ऐसे करें चैत्र नवरात्रि का शुभ आरंभ, देवी के नौ रूपों की महिमा के साथ

6 अप्रैल 2019 शनिवार से चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा नवरात्र प्रारंभ होकर 14 अप्रैल 2019 को समाप्त होगा। नवरात्रि पर मां भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। आध्यात्मिक उन्नति का यह अलौकिक पर्व है । देश में के विभिन्न राज्यों में यह पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है ।हिमाचल प्रदेश ,हरियाणा ,पंजाब ,मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश  व उत्तराखंड में यह पर्व सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। मां जगदंबा की असीम कृपा अपने भक्तो पर छाया रूप में रहती है । देवी की नौ स्वरूप हैं जिसे नव दुर्गा कहते हैं। देवी के सभी स्वरूपों की पूजन के साथ साथ अगर हम 9 दिन नवग्रहों की शुद्धि भी करें तो हमारे जीवन में सुख, समृद्धि व सफलता की प्राप्ति होगी।

देवी के सभी नौ रूपों का वर्णन इस प्रकार है:

प्रथम शैलपुत्री

प्रथम शैलपुत्री पहाड़ो की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। पहाड़ जल का स्रोत है। जल का अपव्यय मां शैलपुत्री का अपमान है। जो व्यक्ति अमूल्य जल को नियोजित रूप से प्रयोजित करता है वह मां शैलपुत्री के आशीष का हकदार है। प्रथम देवी शैलपुत्री के पूजन के साथ साथ अगर हम लौंग व मुनक्के का दान करें तो हमारे जीवन में आ रही विपरीत परिस्थितियों से हमारा बचाव होगा । आलस्य व कलंक से मुक्ति मिलेगी। हड्डियों के रोगों से बचाव होगा।

दूसरी मां ब्रह्मचारिणी

दूसरी मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान व विद्या की देवी हैं। जो व्यक्ति समय का सदुपयोग कर एकाग्रता के साथ विद्या का अर्जन करता है ,वह मां ब्रहमचारिणी के आशीष का पात्र बन ,जीवन में सफलता प्राप्त करता है। दूसरी देवी ब्रह्मचारिणी के पूजन के साथ साथ अगर हम गेंहू व आम का दान करें तो यश और आत्मविश्वास की वृद्धि होगी। नेत्र व हृदय रोगों से बचाव होगा।

तीसरी मां चंद्रघंटा

मां चंद्रघंटा को शांति अति प्रिय है। सौम्य व्यवहार व शांतचित वाले व्यक्ति को उनका आशीष सदा ही प्राप्त होता है। कम बोलो और मीठा बोलो, यही मां चंद्रघंटा की शिक्षा है।

तीसरी देवी चंद्रघंटा के पूजन के साथ साथ अगर हम चावल व दूध का दान करें तो मानसिक दुर्बलता से मुक्ति मिलेगी। एकाग्रता शक्ति बढ़ेगी। अवसाद व सर्दी जुखाम जैसे रोगों से बचाव होगा।

चौथी मां कुष्मांडा

चौथी मां कुष्मांडा ,स्वास्थ्य व दीर्घायु का आशीर्वाद देने वाली है। जो व्यक्ति नियमित शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करता है ,वह मां कुष्मांडा का सदैव प्रिय रहता है। अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चौथी देवी कुष्मांडा के पूजन के साथ साथ अगर हम अनार व लाल मसूर का दान करें तो संपत्ति विवाद में जीत होगी। रक्त रोग व मधुमेह जैसी बीमारियों से बचाव होगा।

पांचवी देवी स्कंदमाता

पांचवी देवी स्कंदमाता, कार्तिकेय की माता के रूप में पूजी जाती हैं। जो मां अपने बच्चों को दया, परोपकार व सच्चाई की राह दिखाती है ,वह स्कंदमाता के हृदय में वास करती हैं। पांचवी देवी स्कंदमाता के पूजन के साथ साथ अगर हम पेठे एवं अमरुद का दान करें , तो वाणी दोष दूर होंगे।  व्यापार में वृद्धि मिलेगी। कुष्ठ व चर्म रोग से बचाव होगा। स्कंदमाता का आशीष उस मां व उनके बच्चों पर सदैव रहता है।

