जानें क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी और किन राज्यों में है इसका खास महत्व

रंग पंचमी होली का ही एक रूप है जो देश के कई क्षेत्रों में चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 13 मार्च 2020 (शुक्रवार) के दिन मनाया जा रहा है। होलिका दहन के अगले दिन से रंगों के त्योहार होली की शुरुआत हो जाती है। बता दें रंग पंचमी कोंकण क्षेत्र का अहम त्योहार है, महाराष्ट्र में होली को रंग पंचमी के नाम से जानते हैं।

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पंचम तिथि आरंभ 8:52:50
पंचम तिथि समाप्त  6:19:18

 

महाराष्ट्र की रंग पंचमी

महाराष्ट्र में होली के बाद पंचमी के दिन रंग खेलने की परंपरा है, इस दिन का महाराष्ट्र में खास महत्व। यहां रंग वाली होली यानि धुलंडी से लेकर पंचमी तिथि तक जमकर होली खेली जाती है और रंग पंचमी इस पर्व का आखिरी दिन होता है। इस दिन सूखे गुलाल का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही खास प्रकार के भोजन बनाए जाते हैं, जिसमें पूरनपोली अवश्य होती है। माना जाता है कि मछुआरों के लिए यह दिन बहुत खास होता है। वह इस दिन नाचते, गाते और मस्ती करते हैं। रंग पंचमी के दिन जगह-जगह पर दही हांडी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, इस दौरान महिलाएं मटकी फोड़ने वालों पर रंग फेंकती हैं। जो भी मटकी फोड़ने में सफल होता है उसे पुरस्कार से नवाजा जाता है। 

राजस्थान में रंग पंचमी

राजस्थान में रंग पंचमी के अवसर पर खास तौर से जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्यों में डूबा वातावरण देखने को मिलता है। इस दौरान हवा में नारंगी और फिरोजी रंग उड़ाए जाते हैं। 

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मध्यप्रदेश के इंदौर में रंग पंचमी

मध्यप्रदेश के नगर इंदौर में रंग पंचमी को पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। इस दिन पूरे शहर में रंगारंग जुलूस निकाला जाता है। रंग पंचमी के दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं। गाजे-बाजे के साथ जुलूस की शक्ल में लोग निकलते हैं। बता दें इस जुलूस को गेर कहा जाता है। इस जुलूस में सभी धर्म व जाति के लोग शामिल होते हैं।  पूरा इंदौर इस दिन विभिन्न रंगों में नजर आता है। 

रंग पंचमी का इतिहास

इस पर्व का इतिहास काफी पुराना है। प्राचीन समय में जब होली का उत्सव कई दिनों तक मनाया जाता था। उस वक्त रंग पंचमी के साथ होली पर्व की समाप्ति होती थी और उसके साथ ही रंग खेलना बंद कर दिया जाता था। वास्तव में रंग पंचमी होली का ही एक रूप है जो चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है। होली पर्व फाल्गुन माह के साथ शुरू होता है और फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के बाद यह उत्सव चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से रंग पंचमी तक चलता है

मान्यता है कि इस दिन पवित्र मन से पूजा पाठ करने से देवी देवता स्वयं अपने भक्तों को आशीर्वाद देने आते हैं। माना जाता है कि इस दिन पूजा पाठ करने से कुंडली के बड़े से बड़े दोष काफी हद तक कम हो जाते हैं। 

रंग पंचमी के दिन ऐसे करें पूजा

  • रंग पंचमी के दिन नहाने या मुंह हाथ धोने के पानी में गंगा जल डालकर मुंह-हाथ धोएं
  • मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है इसलिए धन लाभ के लिए इस दिन मां लक्ष्मी को गुलाब के फूल चढ़ाएं।
  • फूल अर्पित करने के बाद घी का दीपक जलाएं।
  • मां लक्ष्मी के सामने गुलाब की अगरबत्ती जलाएं।
  • मां लक्ष्मी को सफेद चीजें पसंद है इसलिए सफेद मिठाई चढ़ाएं।

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