहिये। ऐसी जोखिम भरी गतिविधियां करना गर्भ में पल रहे बच्चे के लिये खतरनारक हो सकती हैं। इसलिये जरुरी सावधानियां बरतना जरुरी है।

हम आशा करते हैं कि वलयाकार सूर्य ग्रहण का यह लेख आपको पसंद आया होगा। एस्ट्रोसेज से जुड़े रहने के लिये आपका धन्यवाद।

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