छठी देवी कात्यानी

देवी के छठे रूप को कात्यानी कहते हैं। मां कात्यानी हमें सच की राह पर चलना सिखाती है ।जो व्यक्ति सच्ची सेवा व अच्छे आचरण के साथ जीवन व्यापन करता है ,उसे मां कात्यानी का आशीष प्राप्त होता है। अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना भी मां की सेवा ही है। छठी देवी कात्यायनी के पूजन के साथ साथ अगर हम चने की दाल व पपीते का दान करें, तो ज्ञान की वृद्धि होगी। समाज में सम्मान की प्राप्ति होगी। लीवर व कर्ण रोगों से बचाव होगा।

सातवीं देवी कालरात्रि

देवी का सातवां रूप मां कालरात्रि का है। मां कालरात्रि अन्याय के खिलाफ व धर्म की हानि होने पर अपना रौद्र रूप दिखाकर दोषी को सज़ा देती हैं। यह क्रोध भूकंप ,बाढ़ ,तूफान ,भुखमरी आदि के रूप में प्रदर्शित करती हैं। सातवीं देवी कालरात्रि के पूजन के साथ साथ अगर हम दही व मखाने का दान करें तो ऐश्वर्या की प्राप्ति होगी। संतान कष्ट से मुक्ति मिलेगी। सूजन व जलोदर की समस्याओं में बचाव होगा।

आठवीं देवी महा गौरी

आठवी मां गौरी सुख, प्रेमानंद व खुशहाली देने वाली माता है। जो व्यक्ति अपने परिवार व समाज की सच्ची पालन करता है ,उसे मां गौरी सुख व समृद्धि प्रदान करती हैं। आठवीं देवी महागौरी की पूजन के साथ साथ अगर हम मूली (पत्ते निकालकर) दान करें और गरीब बच्चों को चॉकलेट का दान करें, तो क्रोध पर विजय प्राप्त होगी। कब्ज़ व वायु विकार से बचाव होगा।

नवीं देवी सिद्धिदात्री

नवी दुर्गा का नाम सिद्धिदात्री है। यह सर्वज्ञ भगवान वेद द्वारा प्रतिपादित हुई हैं। जो व्यक्ति सहयोगी बन अपना वह दूसरों के कल्याण के हित में कार्य करता है ,उसे मां सिद्धिदात्री अपनी शरण में ले कर विषम से विषम संकट से उबारती हैं। हर अमंगल से बचाती हैं। नवी दुर्गा सिद्धिदात्री के पूजन के साथ साथ अगर हम नारियल व कमल गट्टे का दान करें तो एकाग्रता शक्ति बढ़ेगी। गलत सलाहकारों से मुक्ति मिलेगी और मिर्गी व रसौली जैसी समस्याओं से बचाव होगा।

यह है नवरात्रि में नौ देवियों की महिमा का भंडार। इनकी सच्चे मन, वचन व काया से पूजन करने से आत्मा की शुद्धि होती हैं और हमारा जीवन सुंदर व आकर्षक बनता है।

दीप्ति जैन
आधुनिक वास्तु एस्ट्रो विशेषज्ञ

दीप्ति जैन एक जानी-मानी वास्तुविद हैं, जिन्होंने पिछले 3 सालों से वास्तु विज्ञान के क्षेत्र में अपने कौशल और प्रतिभा को बखूबी दर्शाया है। उनके इस योगदान के लिए उन्हें कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। दीप्ति जैन न केवल वास्तु बल्कि सामाजिक मुद्दों, हस्‍तरेखा विज्ञान, अध्यात्म, कलर थेरेपी, सामुद्रिक शास्त्र जैसे विषयों की भी विशेषज्ञ हैं।

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